BMC रुझानों पर शिवसेना नेता का वार, 'ठाकरे भाई घर पर रहें, वर्क फ्रॉम होम करें'
बीएमसी चुनाव रुझानों में भाजपा-शिवसेना गठबंधन आगे चल रहा है, जिस पर शिवसेना नेता शाइना एनसी ने महायुति की जीत का दावा किया. उन्होंने ठाकरे भाइयों पर तंज कसते हुए कहा कि जनता ने ‘वर्क फ्रॉम होम’ करने वालों को नकार दिया है और मैदान में काम करने वालों को चुना है.

बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) की 227 वार्डों के लिए मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों ने मुंबई की राजनीति में हलचल तेज कर दी है. अब तक सामने आए आंकड़ों के अनुसार, भाजपा के नेतृत्व वाला महायुति गठबंधन बहुमत के करीब पहुंचता नजर आ रहा है. ताजा रुझानों में गठबंधन को करीब 118 सीटों पर बढ़त मिलती दिख रही है, जबकि ठाकरे भाइयों के गठबंधन को लगभग 69 सीटें मिलने की संभावना जताई जा रही है.
शाइना एनसी का शिवसेना (यूबीटी) पर हमला
इन रुझानों के बीच शिवसेना की वरिष्ठ नेता शाइना एनसी ने महायुति की जीत को लेकर भरोसा जताया है. उन्होंने विपक्ष, खासतौर पर उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (यूबीटी) पर तीखा हमला बोला. शाइना एनसी ने कहा कि हार-जीत का फैसला जनता करती है, न कि आरोपों और बहानों से. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जो लोग मैदान में उतरकर काम करते हैं, जनता उन्हें मौका देती है, जबकि जो लोग “वर्क फ्रॉम होम” की राजनीति करते हैं, उन्हें घर पर ही बैठना पड़ता है.
शाइना एनसी ने एकनाथ शिंदे के कामकाज की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने जमीनी स्तर पर समस्याओं के समाधान पर फोकस किया. उन्होंने दावा किया कि शिंदे सरकार ने मुंबई में गड्ढों की समस्या को चरणबद्ध तरीके से सुलझाया और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम उठाते हुए 26 ठेकेदारों को जेल भेजा. उनके अनुसार, पिछली सरकार जहां सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट जैसी बुनियादी सुविधाएं देने में नाकाम रही. वहीं मौजूदा सरकार ने समय पर सात प्लांट पूरे किए.
उन्होंने आगे कहा कि विकास के मोर्चे पर महायुति सरकार ने बड़े स्तर पर काम किया है. मुंबई में 5000 इलेक्ट्रिक बसों की शुरुआत, 435 किलोमीटर लंबी मेट्रो कनेक्टिविटी और पर्यावरण के अनुकूल कई योजनाओं को उन्होंने सरकार की उपलब्धियों के रूप में गिनाया. शाइना एनसी का कहना था कि केवल उपनाम के सहारे राजनीति नहीं चलती, बल्कि जनता ठोस काम देखती है.
बीएमसी चुनावों का इतिहास
बीएमसी चुनावों के इतिहास पर नजर डालें तो 2017 में अविभाजित शिवसेना सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी और भाजपा के साथ मिलकर बहुमत हासिल किया था. उस चुनाव में शिवसेना को 84 और भाजपा को 82 सीटें मिली थीं, जबकि कांग्रेस और एनसीपी काफी पीछे रहीं. इस बार का चुनाव इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि लंबे समय बाद बीएमसी के लिए मतदान हुआ, जिसमें करीब 52.94 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.


