क्या है माघ पूर्णिमा का धार्मिक महत्व? इसे लेकर शास्त्रों में क्या कहा गया?

माघ मास की पूर्णिमा को हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना गया है. पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी की सुबह 5:52 बजे आरंभ होकर 2 फरवरी की रात 3:38 बजे तक रहेगी.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

माघ मास की पूर्णिमा को हिंदू पंचांग में अत्यंत पवित्र और पुण्यदायी तिथि माना गया है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा से व्यक्ति के जीवन में आध्यात्मिक शुद्धि आती है. वर्ष 2026 में माघ पूर्णिमा 1 फरवरी रविवार को मनाई जाएगी. 

शास्त्रों में माघ पूर्णिमा का क्या वर्णन है?

पंचांग के मुताबिक, पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी की सुबह 5:52 बजे आरंभ होकर 2 फरवरी की रात 3:38 बजे तक रहेगी. इस पूरे समय को धार्मिक कार्यों के लिए विशेष शुभ माना गया है. शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि माघ पूर्णिमा पर विधिपूर्वक स्नान और आराधना करने से पापों का क्षय होता है और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है. इस दिन की गई साधना मन और आत्मा को शुद्ध करने में सहायक मानी जाती है. 

मान्यता है कि माघ मास में पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है. भगवद पुराण और पद्म पुराण में भी इस तिथि के महत्व का उल्लेख किया गया है, जहां गंगा, यमुना सहित अन्य पवित्र नदियों में स्नान को अत्यंत फलदायी बताया गया है.

माघ पूर्णिमा के अवसर पर पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठानों का विशेष महत्व है. इस दिन घर में या नदी तट पर हवन, दीप प्रज्वलन और आरती करना शुभ माना जाता है. भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है. शास्त्रों के अनुसार, इस दिन किया गया दान अनेक वर्षों के पापों को नष्ट करने की क्षमता रखता है. फल, अन्न, दूध, मिठाई और वस्त्र का दान विशेष रूप से लाभकारी माना गया है. यह दिन साधकों और भक्तों के लिए आत्मचिंतन और कर्मों की शुद्धि का अवसर प्रदान करता है.

माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान का संयोग

माघ पूर्णिमा पर स्नान और दान का संयोग अत्यंत महत्वपूर्ण माना गया है. पवित्र नदियों में स्नान करने से न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और आत्मिक अशुद्धियां भी दूर होती हैं. साथ ही, इस दिन किए गए दान का पुण्य कई गुना बढ़ जाता है. जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन दान करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है. शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि स्नान और दान के साथ सच्चे मन से की गई भक्ति व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाती है.

माघ पूर्णिमा से जुड़ी मान्यताओं के अनुसार, इस दिन व्रत और पूजा करने से रोग, भय और कष्ट दूर होते हैं. कई ग्रंथों में उल्लेख है कि माघ पूर्णिमा की साधना मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त करती है. भक्तों का विश्वास है कि इस दिन किए गए धार्मिक कर्मों से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन में स्थायी सुख व शांति का वास होता है. यही कारण है कि माघ पूर्णिमा को हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यकारी और शुभ तिथि माना गया है.

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