46 सेकेंड में मैच छोडऩे पर विवाद: जेंडर-टेस्ट में फेल अल्जीरियाई बॉक्सर को लेकर सोशल मीडिया पर बहस

Paris Olympic: फ्रांस की राजधानी पेरिस में ओलंपिक का खेल का कार्यकम हो रहा है. इसके साथ ही एक मामला काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. बता दे कि अल्जीरिया की इमान खेलीफ ने गुरुवार को अपना पहला ओलंपिक मुक्केबाजी मुकाबला जीत लिया, जब उनकी प्रतिद्वंद्वी इटली की एंजेला कैरिनी ने मात्र 46 सेकंड के बाद ही मुकाबला छोड़ दिया.

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Edited By: JBT Desk

Paris Olympic: फ्रांस की राजधानी पेरिस में ओलंपिक का खेल का कार्यकम हो रहा है. इसके साथ ही एक मामला काफी चर्चा का विषय बना हुआ है. बता दे कि अल्जीरिया की इमान खेलीफ ने गुरुवार को अपना पहला ओलंपिक मुक्केबाजी मुकाबला जीत लिया, जब उनकी प्रतिद्वंद्वी इटली की एंजेला कैरिनी ने मात्र 46 सेकंड के बाद ही मुकाबला छोड़ दिया.

इस जल्दी खत्म होने के पीछे कारण था इमान खेलीफ का जोरदार पंच. उन्होंने ऐसा पंच मारा कि एंजेला कैरिनी रोने लगीं और कहा कि ऐसा पंच उन्होंने अपनी जिंदगी में कभी नहीं खाया. इसके अलावा, इमान खेलीफ पर जेंडर का आरोप भी लगाया गया है, यानी कि उन पर यह आरोप है कि वे महिला नहीं, बल्कि पुरुष हैं.

क्या खुद की पहचान बनाता गलत?

साल 2023 की जांच के मुताबिक ईमान खेलीफ को 2023 में विश्व चैंपियनशिप के फाइनल में पहले लिंग जांच में फेल होने के कारण बाहर कर दिया था. जांच में पाया गया कि वह पुरुष है. बीते साल ईमान खेलीफ की जांच में पाया गया था कि उनका टेस्टोस्टेरोन बहुत अधिक है. उनके DNA में XY दोनों क्रोमोसोम पाए गए थे. किसी भी इंसान के XY क्रोमोसोम पाए जाने का मतलब है कि वह पुरुष है. क्योंकि स्त्रियों में सिर्फ XX क्रोमोसोम्स होते हैं.


सोशल मीडिया पर उठ रहे सवाल

ओलंपिक में इमान के पहले मैच की जीत के बाद सोशल मीडिया पर सवाल उठ रहे हैं कि रिंग में महिला के सामने पुरुष को क्यों उतारा गया. इंटरनेशनल बॉक्सिंग एसोसिएशन (IBA) ने भी इंटरनेशनल ओलंपिक कमेटी (IOC) पर आरोप लगाया है कि IOC नियमों का उल्लंघन कर रही है. IBA का कहना है कि IOC ने महिला खिलाड़ियों के साथ न्याय और उनकी सुरक्षा को नजरअंदाज किया है. पूरी कंट्रोवर्सी को सवाल-जवाब में समझते हैं.

क्या होता है जेंडर टेस्ट?

खेलों में जेंडर टेस्ट किसी खिलाड़ी का लिंग परीक्षण करने के लिए किया जाता है. इसमें एथलीट में मेल हार्मोन का लेवल जांचा जाता है. यदि किसी एथलीट में पुरुष प्रधान हार्मोन तय मात्रा से अधिक होता है, तो उसे प्रतियोगिता में भाग लेने से रोक दिया जाता है.

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