छह फुट आठ इंच का तूफान, ऑस्ट्रेलिया की सांसें रोक गया जिम्बाब्वे का गेंदबाज
कोलंबो में खेले गए टी20 वर्ल्ड कप मुकाबले में जिम्बाब्वे ने ऑस्ट्रेलिया को चौंका दिया। इस जीत के हीरो बने 6 फुट 8 इंच लंबे तेज गेंदबाज ब्लेसिंग मुजारबानी। उनकी गेंदों ने मैच की दिशा बदल दी।

मैदान पर जब मुजारबानी दौड़ते हैं तो सबसे पहले उनकी लंबाई नजर आती है। छह फुट आठ इंच। गेंद हाथ से नहीं, जैसे आसमान से गिरती है। ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज समझ ही नहीं पाए। चार ओवर में सिर्फ 17 रन। चार बड़े विकेट। जोश इंगलिस, टिम डेविड जैसे नाम भी टिक नहीं सके। यह उनका यादगार स्पेल रहा। ऑस्ट्रेलिया लक्ष्य का पीछा कर रहा था। शुरुआत से ही दबाव था। मुजारबानी ने लाइन और लेंथ नहीं छोड़ी। गेंद कभी बाहर निकलती। कभी अंदर आती। बल्लेबाज गलती करते गए। कप्तान ट्रेविस हेड भी जल्दी लौटे। बड़े नाम पवेलियन में थे। स्कोरबोर्ड ठहर गया। मैच वहीं से पलट गया।
आरसीबी से क्या है नाता?
आईपीएल से भी उनका कनेक्शन रहा है। रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने उन्हें पिछले सीजन में टीम में शामिल किया था। 75 लाख रुपये में साइन किया गया। हालांकि उन्हें खेलने का मौका नहीं मिला। लेकिन ड्रेसिंग रूम का अनुभव काम आया। बड़े खिलाड़ियों के साथ समय बिताना सीख देता है। यही आत्मविश्वास यहां दिखा। मुजारबानी नया नाम नहीं हैं। उन्होंने 2017 में टेस्ट डेब्यू किया था। तब से तीनों फॉर्मेट खेल रहे हैं। टेस्ट में 67 विकेट। वनडे में 70 विकेट। टी20 में 100 विकेट पूरे कर चुके हैं। उनकी इकोनॉमी काबू में रहती है। उछाल उनकी ताकत है। लगातार एक जैसी गेंद डालना उनकी पहचान है।
मैच का मोड़ कब आया?
जिम्बाब्वे ने पहले बल्लेबाजी की। 20 ओवर में 169 रन बने। ब्रायन बेनेट ने 64 रन बनाए। जवाब में ऑस्ट्रेलिया की शुरुआत खराब रही। बीच में मैक्सवेल और रेनशॉ ने साझेदारी की। उम्मीद जगी। तभी एक और विकेट गिरा। दबाव फिर बढ़ा। आखिरी ओवरों में रन नहीं निकले। मैच जिम्बाब्वे के नाम हो गया।
क्या यह सिर्फ एक उलटफेर?
कुछ लोग इसे उलटफेर कहेंगे। लेकिन जिम्बाब्वे की तैयारी गहरी थी। खिलाड़ी दुनिया भर की लीग खेलते हैं। अनुभव बढ़ा है। फिटनेस बेहतर है। अब वे डरते नहीं हैं। मुजारबानी जैसे गेंदबाज टीम की रीढ़ हैं। जब तेज गेंदबाज लय में हो तो बड़ी टीम भी छोटी लगती है।
आगे क्या बदलेगा क्रिकेट?
यह जीत सिर्फ दो अंक नहीं है। यह संदेश है। छोटे देश भी बड़ा सपना देख सकते हैं। ऑस्ट्रेलिया जैसी टीम को हराना आसान नहीं। लेकिन क्रिकेट अनिश्चित खेल है। एक अच्छा स्पेल सब बदल देता है। मुजारबानी ने यही किया। और जिम्बाब्वे ने बता दिया कि वे अब सिर्फ दर्शक नहीं, दावेदार भी हैं।


