Gen Z की नई फूड क्रश पास्ता नहीं, अब 'मिलेट बाउल्स', स्वाद, सेहत और स्टाइल का परफेक्ट कॉम्बो, क्या है इसकी वजह?

Millet vs Pasta: जनरेशन Z ने 2025 का सबसे कूल फूड ट्रेंड बना दिया है मिलेट बाउल्स. सेहतमंद शरीर और चमकती त्वचा से लेकर पर्यावरण के लिए फ्रेंडली वाइब्स तक, जानिए क्यों ये प्राचीन अनाज आपकी थाली और इंस्टाग्राम फीड पर पास्ता को पछाड़ रहे हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

Millet vs Pasta: अब पास्ता और स्पेगेटी को थोड़ी सी जगह देनी होगी, क्योंकि प्राचीन अन्न 'मिलेट' (बाजरा) अब सोशल मीडिया और कैफे मेनू दोनों में सेंटर स्टेज ले रहा है. जेन Z जो कभी सिर्फ आइस्ड माचा लाटे, कोम्बुचा और गट-हेल्थ ग्रीन्स की दीवानी थी अब अपने बोल में इतिहास भी परोस रही है और स्वाद के साथ. टिकटॉक से इंस्टाग्राम तक, मिलेट बाउल्स सिर्फ ट्रेंड नहीं हैं बल्कि एक स्टेटमेंट हैं  हेल्दी, टिकाऊ और फोटो-परफेक्ट. पास्ता का दौर खत्म नहीं हुआ है लेकिन मिलेट की एंट्री ने उसे थोड़ा बैकसीट पर जरूर बिठा दिया है.

क्यों Gen Z को पसंद आ रहा है मिलेट?

मिलेट न सिर्फ हल्का और सुपाच्य है बल्कि भरपूर ऊर्जा भी देता है. पास्ता की तरह खाने के बाद नींद नहीं आती, उल्टा ये आपकी फोकस को बनाए रखता है. ग्लूटन-फ्री, फाइबर से भरपूर और पोषक तत्वों का पावरहाउस, मिलेट पढ़ाई हो या जूम मीटिंग हर मौके पर फिट बैठता है.

हेल्थ हैक या हेल्थ फ्लेक्स?

मिलेट को यूं ही ग्लो-अप ग्रेन नहीं कहा जा रहा. इसमें प्रोटीन, आयरन, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट होते हैं जो न सिर्फ एनर्जी बढ़ाते हैं बल्कि पाचन सुधरता है त्वचा साफ होती है और इम्यून सिस्टम भी मजबूत होता है. फिटनेस फ्रीक हो या वेलनेस लवर सबके लिए है परफेक्ट चॉइस.

क्लाइमेट के लिए भी है कूल

क्लाइमेट चेंज को लेकर सजग Gen Z को मिलेट से बेहतर विकल्प नहीं मिल सकता. ये गेहूं या चावल की तुलना में कम पानी लेता है कठिन मौसम में भी फलता-फूलता है और प्राकृतिक रूप से पेस्ट-रेसिस्टेंट होता है. यानी हर मिलेट बाउल के साथ आप न सिर्फ खुद के लिए बल्कि पृथ्वी के लिए भी अच्छा फैसला कर रहे हैं.

इंस्टा-कोर

अब बात करें इंस्टाग्राम की जहां पास्ता अक्सर फीका और एक-सा दिखता है वहीं मिलेट बाउल्स में होती है रंग-बिरंगी सब्जियां, एवोकाडो रोज, तीखे ड्रेसिंग्स और खाने वाले फूल. मतलब – पोषण भी, प्रेजेंटेशन भी. जब एक डिश आपका पेट भी भरे और आपके फॉलोअर्स भी बढ़ाए, तो कौन मना करेगा?

इसका मतलब यह नहीं कि पास्ता अब 'कैंसिल' हो चुका है. क्रीमी कार्बोनारा जैसी कम्फर्ट डिशेज हमेशा दिल के करीब रहेंगी. लेकिन बात ये है कि पुराने जमाने का बाजरा अब सिर्फ दादी-नानी की थाली में नहीं बल्कि कैफे के मेनू में भी ट्रेंडी बन गया है. Gen Z ने अपनी प्लेट में जो चॉइस डाली है वो न सिर्फ स्वादिष्ट है बल्कि एक सोच समझकर किया गया बदलाव है जो सेहत, पर्यावरण और लाइफस्टाइल सबका ख्याल रखते हुए.

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