छांगुर बाबा की साज़िश: एक मामूली ताबीज़ विक्रेता से करोड़ों के धर्मांतरण गिरोह तक का सफर

साइकिल पर रत्न और ताबीज़ बेचने वाले जलालुद्दीन उर्फ़ छांगुर बाबा ने बेहद तेज़ और चुपचाप तरीके से 106 करोड़ रुपये की संपत्ति का साम्राज्य खड़ा कर लिया. अब वह गंभीर आरोपों के घेरे में है, जिसमें सैकड़ों महिलाओं का जबरन धर्म परिवर्तन कराना और विदेशी स्रोतों से अवैध फंड प्राप्त करना शामिल है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले से सामने आई जलालुद्दीन उर्फ़ छांगुर बाबा की कहानी न केवल हैरान करती है बल्कि यह एक गहरी साज़िश की परतों को भी उजागर करती है. कभी साइकिल पर अंगूठी और ताबीज़ बेचने वाला यह व्यक्ति आज कथित रूप से 106 करोड़ रुपये की विदेशी फंडिंग से संचालित एक बड़े धर्मांतरण रैकेट का मास्टरमाइंड निकला. यूपी एटीएस ने उसे और उसकी सहयोगी नीतू उर्फ़ नसरीन को गिरफ्तार किया है.

गरीब और असहाय महिलाओं को बनाया निशाना

छांगुर बाबा पर आरोप है कि उसने धर्मांतरण के लिए विशेष रूप से गरीब और असहाय महिलाओं को निशाना बनाया. पुलिस के मुताबिक, उसके पास से बरामद एक डायरी में जाति आधारित "रेट कार्ड" मिला है. ब्राह्मण/क्षत्रिय महिलाओं के धर्मांतरण पर 15–16 लाख, ओबीसी पर 10–12 लाख और अन्य जातियों के लिए 8–10 लाख रुपये तक का भुगतान तय था.

पुलिस और खुफिया एजेंसियों का मानना है कि जलालुद्दीन को खाड़ी देशों और पाकिस्तान से फंडिंग मिलती थी. इन पैसों से उसने बलरामपुर में अवैध हवेली, लोनावाला में महंगी जमीन और अन्य संपत्तियां खरीदीं. जांच में पता चला है कि उसके करीबियों के खातों में भी विदेशी पैसा पहुंचा और एक सहयोगी का खाता तो स्विस बैंक में है.

छांगुर बाबा की हवेली को ढहाया

उत्तर प्रदेश प्रशासन ने 8 जुलाई को उसकी हवेली को अवैध निर्माण बताते हुए ढहा दिया. सीएम योगी आदित्यनाथ ने इस पूरे प्रकरण को "राष्ट्र-विरोधी" साज़िश बताया. उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा के साथ खिलवाड़ करने वालों को छोड़ा नहीं जाएगा. स्थानीय पत्रकार आलोक ने बताया कि छांगुर बाबा का नेटवर्क 2015 में एक मामूली दुकान से शुरू हुआ था, लेकिन सऊदी अरब यात्रा के बाद उसने मुंबई और बलरामपुर में अपना प्रभाव बढ़ाया. उसने सूफी संत के रूप में 'पीर बाबा' की छवि बनाई और दरगाह के ज़रिए हजारों लोगों को आकर्षित किया.

आरोप है कि उसके संबंध न्यायिक मजिस्ट्रेटों और पुलिस अधिकारियों से थे, जिनके संरक्षण में वह कार्य करता रहा. उसकी दरगाह पर देश-विदेश से लोग आया करते थे. यूपी महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता चौहान और उपाध्यक्ष अपर्णा यादव ने इस पूरे मामले को महिलाओं के लिए घातक बताया और उसके लिए मृत्युदंड की मांग की है.

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