आईजीआई एयरपोर्ट के कस्टम अधिकारी अशोक कुमार ने ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज बॉडीबिल्डिंग में जीता सिल्वर
आईजीआई एयरपोर्ट पर तैनात एयर कस्टम्स सुपरिटेंडेंट अशोक कुमार ने ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज बेस्ट फिजीक चैंपियनशिप में सिल्वर जीतकर सरकारी सेवा के साथ फिटनेस का शानदार उदाहरण पेश किया।

आईजीआई एयरपोर्ट पर तैनात एयर कस्टम्स सुपरिटेंडेंट अशोक कुमार ने खेल जगत में बड़ी उपलब्धि हासिल की। उन्होंने ऑल इंडिया सिविल सर्विसेज बेस्ट फिजीक चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता। यह प्रतियोगिता दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में आयोजित हुई। 50+ मास्टर्स कैटेगरी में उनका प्रदर्शन शानदार रहा। सरकारी जिम्मेदारियों के साथ फिटनेस बनाए रखना चुनौतीपूर्ण माना जाता है। लेकिन अशोक कुमार ने इसे संभव कर दिखाया। उनकी सफलता मेहनत और अनुशासन का परिणाम है। इस जीत ने विभाग का नाम रोशन किया। साथ ही सहकर्मियों को प्रेरणा दी। फिटनेस के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया।
क्या राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में कड़ा मुकाबला था?
यह प्रतियोगिता राष्ट्रीय स्तर की प्रतिष्ठित स्पर्धा थी। इसमें 26 राज्यों और सरकारी बोर्डों के खिलाड़ी शामिल हुए। करीब 170 एथलीट्स ने अपनी प्रतिभा दिखाई। प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी मानी जा रही थी। हर प्रतिभागी फिटनेस और तैयारी में मजबूत था। ऐसे माहौल में सिल्वर जीतना बड़ी उपलब्धि है। अशोक कुमार का मंच पर प्रदर्शन प्रभावशाली रहा। जजों ने उनकी फिटनेस और प्रस्तुति की सराहना की। प्रतियोगिता ने सरकारी सेवकों की खेल प्रतिभा को मंच दिया। इससे खेल भावना को बढ़ावा मिला।
क्या फिटनेस और ड्यूटी का संतुलन मुश्किल होता है?
सरकारी सेवा में समय और जिम्मेदारियां ज्यादा होती हैं। इसके बावजूद फिटनेस बनाए रखना कठिन माना जाता है। अशोक कुमार ने अनुशासन से संतुलन बनाया। नियमित अभ्यास और खानपान पर ध्यान दिया। उन्होंने फिटनेस को जीवनशैली बनाया। यह सफलता उसी निरंतर प्रयास का परिणाम है। ड्यूटी और ट्रेनिंग दोनों में संतुलन दिखा। इससे साबित हुआ कि इच्छाशक्ति से लक्ष्य हासिल होते हैं। उनका सफर प्रेरणादायक उदाहरण बन गया। कई अधिकारियों को नई ऊर्जा मिली। फिटनेस के महत्व को भी बल मिला।
क्या यह उपलब्धि विभाग के लिए गर्व का पल है?
अशोक कुमार की जीत ने भारतीय कस्टम्स को गौरवान्वित किया। विभाग में खुशी और गर्व का माहौल है। सहकर्मियों ने उन्हें बधाई दी। वरिष्ठ अधिकारियों ने भी उपलब्धि की सराहना की। यह सफलता टीम भावना का प्रतीक बनी। सरकारी कर्मचारियों की सकारात्मक छवि सामने आई। फिटनेस को बढ़ावा देने का संदेश मिला। विभागीय संस्कृति में ऊर्जा का संचार हुआ। युवा कर्मचारियों के लिए प्रेरणा बनी। सार्वजनिक सेवा के साथ व्यक्तिगत उत्कृष्टता का उदाहरण बना।
क्या फिटनेस से कार्यक्षमता भी बढ़ती है?
विशेषज्ञ मानते हैं कि फिटनेस कार्यक्षमता को बढ़ाती है। शारीरिक स्वास्थ्य मानसिक मजबूती देता है। इससे कार्य प्रदर्शन बेहतर होता है। अशोक कुमार की सफलता इसका उदाहरण है। फिटनेस से आत्मविश्वास भी बढ़ता है। तनाव प्रबंधन आसान होता है। सरकारी सेवा में यह बेहद जरूरी है। स्वस्थ जीवनशैली कार्य संतुलन में मदद करती है। इसलिए फिटनेस को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यह व्यक्तिगत और पेशेवर दोनों लाभ देती है।
क्या यह जीत अन्य कर्मचारियों को प्रेरित करेगी?
अशोक कुमार की उपलब्धि प्रेरणादायक कहानी बन गई है। इससे कई सरकारी कर्मचारियों को प्रेरणा मिलेगी। फिटनेस अपनाने का संदेश मजबूत हुआ है। खेल गतिविधियों में भागीदारी बढ़ सकती है। स्वस्थ जीवनशैली को बढ़ावा मिलेगा। प्रतियोगिता ने सकारात्मक उदाहरण पेश किया। इससे कार्यस्थल पर ऊर्जा बढ़ेगी। कर्मचारियों में प्रतिस्पर्धा और उत्साह आएगा। प्रेरक कहानियां बदलाव लाती हैं। अशोक कुमार की यात्रा भी ऐसा ही संदेश देती है।
क्या खेल और सेवा का मेल नई पहचान देगा?
सरकारी सेवा और खेल का मेल नई पहचान बना सकता है। अशोक कुमार की सफलता इसी दिशा का संकेत है। इससे सेवा क्षेत्र की छवि सकारात्मक बनती है। सार्वजनिक जीवन में फिटनेस का महत्व बढ़ता है। खेल और अनुशासन का संयोजन प्रेरक है। भविष्य में ऐसे उदाहरण और सामने आ सकते हैं। विभागीय स्तर पर खेल संस्कृति मजबूत होगी। इससे राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिभा को बढ़ावा मिलेगा। अशोक कुमार की उपलब्धि नई राह दिखाती है। यह सफलता प्रेरणा का स्थायी स्रोत बनेगी।


