Budh Pradosh Vrat: आज का प्रदोष व्रत है खास, जानिए पूजा विधि, शुभ मुहूर्त और महत्व

15 अप्रैल को बुध प्रदोष व्रत रखा जा रहा है, जो बुद्धि और सफलता के लिए खास माना जाता है. इस दिन पूजा का सही समय और विधि जानना बेहद जरूरी है, वरना पूरा लाभ नहीं मिल पाता.

Shraddha Mishra

हिन्दू धर्म में प्रदोष व्रत को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव और माता पार्वती की श्रद्धा से पूजा करने पर जीवन के दुख-दर्द धीरे-धीरे कम होने लगते हैं और घर में सुख, शांति व समृद्धि का वास होता है. आज, 15 अप्रैल 2026 को बुध प्रदोष व्रत रखा जा रहा है, जो विशेष रूप से ज्ञान, बुद्धि और करियर में सफलता के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है. अगर आपकी कुंडली में बुध ग्रह कमजोर है, तो यह व्रत आपके लिए खास लाभकारी हो सकता है.

बुध प्रदोष व्रत 2026 तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि की शुरुआत 14 अप्रैल की रात 12 बजकर 12 मिनट से हो चुकी है. यह तिथि 15 अप्रैल को रात 10 बजकर 31 मिनट तक रहेगी. प्रदोष काल को ध्यान में रखते हुए व्रत 15 अप्रैल, बुधवार के दिन ही रखा जा रहा है, इसलिए इसे बुध प्रदोष व्रत कहा जाता है.

बुध प्रदोष व्रत 2026 का शुभ मुहूर्त

प्रदोष व्रत की पूजा का सबसे उत्तम समय प्रदोष काल ही माना जाता है. इस दिन शाम 6 बजकर 56 मिनट से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक पूजा का शुभ समय रहेगा. इसी दौरान भगवान शिव की पूजा करना अधिक फलदायी माना गया है.

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

इस व्रत को करने के लिए सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे कपड़े पहनें. पूरे दिन व्रत रखते हुए भगवान शिव का ध्यान करें.
शाम के समय प्रदोष काल में पूजा शुरू करें. शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र अर्पित करें.
इसके बाद श्रद्धा के साथ “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप करें. पूजा के दौरान मन को शांत रखें और भगवान से अपनी मनोकामनाएं प्रकट करें.

भगवान शिव की आरती

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...

एकानन चतुरानन पंचानन राजे, हंसानन गरुड़ासन वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव...

दो भुज चार चतुर्भुज दस भुज अति सोहे, त्रिगुण रूप निरखते, त्रिभुवन जन मोहे॥ ॐ जय शिव...

अक्षमाला वनमाला मुण्डमाला धारी, त्रिपुरारी कंसारी कर माला धारी॥ ॐ जय शिव...

श्वेताम्बर पीताम्बर बाघम्बर अंगे, सनकादिक गरुणादिक भूतादिक संगे॥ ॐ जय शिव...

कर के मध्य कमण्डलु चक्र त्रिशूल धर्ता, जगकर्ता जगभर्ता जग संहारकर्ता॥ ॐ जय शिव...

ब्रह्मा विष्णु सदाशिव जानत अविवेका, प्रणवाक्षर में शोभित यह त्रिवेद का टीका॥ ॐ जय शिव...

शिव ओंकारा शिव ओंकारा हर ऊंकारा, ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा। ब्रह्मा विष्णु सदाशिव अर्द्धांगी धारा॥ ॐ जय शिव...

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