किसान पहले: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर पीयूष गोयल का बड़ा बयान

भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर किसानों में उठी आशंकाओं पर केंद्र सरकार ने संसद में साफ संदेश दे दिया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि कृषि और डेयरी भारत की “रेड लाइन” हैं और इन पर कोई समझौता नहीं किया गया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते को लेकर किसानों में उठी आशंकाओं पर केंद्र सरकार ने संसद में साफ संदेश दे दिया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने लोकसभा में स्पष्ट किया कि कृषि और डेयरी भारत की "रेड लाइन" हैं और इन पर कोई समझौता नहीं किया गया है.

हाल ही में घोषित भारत-अमेरिका अंतरिम व्यापार समझौते के बाद भारतीय किसानों में चिंता देखी गई. 2 फरवरी 2026 को अमेरिकी कृषि मंत्री ब्रूक रॉलिन्स के ट्वीट ने इन आशंकाओं को और हवा दी, जिसमें कहा गया कि यह समझौता "अमेरिकी कृषि उत्पादों को भारत के विशाल बाजार में अधिक निर्यात” का रास्ता खोलेगा. किसान संगठनों और विपक्षी दलों ने आशंका जताई कि इससे सब्सिडी वाले अमेरिकी कृषि और डेयरी उत्पाद भारतीय बाजार में आ सकते हैं.

लोकसभा में पीयूष गोयल का स्पष्ट आश्वासन

4 फरवरी 2026 को लोकसभा में बोलते हुए वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने इन सभी चिंताओं को सिरे से खारिज किया. उन्होंने साफ कहा,"भारत ने कृषि और डेयरी क्षेत्रों की रक्षा में सफलता हासिल की है."

उन्होंने यह भी दोहराया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने "किसानों के हितों को कभी समझौता नहीं करने दिया" और इन क्षेत्रों को "अनुचित प्रतिस्पर्धा से बचाने के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय किए गए हैं."

कृषि और डेयरी भारत की अटल लाल रेखा

मंत्री गोयल ने स्पष्ट किया कि खाद्य, कृषि और डेयरी क्षेत्र भारत की संवेदनशील प्राथमिकताएं हैं. उन्होंने कहा कि "खाद और कृषि क्षेत्र में भारत की संवेदनशीलता का पूरा ध्यान रखा गया है."

सरकार का रुख साफ है कि मुख्य कृषि उपज, डेयरी उत्पाद और अन्य संवेदनशील वस्तुएं किसी भी ऐसी रियायत से बाहर रखी गई हैं, जिससे घरेलू किसानों को नुकसान हो सकता हो.

समझौता क्या बढ़ाएगा, क्या नहीं

करीब एक साल चली गहन वार्ताओं के बाद यह तय किया गया है कि कृषि उत्पादों पर किसी भी तरह की व्यापक शून्य टैरिफ सहमति नहीं है. किसी भी टैरिफ में कमी केवल गैर-संवेदनशील श्रेणियों तक सीमित है. इसके उलट, यह समझौता कपड़ा, परिधान, चमड़ा, रत्न-आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पाद जैसे श्रम-गहन क्षेत्रों के निर्यात को बढ़ावा देगा, जिससे रोजगार और एमएसएमई को मजबूती मिलेगी.

सरकार का संदेश: डर नहीं, भरोसा रखें

पीयूष गोयल ने यह स्पष्ट कर दिया कि सरकार की पहली प्राथमिकता किसानों की सुरक्षा और भलाई है. संसद में दिया गया यह बयान केवल राजनीतिक आश्वासन नहीं, बल्कि वार्ताओं के ठोस परिणामों पर आधारित है. जल्द आने वाला भारत-अमेरिका संयुक्त बयान अंतिम तस्वीर साफ करेगा, लेकिन लोकसभा से संदेश पहले ही स्पष्ट है ,भारतीय किसान सुरक्षित हैं और सरकार उनके साथ मजबूती से खड़ी है.

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