पाकिस्तानी क्रिकेटर दानिश कनेरिया का बड़ा खुलासा, हिंदू होने के कारण क्रिकेट में हुआ भेदभाव

पाकिस्तान क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी दानिश कनेरिया ने हाल ही में एक चौंकाने वाला खुलासा किया है, जिसमें उन्होंने कहा कि हिंदू होने के कारण उन्हें पाकिस्तान में क्रिकेट खेलने के दौरान भेदभाव का सामना करना पड़ा. कनेरिया ने अमेरिका में एक कार्यक्रम के दौरान अपनी आपबीती सुनाई और बताया कि उनके धर्म के कारण उनका करियर प्रभावित हुआ.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

पाकिस्तान क्रिकेट टीम लगातार उतार-चढ़ाव से गुजर रही है. टीम के कप्तान, कोच और मैनेजमेंट में बार-बार बदलाव हो रहे हैं, जिसका असर टीम के प्रदर्शन पर भी पड़ रहा है. हाल ही में, पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया ने पाकिस्तान में अपने साथ हुए भेदभाव के बारे में खुलासा किया. उन्होंने बताया कि अल्पसंख्यक समुदाय से होने के कारण उन्हें क्रिकेट में समान अवसर नहीं मिले और इसके चलते उनके करियर पर असर पड़ा.

दानिश कनेरिया हाल ही में अमेरिका के वाशिंगटन में एक कार्यक्रम में शामिल हुए, जहां उन्होंने पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ होने वाले भेदभाव पर बात की. कनेरिया ने कहा कि पाकिस्तान में उन्हें अन्य खिलाड़ियों जैसा सम्मान और अवसर नहीं मिला. उन्होंने बताया कि उनके धर्म के कारण उन्हें अलग तरीके से पेश आया गया, जिससे उनके करियर को नुकसान हुआ. कनेरिया का कहना है कि उन्हें पाकिस्तान में क्रिकेट खेलते हुए भेदभाव का सामना करना पड़ा.

अंतरराष्ट्रीय समर्थन की अपील

इस कार्यक्रम में कनेरिया ने अमेरिका से अपील की कि वह ऐसे खिलाड़ियों की मदद करें जो भेदभाव का शिकार हो रहे हैं. उनका कहना था कि इस तरह के मामलों पर सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि खेल में सभी को समान अवसर मिल सकें. कनेरिया ने कहा कि अगर इस मुद्दे पर जागरूकता बढ़ाई जाए, तो बदलाव संभव है.

जल्दी संन्यास लेने को मजबूर

आमतौर पर क्रिकेट खिलाड़ी 30 साल की उम्र के बाद अपने करियर के सर्वोत्तम स्तर पर पहुंचते हैं, लेकिन दानिश कनेरिया को 29 साल की उम्र में ही क्रिकेट छोड़ना पड़ा. उन्होंने अपने करियर में 61 टेस्ट मैच खेले, जिसमें 261 विकेट लिए. वहीं, वनडे क्रिकेट में उन्होंने 18 मैचों में 15 विकेट चटकाए. उनके करियर का अचानक अंत होने पर कई सवाल उठे, लेकिन अब उन्होंने खुद बताया कि भेदभाव के कारण उन्हें जल्दी संन्यास लेना पड़ा. कनेरिया का मानना है कि अगर उन्हें समान अवसर मिलते, तो वह और लंबा खेल सकते थे.

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