वृंदावन से उठता बड़ा सवाल, जब सैलरी अटकी तो क्या व्यवस्था ने ठाकुर जी की सेवा तक रोक दी

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में सैलरी न मिलने से हलवाई ने भोग नहीं बनाया. पहली बार ठाकुर जी को बाल और शयन भोग नहीं लगा.

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

Regional News:  वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में बुधवार देर रात तक वीबी-जी राम जी नामकरण से जुड़े बिल पर नहीं बल्कि मंदिर व्यवस्था से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया। पहली बार ठाकुर जी को बाल भोग और शयन भोग नहीं लगाया गया। वजह साफ रही, हलवाई को लंबे समय से वेतन नहीं मिला। लाखों श्रद्धालुओं के बीच ठाकुर जी बिना भोग के दर्शन में विराजमान रहे। यह घटना वर्षों से चली आ रही परंपरा के टूटने के रूप में देखी जा रही है। श्रद्धालुओं में इसे लेकर हैरानी और पीड़ा साफ दिखाई दी।

भोग व्यवस्था कैसे अचानक ठप हुई?

श्री ठाकुर बांके बिहारी मंदिर में प्रतिदिन ठाकुर जी के लिए बाल भोग और शयन भोग लगाया जाता है। यह जिम्मेदारी तय हलवाई की होती है, जिसे हर महीने अस्सी हजार रुपये वेतन दिया जाता है। लेकिन बीते कुछ महीनों से हलवाई को भुगतान नहीं हुआ। इसी कारण हलवाई ने भोग तैयार करने से इनकार कर दिया। परिणामस्वरूप न सुबह का भोग बना और न रात का। सेवादारों के पास ठाकुर जी को अर्पित करने के लिए भोग ही नहीं था।

गोस्वामियों में नाराजगी क्यों?

इस घटना को लेकर मंदिर के गोस्वामियों में भारी आक्रोश है। गोस्वामी समाज का कहना है कि ठाकुर जी की सेवा में ऐसी लापरवाही अक्षम्य है। उनका आरोप है कि मंदिर की जिम्मेदारी संभाल रही व्यवस्था समय पर भुगतान सुनिश्चित नहीं कर पाई। गोस्वामियों ने साफ कहा कि यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला है। वर्षों से बिना रुके चली आ रही परंपरा का इस तरह टूटना बेहद दुखद है।

हाई पावर कमेटी पर सवाल क्यों उठे?

श्री बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्थाएं सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित हाई पावर कमेटी के अधीन हैं। घटना सामने आने के बाद कमेटी की भूमिका पर सवाल खड़े हुए। कमेटी के सदस्य दिनेश गोस्वामी ने माना कि भुगतान में देरी हुई। उन्होंने बताया कि जैसे ही जानकारी मिली, मयंक गुप्ता को भुगतान करने के आदेश दे दिए गए हैं। साथ ही भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने, इसके लिए सख्त निर्देश भी जारी किए जा रहे हैं।

ठाकुर जी को रोज कितनी बार भोग लगता है?

मंदिर परंपरा के अनुसार ठाकुर जी को दिन में चार बार भोग लगाया जाता है। सुबह बाल भोग, दोपहर में राजभोग, शाम को उत्थापन भोग और रात में शयन भोग। यह व्यवस्था वर्षों से निरंतर चलती आ रही है। लेकिन इस बार सेवायतों को भोग नहीं मिला। यह पहली बार हुआ जब ठाकुर जी बिना बाल और शयन भोग के दर्शन में विराजमान रहे। यही वजह है कि इस घटना को ऐतिहासिक और चिंताजनक माना जा रहा है।

श्रद्धालुओं पर क्या असर पड़ा?

देश-विदेश से आए श्रद्धालुओं में इस घटना को लेकर गहरा दुख देखा गया। कई भक्तों ने कहा कि उन्होंने अपने जीवन में कभी ठाकुर जी को बिना भोग के दर्शन देते नहीं देखा। श्रद्धालुओं का मानना है कि मंदिर की व्यवस्थाओं में पारदर्शिता और समयबद्धता बेहद जरूरी है। आस्था से जुड़ी किसी भी व्यवस्था में लापरवाही नहीं होनी चाहिए। भक्तों ने मांग की है कि जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय की जाए।

क्या यह मंदिर व्यवस्था के लिए चेतावनी है?

यह घटना मंदिर प्रशासन और हाई पावर कमेटी दोनों के लिए चेतावनी मानी जा रही है। सवाल यह उठता है कि यदि समय पर भुगतान हो जाता, तो क्या परंपरा टूटती। अब निगाहें इस पर हैं कि आगे व्यवस्था को कैसे सुधारा जाता है। क्योंकि वृंदावन में ठाकुर जी की सेवा केवल एक प्रक्रिया नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास का केंद्र है।

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