हिमालय की 8000 फीट ऊंचाई पर छिपा देवगुरु पर्वत: भारत का एकमात्र बृहस्पति मंदिर, जानिए इसकी चमत्कारी कहानी

उत्तराखंड की देवभूमि में हर पर्वत और नदी पौराणिक कथाओं से जुड़ी है. इन्हीं में से एक है नैनीताल के ओखलकांडा में देवगुरु पर्वत पर बसा भगवान बृहस्पति का प्राचीन मंदिर. समुद्र तल से लगभग 8000 फीट ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर ज्ञान, तपस्या और आस्था का जीवंत प्रतीक है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

उत्तराखंड: देवभूमि उत्तराखंड को रहस्यों, चमत्कारों और दिव्यता की भूमि यूं ही नहीं कहा जाता. यहां की हर पर्वत चोटी, हर नदी और हर वनखंड किसी न किसी पौराणिक कथा और आध्यात्मिक ऊर्जा से जुड़ा हुआ है. इसी कड़ी में नैनीताल जिले के समीप स्थित एक पावन शिखर ऐसा भी है, जो देवताओं के गुरु बृहस्पति देव को समर्पित है और अपनी अद्भुत मान्यताओं के कारण श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है.

समुद्र तल से करीब 8000 फीट की ऊंचाई पर स्थित देवगुरु पर्वत न केवल प्राकृतिक सौंदर्य का अनुपम उदाहरण है, बल्कि आध्यात्मिक साधना और गुरु कृपा प्राप्ति का भी एक प्रमुख केंद्र माना जाता है. मान्यता है कि यहां दर्शन मात्र से जीवन में ज्ञान, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

कहां स्थित है देवगुरु बृहस्पति मंदिर?

यह प्राचीन और दुर्लभ मंदिर उत्तराखंड के नैनीताल जिले के ओखलकांडा ब्लॉक में देवगुरु पर्वत की चोटी पर स्थित है. यह स्थान उन चुनिंदा धामों में शामिल है, जहां विशेष रूप से गुरु बृहस्पति की पूजा-अर्चना की जाती है. चारों ओर फैले घने जंगल, शांत वातावरण और ऊंची पर्वत चोटियां इस स्थल को ध्यान और साधना के लिए आदर्श बनाती हैं.

मंदिर से जुड़ी पौराणिक कथा

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब-जब देवताओं पर संकट आया या असुरों से युद्ध की स्थिति बनी, तब देवगुरु बृहस्पति इसी पर्वत पर आकर तपस्या और चिंतन में लीन हो गए. कहा जाता है कि इसी स्थान पर की गई उनकी कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें देवताओं का गुरु पद प्रदान किया और नवग्रहों में सम्मानित स्थान दिया. स्थानीय जनश्रुतियों के अनुसार, प्राचीन काल में कई महान ऋषि-मुनियों ने भी यहां साधना की थी.

श्रद्धालुओं की आस्था और मान्यताएं

आज भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी जन्म कुंडली में गुरु दोष के निवारण, ज्ञान प्राप्ति और जीवन में सही मार्गदर्शन के लिए यहां आते हैं. यह स्थान विशेष रूप से उन लोगों के लिए आस्था का केंद्र है, जो शिक्षा, अध्यात्म और बौद्धिक उन्नति की कामना करते हैं.

ज्ञान और बुद्धि का केंद्र

मंदिर को ज्ञान और बुद्धि का प्रतीक माना जाता है. छात्र, शिक्षक और शिक्षा से जुड़े लोग यहां विशेष रूप से दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां पूजा-अर्चना करने से बुद्धि प्रखर होती है और निर्णय क्षमता मजबूत होती है.

गुरुवार का विशेष महत्व

हर बृहस्पतिवार को मंदिर में श्रद्धालुओं की विशेष भीड़ देखने को मिलती है. इस दिन पीले वस्त्र, पीले फूल और चने की दाल का भोग चढ़ाने की परंपरा है, जिसे गुरु बृहस्पति को अति प्रिय माना जाता है.

देवगुरु पर्वत कैसे पहुंचें?

यदि आप देवगुरु पर्वत के दर्शन करना चाहते हैं, तो सबसे पहले हल्द्वानी या काठगोदाम पहुंचना होगा. वहां से भीमताल होते हुए ओखलकांडा के लिए बस या टैक्सी उपलब्ध है. मुख्य सड़क से मंदिर तक पहुंचने के लिए कुछ किलोमीटर की पैदल चढ़ाई करनी पड़ती है, जो श्रद्धालुओं के लिए एक आध्यात्मिक अनुभव बन जाती है.

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