रेपो रेट स्थिर, GDP ग्रोथ अनुमान बढ़ा… RBI MPC के फैसलों से क्या बदलेगा आपके लिए?

आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के फैसले सामने आ गए हैं. केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है, जबकि आर्थिक मोर्चे पर राहत देते हुए GDP ग्रोथ अनुमान को बढ़ा दिया गया है. आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान के बाद बाजार और आम लोगों पर इसके असर की चर्चा तेज हो गई है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के नतीजे सामने आ गए हैं. केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में किसी भी तरह का बदलाव नहीं करते हुए इसे 5.25 फीसदी पर बरकरार रखा है. इसका सीधा मतलब है कि फिलहाल होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन की ईएमआई में कोई बढ़ोतरी या राहत नहीं मिलेगी.

आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने फैसलों की जानकारी देते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर भले ही अनिश्चितता बनी हुई हो, लेकिन भारत में महंगाई पूरी तरह नियंत्रण में है. यही वजह है कि ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत महसूस नहीं की गई.

रेपो रेट पर यथास्थिति क्यों?

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा, "मॉनिटरी पॉलिसी बैठक में रेपो रेट को अपरिवर्तित रखने का फैसला लिया गया है." उन्होंने बताया कि देश में महंगाई दर करीब 4 फीसदी के आसपास बनी हुई है, जो आरबीआई के तय दायरे के भीतर है. इससे यह साफ होता है कि फिलहाल महंगाई का दबाव न तो आम उपभोक्ताओं पर ज्यादा है और न ही उद्योगों पर.

GDP ग्रोथ अनुमान में बढ़ोतरी

आरबीआई ने अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक संकेत दिए हैं. केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए GDP ग्रोथ अनुमान को 7.3 फीसदी से बढ़ाकर 7.4 फीसदी कर दिया है. गवर्नर ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था लचीली बनी हुई है और घरेलू मांग मजबूत है.

उन्होंने यह भी बताया कि आने वाले दिनों में GDP और महंगाई दोनों के लिए नया बेस ईयर लागू किया जाएगा, जिससे आर्थिक आंकड़ों की तस्वीर और स्पष्ट होगी.

बजट 2026 और निर्यात से उम्मीद

आरबीआई गवर्नर के मुताबिक, बजट 2026 में घोषित कई कदम आर्थिक विकास के लिए अनुकूल साबित होंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि सेवाओं के निर्यात में मजबूती बनी रहेगी, जिससे भारत की ग्रोथ को सपोर्ट मिलेगा.

भारत-अमेरिका और EU डील का जिक्र

गवर्नर संजय मल्होत्रा ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते और संभावित भारत-अमेरिका व्यापार समझौते का भी उल्लेख किया. उनका कहना था कि इन अंतरराष्ट्रीय डील्स से भारत के निर्यात को नई ताकत मिलेगी और लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था को फायदा होगा.

शेयर बाजार पर दिखा असर

रेपो रेट में बदलाव न होने के बाद शेयर बाजार में कमजोरी देखने को मिली.

  • सेंसेक्स करीब 340 अंक गिरकर 83,000 के नीचे आ गया.
  • निफ्टी लगभग 150 अंक टूटकर 25,500 से नीचे कारोबार करता दिखा.
  • बैंक निफ्टी में भी करीब 300 अंकों की गिरावट दर्ज की गई.

ऑटो, बैंकिंग और रियल एस्टेट शेयरों में सबसे ज्यादा दबाव देखने को मिला. बीएसई ऑटो इंडेक्स, बैंकएक्स और रियल्टी इंडेक्स तीनों लाल निशान में बंद हुए.

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