आज है सीता अष्टमी, इस विधि से करें पूजा, तो बरसेगा अखंड सौभाग्य और शांति का आशीर्वाद
सनातन परंपरा में फाल्गुन कृष्ण अष्टमी को बहुत खास माना जाता है, क्योंकि इसी पावन दिन माता जानकी का जन्म हुआ था. आज जानकी जयंती पर मर्यादा पुरुषोत्तम राम के साथ मां सीता की पूजा कैसे करें. जानें शुभ मुहूर्त क्या है और इसका धार्मिक महत्व.

आज 9 फरवरी 2026 को हिंदू धर्म में बहुत ही पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व जानकी जयंती बड़े उत्साह और श्रद्धा से मनाया जा रहा है. ठीक वैसे ही जैसे चैत्र मास की राम नवमी पर भगवान श्री राम का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाता है, उसी प्रकार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि पर माता सीता का जन्मदिन यानी जानकी जयंती मनाई जाती है. इस दिन माता सीता की पूजा-अर्चना करने से सुख, सौभाग्य और वैवाहिक जीवन में सुख-शांति प्राप्त होती है.
पंचांग के अनुसार यह तिथि आज प्रातःकाल से शुरू होकर अगले दिन तक रहेगी, इसलिए उदया तिथि के आधार पर जानकी जयंती आज ही मनाई जा रही है. महिलाएं विशेष रूप से इस व्रत और पूजा को करके अखंड सौभाग्यवती होने की कामना करती हैं. आइए विस्तार से जानते हैं जानकी जयंती का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, धार्मिक महत्व और माता सीता के प्राकट्य की कथा.
जानकी जयंती का शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि 9 फरवरी 2026 को प्रातः 05:01 बजे से शुरू होकर 10 फरवरी 2026 को प्रातः 07:27 बजे तक रहेगी. उदया तिथि के आधार पर जानकी जयंती आज 9 फरवरी को ही मनाई जाएगी. पूजा के लिए आज का अभिजित मुहूर्त प्रातः 11:55 से दोपहर 12:40 बजे तक रहेगा, जो अत्यंत शुभ माना जाता है.
जानकी जयंती की पूजा विधि
मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम की अर्धांगिनी माता सीता की जयंती का पुण्य प्राप्त करने के लिए साधक को सुबह स्नान-ध्यान के बाद सबसे पहले सियाराम का स्मरण करना चाहिए. फिर व्रत का संकल्प लें. घर के पूजा स्थल या ईशान कोण में पीले कपड़े पर चौकी बिछाकर भगवान राम और माता सीता की मूर्ति या चित्र स्थापित करें. गंगाजल छिड़ककर चंदन, रोली, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, सिंदूर, बिंदी और श्रृंगार की सामग्री अर्पित करें. इसके बाद माता सीता की कथा सुनें या पढ़ें. जानकी जयंती पर ‘ॐ जानकीवल्लभाय नमः' मंत्र का जप अधिक से अधिक करें. राजा जनक और माता सुनयना की भी पूजा करें तथा अंत में सियाराम की आरती अवश्य उतारें.
जानकी जयंती का धार्मिक महत्व
जानकी जयंती की पूजा और व्रत करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है. यह व्रत जीवन में समस्त सुखों को प्रदान करने वाला माना गया है. कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है, जबकि विवाहित महिलाओं के वैवाहिक जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है. हिंदू मान्यता के अनुसार माता सीता मां लक्ष्मी का ही स्वरूप हैं, इसलिए इस पूजा से धन, वैभव और समृद्धि भी प्राप्त होती है.
माता सीता का प्राकट्य कैसे हुआ?
हिंदू मान्यता के अनुसार मिथिला राज्य में एक बार भीषण अकाल पड़ा. राजा जनक ने ऋषि-मुनियों की सलाह पर इंद्र देव को प्रसन्न करने के लिए स्वयं हल चलाया. जब वे खेत जोत रहे थे, तभी हल का अगला हिस्सा एक सोने के कलश से टकराया. कलश में एक दिव्य कन्या खेलती हुई दिखी. राजा जनक ने इसे दैवीय आशीर्वाद मानकर पुत्री के रूप में स्वीकार किया और नाम सीता रखा. जनक की पुत्री होने से उन्हें जानकी या जनकनंदिनी भी कहा जाता है.
सीता माता की आरती
आरती श्री जनक दुलारी की.
सीता जी रघुवर प्यारी की.जगत जननी जग की विस्तारिणी,
नित्य सत्य साकेत विहारिणी,
परम दयामयी दिनोद्धारिणी,
सीता मैया भक्तन हितकारी की.आरती श्री जनक दुलारी की .
सीता जी रघुवर प्यारी की.सतीशिरोमणि पति हित कारिणी,
पति सेवा हित वन वन चारिणी,
पति हित पति वियोग स्वीकारिणी,
त्याग धर्म मूरति धारी की.आरती श्री जनक दुलारी की .
सीता जी रघुवर प्यारी की.विमल कीर्ति सब लोकन छाई,
नाम लेत पावन मति आई,
सुमिरत कटत कष्ट दुखदाई,
शरणागत जन भय हारी की.आरती श्री जनक दुलारी की .
सीता जी रघुवर प्यारी की.
Disclaimer: ये धार्मिक मान्यताओं पर आधारित है, JBT इसकी पुष्टि नहीं करता.


