बीएमसी चुनाव 2026: मुंबई जीतने वाला कौन बनेगा महाराष्ट्र का किंगमेकर?
महाराष्ट्र के नगर निगम चुनाव सत्ता से कहीं ज्यादा राजनीतिक वर्चस्व की लड़ाई बन गए हैं, जिनमें खासकर मुंबई नगर निगम पर सभी प्रमुख दलों की नजर है.

महाराष्ट्र के आगामी नगर निगम चुनाव केवल स्थानीय सत्ता की लड़ाई नहीं हैं, बल्कि राज्य की राजनीति की दिशा तय करने वाले अहम मुकाबले बन गए हैं. इन चुनावों में कई बड़े नेताओं की साख दांव पर लगी है और सबसे ज्यादा ध्यान मुंबई नगर निगम (बीएमसी) पर केंद्रित है, जिसे हमेशा से सत्ता की राजनीति का केंद्र माना जाता रहा है.
देवेंद्र फडणवीस की व्यापक रणनीति
देवेंद्र फडणवीस ने भारतीय जनता पार्टी की ओर से सभी 29 नगर निगमों में जीत सुनिश्चित करने के लिए व्यापक रणनीति बनाई है. गठबंधन प्रबंधन से लेकर चुनाव प्रचार तक, हर स्तर पर उनकी भूमिका निर्णायक रही है. हालांकि, उनके लिए सबसे बड़ा लक्ष्य बीएमसी है, जिस पर पिछले ढाई दशकों तक अविभाजित शिवसेना का दबदबा रहा. 2017 में भाजपा बीएमसी में सत्ता के बेहद करीब पहुंच गई थी, लेकिन तब फडणवीस ने सरकार की स्थिरता को प्राथमिकता देते हुए अपने सहयोगी शिवसेना से सीधी टक्कर नहीं ली. अब शिवसेना के विभाजन और उद्धव ठाकरे से बिगड़े रिश्तों के बाद भाजपा के पास मुंबई पर कब्जा जमाने का सुनहरा मौका है. बीएमसी में जीत फडणवीस को महाराष्ट्र का निर्विवाद नेता बना सकती है.
दूसरी ओर, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई जैसा है. 2022 में पार्टी टूटने और 2024 के विधानसभा चुनावों में खराब प्रदर्शन के बाद बीएमसी उनका आखिरी मजबूत किला बचा है. मुंबई पर नियंत्रण खोना न सिर्फ राजनीतिक नुकसान होगा, बल्कि “भूमिपुत्र” और मराठी अस्मिता के उनके दावे को भी गहरी चोट पहुंचाएगा. इसी कारण उन्होंने अपने चचेरे भाई और एमएनएस प्रमुख राज ठाकरे से समझौता किया है, ताकि मराठी वोटों को एकजुट किया जा सके. बीएमसी में जीत उद्धव को राज्य की राजनीति में दोबारा मजबूती से खड़ा कर सकती है, जबकि हार उनके लिए भारी झटका साबित होगी.
एकनाथ शिंदे का फोकस
उपमुख्यमंत्री और शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे भी इस चुनाव को बेहद अहम मान रहे हैं. स्थानीय निकाय चुनावों के पहले चरण में मिली सफलता के बाद वे उसी लय को बनाए रखना चाहते हैं. उनका खास फोकस मुंबई, ठाणे, कल्याण-डोंबिवली और नवी मुंबई पर है. यदि महायुति गठबंधन मुंबई में जीत हासिल करता है, तो यह उद्धव ठाकरे पर शिंदे की निर्णायक बढ़त मानी जाएगी और शिवसेना की विरासत पर उनका दावा और मजबूत होगा. इसके उलट, हार शिंदे के राजनीतिक भविष्य पर सवाल खड़े कर सकती है.
उपमुख्यमंत्री अजीत पवार ने भी अपनी रणनीति सीमित लेकिन महत्वपूर्ण नगर निगमों पर केंद्रित रखी है. पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ उनके लिए प्रतिष्ठा का प्रश्न बने हुए हैं. भाजपा के साथ तनाव और अपने चाचा शरद पवार के साथ बढ़ती नजदीकियों के बीच अजीत पवार का यह कदम उनकी राजनीतिक दिशा को लेकर अटकलें बढ़ा रहा है. इन नगर निगमों में जीत से उनकी स्थिति मजबूत होगी, जबकि हार से वे भाजपा पर और अधिक निर्भर हो सकते हैं.
राज ठाकरे के लिए बीएमसी चुनाव राजनीतिक पुनरुत्थान का अवसर है. 2024 में विधानसभा में खाता तक न खोल पाने के बाद उन्होंने उद्धव ठाकरे से हाथ मिलाया है. यदि यह गठबंधन सफल होता है, तो एमएनएस को नई ऊर्जा मिलेगी और राज ठाकरे की राजनीति में वापसी संभव होगी. हार की स्थिति में उन्हें अपनी रणनीति पर फिर से विचार करना पड़ेगा.
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ के लिए चुनौती
मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ के सामने भी बड़ी चुनौती है. कांग्रेस शहर में अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश कर रही है, लेकिन संगठनात्मक कमजोरी और गठबंधन को लेकर असमंजस उसकी राह मुश्किल बना रहे हैं. वंचित बहुजन अघाड़ी के साथ गठबंधन के बावजूद पार्टी की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है.
नवी मुंबई में भाजपा नेता गणेश नाइक और शिवसेना के बीच कड़ा मुकाबला है, जबकि वीबीए प्रमुख प्रकाश अंबेडकर के लिए यह चुनाव अपनी गिरती राजनीतिक साख को संभालने का प्रयास है. कुल मिलाकर, ये नगर निगम चुनाव महाराष्ट्र की राजनीति में नए समीकरण गढ़ सकते हैं और कई बड़े नेताओं के भविष्य का फैसला कर सकते हैं.


