क्या थी अजित दादा की आखिरी इच्छा...पूरी कर पाएंगे एनसीपी नेता?

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री अजीत पवार का 28 जनवरी 2026 को बारामती में विमान दुर्घटना में निधन हो गया. इस घटना के बाद एनसीपी के दो गुटों में एकता की चर्चाएं तेज कर दीं, क्योंकि अजीत पवार हाल में शरद पवार से मिलकर पार्टी विलय की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यह अधूरी रह गई.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

मुंबईः महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) के प्रमुख नेता अजीत पवार का 28 जनवरी 2026 को एक दर्दनाक विमान हादसे में निधन हो गया. यह घटना न केवल राज्य की सियासत के लिए बड़ा झटका है, बल्कि एनसीपी के दो गुटों के बीच लंबे समय से चल रही खाई को पाटने की संभावनाओं को भी नई हवा दे रही है.

अजीत पवार मुंबई से बारामती जा रहे थे, जहां वे आगामी स्थानीय निकाय चुनावों (जिला परिषद और पंचायत समिति) के लिए चार महत्वपूर्ण बैठकों और जनसभाओं में हिस्सा लेने वाले थे. लेकिन कम दृश्यता के कारण विमान लैंडिंग के दूसरे प्रयास में दुर्घटनाग्रस्त हो गया, जिसमें अजीत पवार समेत पांच लोगों की जान चली गई.

विलय पर क्या बोले एनसीपी नेता?

इस हादसे के बाद एनसीपी के दोनों गुटों के बीच फिर से एकजुट होने की चर्चाएं जोर पकड़ गई हैं. सूत्रों के मुताबिक, अजीत पवार पिछले कुछ महीनों से अपने चाचा शरद पवार से मिल रहे थे और पार्टी को एक करने की कोशिश कर रहे थे. जनवरी के मध्य में हुई एक मुलाकात में स्थानीय चुनाव और कृषि से जुड़े मुद्दों पर बात हुई थी, लेकिन कुछ रिपोर्टों में कहा गया कि पुनर्मिलन पर भी गहन चर्चा हुई. हालांकि, एनसीपी के महाराष्ट्र प्रदेश अध्यक्ष सुनील तटकरे ने स्पष्ट किया कि 17 जनवरी की बैठक केवल चुनावी तैयारियों और एक कार्यक्रम पर केंद्रित थी, विलय जैसी कोई बात नहीं हुई.

वरिष्ठ नेता जयंत पाटिल ने खुलासा किया कि अजीत पवार ने कई बार उनके घर आकर पुनर्मिलन की इच्छा जताई थी. उन्होंने बताया कि अजीत पवार ने शरद पवार के प्रति गहरा सम्मान व्यक्त किया और महाराष्ट्र में जो कुछ बीता, उसे भूलकर पार्टी को मजबूत करने की बात कही. हमने 8-10 बार चर्चा की, जिसमें 2-3 बैठकें अहम थीं. 

12 फरवरी को होना था बड़ा ऐलान

पाटिल के अनुसार, अजीत पवार ने उन्हें 12 फरवरी को एकता की घोषणा की तारीख तय करने की जिम्मेदारी सौंपी थी, लेकिन यह कभी हुआ नहीं.एनसीपी (एसपी) के एक नेता अंकुश काकड़े ने भावुक होकर कहा कि अजीत पवार अपने चाचा को उनके जन्मदिन (12 दिसंबर) पर पुनर्मिलन का तोहफा देना चाहते थे. उन्होंने कई वरिष्ठ नेताओं से सुलह कराने की अपील की थी.

अधूरी रह गई अजित दादा की इच्छा 

काकड़े ने याद किया कि अजीत दादा ने कहा था कि 12 दिसंबर को हम एक हो जाते, लेकिन नहीं हो सका. कोई बात नहीं, चुनाव बाद एकजुट होंगे. दुर्भाग्य से, यह इच्छा अधूरी रह गई. जुलाई 2023 में अजीत पवार के अलग होकर महायुति सरकार में शामिल होने से एनसीपी दो हिस्सों में बंट गई थी. तब से दोनों गुट अलग-अलग रास्ते पर थे, लेकिन हाल के महीनों में परिवार और राजनीतिक हितों को देखते हुए सुलह की कोशिशें तेज हुईं. 

बनी हुई है अनिश्चितता

अजीत पवार की मौत ने इस प्रक्रिया को अनिश्चितता में डाल दिया है, लेकिन कई नेता मानते हैं कि यह दुखद घटना उलटे एकता को तेज कर सकती है. महाराष्ट्र की सत्ता समीकरणों पर इसका असर पड़ेगा, खासकर जब स्थानीय चुनाव नजदीक हैं.अजीत पवार महाराष्ट्र की राजनीति के 'दादा' कहलाते थे. उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनकी एकता की कोशिशें शायद अब भी पार्टी को नई दिशा दे सकें. 

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