30 साल की सत्ता ध्वस्त...BMC हाथ से गई तो ठाकरे का घमंड भी टूटा, कंगना की चेतावनी आज मुंबई की राजनीति में बन गई सच
आज BMC चुनाव में जिस चरह से ठाकरे ब्रदर्श की हार हुई है, उससे बॉलीवुड एक्ट्रेस कंगना रनौत की बात सच साबित होती दिख रही है. सितंबर 2020 में मुंबई महानगरपालिका ने कंगना का घर तोड़ दिया था, तब रनौत ने उद्धव ठाकरे को चेताते हुए कहा था कि ' आज मेरा घर टूटा है, कल तुम्हारा घमंड टूटेगा.'

मुंबई : बीएमसी में तीस साल की सत्ता गिरी तो सियासत का घमंड भी ढह गया. उद्धव ठाकरे बेदखल हुए. कंगना की पुरानी चेतावनी आज हकीकत बनकर मुंबई की राजनीति पर दर्ज हो गई. दरअसल, सितंबर 2020 में कंगना रनौत के मुंबई दफ्तर पर बीएमसी की कार्रवाई ने एक बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया था. उस समय कंगना रनौत ने तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे को चेतावनी देते हुए कहा था कि “आज मेरा घर टूटा है, कल तुम्हारा घमंड टूटेगा.”
"Aaj mera ghar toota hai, kal tera ghamand tootega"🔥
When Uddhav Thackeray was CM, he weaponized BMC to raze Kangana Ranaut's Mumbai bungalow.
Today, Queen Kangana's curse has finally crushed the Thackeray dynasty's political reign. Karma has its own timing🔥#BMCResults pic.twitter.com/MJ6LYoYLlY— AbhishekkkK (@Abhishekkkk10) January 16, 2026
सोशल मीडिया पर उनका यह वीडियो अब फिर से वायरल हो रहा है, क्योंकि 2026 के बीएमसी चुनावों में बीजेपी और एकनाथ शिंदे की गठबंधन वाली महायुति ने उद्धव ठाकरे और उनकी शिवसेना (UBT) को भारी मात दी. कंगना का पूर्वानुमान अब सही साबित होता दिख रहा है, और उनके शब्दों ने राजनीतिक परिदृश्य में सटीकता दिखाई है.
ठाकरे बंधुओं की हार के पीछे की वजहें
आपको बता दें कि इस चुनाव में ठाकरे बंधुओं की हार की कई राजनीतिक वजहें रही हैं. बीजेपी और शिंदे शिवसेना गठबंधन को कुल 227 सीटों में से लगभग 130 सीटों पर बढ़त दिख रही है, जबकि उद्धव ठाकरे की शिवसेना महज 71 सीटों तक सिमट गई. राज ठाकरे के साथ चुनाव लड़ने की रणनीति और कांग्रेस से गठबंधन न करना भी उद्धव ठाकरे की बड़ी गलती साबित हुई. इससे मनसे और शिवसेना दोनों को ही नुकसान हुआ, क्योंकि अल्पसंख्यक वोट और गैर-मराठी वोट उनके पक्ष से हटकर महायुति के पक्ष में चले गए.
महाराष्ट्र में मराठी वोटरों का प्रतिशत 38 %
मुंबई में ठाकरे बंधुओं ने ‘मराठी मानूस’ पर विशेष जोर दिया, लेकिन मुंबई में मराठी वोटरों का प्रतिशत केवल 38% है. वहीं, उत्तर भारतीय, गुजराती और अन्य समुदाय के वोटरों ने बीजेपी और शिंदे शिवसेना गठबंधन का समर्थन किया. राज ठाकरे की सख्त भाषा नीति और हिंदी विरोधी रुख ने उत्तर भारतीयों को महायुति के समर्थन में एकजुट कर दिया. यही कारण रहा कि उद्धव ठाकरे की शिवसेना और उनके सहयोगी दल चुनाव में पिछड़ गए.
महायुति की संगठनात्मक ताकत और रणनीति
बीजेपी और शिंदे शिवसेना ने संगठन स्तर पर मजबूत रणनीति अपनाई. देवेंद्र फडणवीस और एकनाथ शिंदे ने स्थानीय मुद्दों, विकास योजनाओं और केंद्रीय योजनाओं के लाभों को जनता तक पहुंचाया. गैर-मराठी वोटों का समर्थन और स्थिर राजनीतिक दृष्टिकोण ने महायुति को निर्णायक बहुमत दिलाया. इसके अलावा, चुनाव प्रचार में स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता देने और विकास के कार्यों को जनता तक दिखाने की रणनीति ने बीजेपी गठबंधन को पहली बार मुंबई में मेयर पद दिलाने में मदद की.


