असम चुनाव से पहले वोटर लिस्ट पर घमासान, फॉर्म-7 को लेकर क्यों सता रहा डर?

असम में चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष संशोधन को लेकर विवाद बढ़ गया है. विपक्ष फॉर्म-7 के दुरुपयोग का आरोप लगा रहा है, जबकि सरकार और चुनाव विभाग प्रक्रिया को कानूनी और पारदर्शी बता रहे हैं. अंतिम सूची 10 फरवरी को जारी होगी.

Shraddha Mishra

गुवाहाटी: चुनाव की तैयारी में जुटे असम में इस समय मतदाता सूची के विशेष संशोधन (स्पेशल रिवीजन- SR) को लेकर माहौल गरमा गया है. विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 का गलत इस्तेमाल कर वास्तविक और पात्र नागरिकों को परेशान किया जा रहा है. वहीं, राज्य चुनाव विभाग और सरकार इन आरोपों को सिरे से खारिज कर रहे हैं और पूरी प्रक्रिया को कानून के दायरे में बताया जा रहा है.

फॉर्म-7 एक कानूनी प्रावधान है, जिसके तहत कोई भी मतदाता वोटर लिस्ट में दर्ज किसी नाम पर आपत्ति कर सकता है. इसका उपयोग मृत्यु, स्थान परिवर्तन या गलत तरीके से नाम जोड़े जाने की स्थिति में नाम हटाने के लिए किया जाता है. विपक्ष का दावा है कि इसी प्रावधान का सहारा लेकर बड़ी संख्या में लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिससे डर और भ्रम का माहौल बन रहा है.

चुनाव विभाग ने दिया आश्वासन

हालांकि, चुनाव विभाग ने साफ किया है कि फॉर्म-7 भरने से किसी का नाम अपने आप नहीं हटता. हर आपत्ति की जांच तय कानूनी प्रक्रिया के तहत होती है, जिसमें मौके पर सत्यापन और संबंधित मतदाता को पूरी जानकारी देना शामिल है. राज्य चुनाव विभाग ने एक सार्वजनिक सूचना जारी कर कहा है कि किसी भी मतदाता का नाम बिना प्रक्रिया पूरी किए नहीं हटाया जा सकता. जिन लोगों के नाम हटाने का प्रस्ताव होता है, उन्हें पहले नोटिस दिया जाता है और अपनी बात रखने का पूरा मौका मिलता है. 

विभाग ने मतदाताओं से अपील की है कि वे घबराएं नहीं और सत्यापन अधिकारियों के साथ सहयोग करें. साथ ही यह भी चेतावनी दी गई है कि फॉर्म 6, 7 और 8 भरते समय सही जानकारी देना जरूरी है, क्योंकि गलत जानकारी देना या जानबूझकर गलत नाम बनाए रखना कानूनन अपराध है.

मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा का बयान

दावोस से लौटने के बाद मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने इस पूरे मामले पर खुलकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि एसआर को लेकर कोई विवाद नहीं है और नोटिस केवल “मिया” समुदाय, यानी बांग्लादेश मूल के मुस्लिम प्रवासियों को दिए जा रहे हैं, न कि स्थानीय हिंदू या असमिया मुस्लिम परिवारों को.

उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया कथित अवैध प्रवासियों पर दबाव बनाने की एक रणनीति का हिस्सा है. मुख्यमंत्री के अनुसार, सरकार कानून के भीतर रहते हुए कार्रवाई कर रही है और उन लोगों के साथ सख्ती जरूरी है जो असम की सामाजिक संरचना को नुकसान पहुंचा सकते हैं.

विपक्ष का विरोध और मांगें

विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मांग की है कि संशोधन प्रक्रिया के दौरान किसी भी योग्य मतदाता का नाम न हटाया जाए. वामपंथी दलों ने आरोप लगाया है कि फॉर्म-7 का इस्तेमाल खास तौर पर अल्पसंख्यक समुदाय को निशाना बनाने के लिए हो रहा है. कांग्रेस ने भी कुछ इलाकों में कथित गलत विलोपन और समावेशन को लेकर शिकायत दर्ज कराई है. इसके अलावा, विपक्ष ने आपत्तियों और दावों के निपटारे की अंतिम तारीख 2 फरवरी को आगे बढ़ाने की मांग भी की है.

10 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी अंतिम सूची

चुनाव विभाग के अनुसार, सभी दावे और आपत्तियां 2 फरवरी तक निपटा दी जाएंगी और अंतिम मतदाता सूची 10 फरवरी को प्रकाशित की जाएगी. मसौदा सूची पहले ही 12 दिसंबर को जारी की जा चुकी है. विभाग ने दोहराया है कि इस पूरी कवायद का मकसद एक साफ, सटीक और भरोसेमंद मतदाता सूची तैयार करना है, ताकि किसी भी योग्य मतदाता का अधिकार न छीना जाए.

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