कश्मीर पर पाकिस्तान को बड़ा झटका, इस मुस्लिम देश ने छोड़ा साथ... भारत के रुख को मिला समर्थन

कश्मीर मुद्दे पर पाकिस्तान को एक और कूटनीतिक झटका लगा है. मुस्लिम देश कजाकिस्तान ने पाकिस्तान के दावों से दूरी बनाते हुए अपने आधिकारिक बयानों में जम्मू-कश्मीर का कोई जिक्र नहीं किया, जिससे भारत के रुख को अप्रत्यक्ष समर्थन मिलता दिखा.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की पाकिस्तान की पुरानी कोशिशों को एक बार फिर करारा झटका लगा है. इस बार मध्य एशिया के अहम मुस्लिम देश कजाकिस्तान ने पाकिस्तान के दावों से खुद को अलग कर लिया है और जम्मू-कश्मीर पर भारत के स्टैंड के अनुरूप रुख अपनाया है. इससे पाकिस्तान की कूटनीतिक चालें बेनकाब हो गई हैं.

कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट टोकायेव की इस्लामाबाद यात्रा के बाद पाकिस्तान ने एक कथित संयुक्त बयान जारी कर कश्मीर पर समर्थन का दावा किया था. लेकिन जब इस बयान की पड़ताल हुई, तो सामने आया कि कजाकिस्तान की ओर से जम्मू-कश्मीर का कोई जिक्र ही नहीं किया गया है. इससे प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ की सरकार की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं.

पाकिस्तान के दावे, हकीकत से कोसों दूर

पाकिस्तान ने दावा किया था कि कजाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के प्रस्तावों के अनुसार सुलझाने का समर्थन किया है. हालांकि, गुरुवार 5 फरवरी 2026 की शाम तक कजाकिस्तान की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं हुआ. इस मामले से जुड़े लोगों के अनुसार, इस दावे का कोई ठोस प्रमाण मौजूद नहीं है.

आधिकारिक वेबसाइट पर नहीं मिला कश्मीर का जिक्र

कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कार्यालय की आधिकारिक वेबसाइट 'अकोर्डा' पर जारी दस्तावेजों में भी कश्मीर मुद्दे का कोई उल्लेख नहीं है. इसके साथ ही, कजाकिस्तान की सरकारी समाचार एजेंसी ने भी इस विषय पर कोई बयान या रिपोर्ट प्रकाशित नहीं की. कजाक पक्ष की ओर से जारी जानकारी में मुख्य रूप से आर्थिक सहयोग, कनेक्टिविटी पहल और राष्ट्रपति टोकायेव की यात्रा के दौरान हुए वाणिज्यिक समझौतों पर ही फोकस किया गया है.

कूटनीतिक हलकों में पाकिस्तान की आलोचना

सूत्रों के मुताबिक, पाकिस्तान की ओर से जारी बयान में कश्मीर पर समर्थन का दावा किया गया, लेकिन कजाकिस्तान की आधिकारिक प्रतिक्रिया में इसका कोई संकेत नहीं मिला. कूटनीतिक जानकार इसे पाकिस्तान द्वारा तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करने की कोशिश मान रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत के खिलाफ माहौल बनाने की पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा हो सकता है, लेकिन हाल के वर्षों में उसे इस मुद्दे पर व्यापक समर्थन नहीं मिल पाया है.

भारत के रुख को मिला अप्रत्यक्ष समर्थन

कजाकिस्तान द्वारा अपने आधिकारिक बयानों में जम्मू-कश्मीर का जिक्र न करना भारत के पक्ष में एक मजबूत संकेत माना जा रहा है. भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका आंतरिक मामला है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका या अंतरराष्ट्रीयकरण की कोई गुंजाइश नहीं है. भारत का रुख रहा है कि इस मुद्दे का समाधान भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय वार्ता से ही संभव है, बशर्ते सीमा पार आतंकवाद समाप्त हो.

आर्थिक सहयोग रहा कजाकिस्तान की प्राथमिकता

मध्य एशिया में भारत के अहम साझेदार कजाकिस्तान ने हाल के वर्षों में नई दिल्ली के साथ व्यापार, ऊर्जा और कनेक्टिविटी परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाया है. राष्ट्रपति टोकायेव की यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जिनका उद्देश्य द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देना और क्षेत्रीय संपर्क को मजबूत करना है. कजाकिस्तान की आधिकारिक घोषणाओं में इन्हीं पहलुओं पर जोर दिया गया, जिससे साफ होता है कि उसकी प्राथमिकता विवादित राजनीतिक मुद्दों की बजाय आर्थिक और रणनीतिक सहयोग रही.

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