सदियों के घाव भर रहे...PM मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर फहराया ध्वज, बोले-वेदना आज विराम पा रही

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर के शिखर पर आज प्रधानमंत्री मोदी ने ध्वज फहराया. इसके बाद उन्होंने लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि सदियों के घाव भर रहे हैं. संपूर्ण भारत राममय हो रहा है. उन्होंने कहा कि भगवान राम भेद से नहीं, भाव से जुड़ते हैं.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

उत्तर प्रदेश : अयोध्या में आज का दिन ऐतिहासिक रहा, जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राम मंदिर के शिखर पर धर्मध्वज फहराकर नई परंपरा की शुरुआत की. उनके साथ आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे. ध्वजारोहण के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि आज संपूर्ण विश्व और देश का प्रत्येक रामभक्त एक अनोखी भावनात्मक अनुभूति कर रहा है. उनके अनुसार, यह वह क्षण है जब सदियों का दर्द मिट रहा है और लंबे समय से प्रतीक्षित संकल्प पूर्णता को प्राप्त हुआ है.

“सदियों का घाव भर रहा है”...पीएम मोदी 
दरअसल, अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि अयोध्या आज सांस्कृतिक चेतना के एक नए शिखर को छू रही है. उन्होंने कहा कि रामभक्तों के हृदय में जो संतोष और कृतज्ञता का भाव है, वह अनूठा है. प्रधानमंत्री ने इस ऐतिहासिक पल को उन संघर्षों की परिणति बताया, जिनकी तपिश पाँच सदियों तक बनी रही. उनके मुताबिक, यह दिवस उन लोगों के लिए भी प्रतीकात्मक है जिनकी पीढ़ियाँ इस स्वप्न को सच होते देखने की प्रतीक्षा करती रही थीं.

PM मोदी ने धर्मध्वज के महत्व को समझाया 
प्रधानमंत्री ने शिखर पर फहराए गए भगवा धर्मध्वज के महत्व को विस्तार से समझाते हुए कहा कि यह मात्र एक ध्वज नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति के पुनर्जागरण का प्रतीक है. उन्होंने बताया कि इसमें प्रयुक्त भगवा रंग त्याग और साहस का प्रतीक है, सूर्यवंश का चिन्ह रामायण की गौरवपूर्ण विरासत को दर्शाता है, ‘ॐ’ का चिह्न दिव्यता का प्रतिनिधित्व करता है और कोविदार वृक्ष रामराज्य की आदर्श व्यवस्था का प्रतिरूप है. उन्होंने कहा कि यह ध्वज संघर्ष से सृजन तक की यात्रा और संतों तथा समाज के संयुक्त प्रयासों की सार्थक परिणति है.

“प्राण जाए पर वचन न जाए”, धर्मध्वज से मिली प्रेरणा
पीएम मोदी ने कहा कि यह ध्वज हमें यह संदेश देता है कि वचन का पालन सर्वोपरि है और कर्म की प्रधानता ही विश्व की वास्तविक शक्ति है. उन्होंने कहा कि रामराज्य का स्वरूप भेदभाव रहित, भयमुक्त और सुखमय समाज पर आधारित है, और धर्मध्वज उसी आदर्श की दिशा में प्रेरित करता है.

बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण
प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि राम मंदिर परिसर केवल आध्यात्मिक अनुभूति का स्थान ही नहीं, बल्कि भारत की सामूहिक शक्ति का प्रत्यक्ष प्रमाण भी है. परिसर में बने सप्त मंदिरों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि माता शबरी का मंदिर जनजातीय समाज की आत्मीयता और प्रेम को दर्शाता है, जबकि निषादराज का मंदिर उस मित्रता का प्रतीक है जिसमें साधन से अधिक भावना पवित्र मानी जाती है. उन्होंने कहा कि जटायु और गिलहरी की मूर्तियाँ यह याद दिलाती हैं कि बड़े लक्ष्यों को पूरा करने में छोटे प्रयास भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

एक ही स्थान पर सभी के दर्शन संभव
पीएम मोदी ने बताया कि इस पावन स्थान पर एक ही परिसर में माता अहिल्या, महर्षि वाल्मीकि, महर्षि वशिष्ठ, महर्षि विश्वामित्र, महर्षि अगस्त्य और संत तुलसीदास के दर्शन भी संभव हैं. उनके अनुसार, रामलला की उपस्थिति के साथ-साथ यह स्थान उन सभी ऋषियों की विरासत और ज्ञान को भी समेटे हुए है, जिन्होंने भारतीय संस्कृति के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई.

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