भारत की ट्रेड डील से घबराया बांग्लादेश, चुनाव से 72 घंटे पहले यूनुस सरकार साइन करेगी अमेरिका के साथ एग्रीमेंट

अमेरिका और बांग्लादेश 9 फरवरी को चुनाव से तीन दिन पहले व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं. संभावित 15% टैरिफ कटौती की उम्मीद है, लेकिन गोपनीय शर्तों और वस्त्र उद्योग पर असर को लेकर देश में चिंता बढ़ी हुई है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: अमेरिका और बांग्लादेश 9 फरवरी को एक नए व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर करने जा रहे हैं. खास बात यह है कि यह समझौता 12 फरवरी को होने वाले राष्ट्रीय चुनाव से ठीक तीन दिन पहले किया जा रहा है. इसी वजह से बांग्लादेश में इसे लेकर राजनीतिक और आर्थिक बहस तेज हो गई है. समझौते की शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया गया है, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं. हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता हुआ, जिसके तहत भारतीय उत्पादों पर शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया गया. 

इसके बाद बांग्लादेश पर दबाव बढ़ गया कि वह भी अमेरिका से बेहतर या बराबर शर्तें हासिल करे. बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से रेडीमेड गारमेंट (आरएमजी) उद्योग पर निर्भर है. अमेरिका को होने वाले उसके कुल निर्यात का लगभग 90 से 96 प्रतिशत हिस्सा कपड़ों से जुड़ा है. यदि अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद सस्ते हो जाते हैं और बांग्लादेश को समान राहत नहीं मिलती, तो उसके ऑर्डर भारत की ओर जा सकते हैं.

शुल्क में कमी की उम्मीद

अप्रैल 2025 में अमेरिका ने बांग्लादेश पर 37 प्रतिशत का भारी शुल्क लगाया था. बाद में बातचीत के बाद इसे घटाकर 35 प्रतिशत और फिर 20 प्रतिशत कर दिया गया. अब उम्मीद है कि नए समझौते के तहत यह दर 15 प्रतिशत तक लाई जा सकती है. यह कमी बांग्लादेश के लिए राहत हो सकती है, लेकिन इसकी शर्तें अभी साफ नहीं हैं.

गोपनीयता पर उठे सवाल

मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने अमेरिका के साथ एक गोपनीयता समझौता किया है. इसके तहत व्यापार वार्ताओं और शर्तों को सार्वजनिक नहीं किया गया है. न तो संसद और न ही उद्योग संगठनों को मसौदा दिखाया गया है. कई अर्थशास्त्रियों और नीति विशेषज्ञों का कहना है कि इतने बड़े समझौते पर खुली चर्चा होनी चाहिए थी. उनका तर्क है कि चुनाव के बाद नई सरकार को इस पर निर्णय लेना चाहिए था, क्योंकि इसके लंबे समय तक असर पड़ सकते हैं.

अमेरिका की संभावित शर्तें

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समझौते में कुछ शर्तें भी शामिल हो सकती हैं. इनमें चीन से आयात घटाना और अमेरिका से रक्षा खरीद बढ़ाना शामिल है. इसके अलावा अमेरिकी उत्पादों को बांग्लादेश में बिना अतिरिक्त जांच या बाधा के प्रवेश देने की बात भी कही जा रही है. विशेष रूप से अमेरिकी वाहनों और पुर्जों पर जांच में ढील देने की चर्चा है, ताकि उन्हें बाजार में आसान पहुंच मिल सके.

बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग उसकी अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. इसमें लाखों लोग काम करते हैं, जिनमें बड़ी संख्या में महिलाएं हैं. देश की कुल निर्यात आय का 80 प्रतिशत से अधिक हिस्सा इसी क्षेत्र से आता है. यदि व्यापार नियमों में ऐसा बदलाव होता है जो बांग्लादेश के हित में नहीं है, तो इससे रोजगार और विदेशी मुद्रा आय पर सीधा असर पड़ सकता है.

राजनीतिक बहस तेज

चूंकि यह समझौता एक गैर-निर्वाचित अंतरिम सरकार द्वारा चुनाव से ठीक पहले किया जा रहा है, इसलिए आलोचना और बढ़ गई है. कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाली निर्वाचित सरकार को इसकी शर्तों का पालन करना होगा, चाहे वे उससे सहमत हों या नहीं. यह समझौता सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है. 

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