सरकार का आदेश, अदालत की नाराजगी और पुलिस की चेतावनी के बावजूद जरांगे बोले जान दूंगा पर मैदान नहीं छोड़ूंगा

मराठा आरक्षण आंदोलन के नेता मनोज जरांगे पाटिल ने मुंबई के आजाद मैदान से हटने से इनकार कर दिया है. उनका कहना है कि चाहे उनकी मृत्यु ही क्यों न हो जाए, वे मैदान नहीं छोड़ेंगे. उन्होंने सरकार से मराठों को कुनबी जाति में मान्यता देने और आरक्षण लागू करने की मांग की है. हाई कोर्ट और पुलिस ने आंदोलनकारियों को नोटिस जारी कर सड़कें खाली करने का आदेश दिया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

Maratha Reservation : मराठा आरक्षण कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल ने मंगलवार को साफ कहा कि वे किसी भी हाल में मुंबई का आजाद मैदान खाली नहीं करेंगे. उनका कहना है कि चाहे उनकी मृत्यु क्यों न हो जाए, वे अनशन स्थल से नहीं हटेंगे. जरांगे ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सरकार ने उनकी मांगों को नहीं माना तो आने वाले दिनों में जनाक्रोश इतना बढ़ जाएगा जिसे संभालना मुश्किल हो जाएगा.

आरक्षण के लिए GR की मांग

जरांगे ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द एक सरकारी संकल्प (Government resolution) जारी किया जाए, जिसमें मराठों को कुनबी जाति के रूप में मान्यता दी जाए. इससे मराठा समाज को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिल सकेगा. उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को तुरंत वह अधिसूचना लागू करनी चाहिए जिसके तहत OBC कोटा के फायदे मराठा समाज के पात्र परिवारों तक पहुंचें.

शांति की अपील और सरकार को चेतावनी
जरांगे ने मराठा समुदाय से शांति बनाए रखने की अपील की. उन्होंने कहा कि वे सरकार से बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक वे मैदान नहीं छोड़ेंगे. जरांगे ने यह भी कहा कि यदि पुलिस ने उन्हें जबरन हटाने या गिरफ्तार करने की कोशिश की तो इसके गंभीर परिणाम होंगे.

पुलिस और अदालत का दबाव
इससे पहले मुंबई पुलिस ने जरांगे और उनकी टीम को नोटिस जारी कर आजाद मैदान खाली करने का आदेश दिया था. पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने हाई कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया है. वहीं, मुंबई हाई कोर्ट ने भी आंदोलनकारियों से कहा है कि मंगलवार दोपहर तक मुंबई की सड़कें खाली की जाएं ताकि शहर की सामान्य स्थिति बहाल हो सके. अदालत ने आंदोलन के कारण शहर के ठप पड़ने पर नाराज़गी जताई है.

जरांगे का आरोप और विश्वास
जरांगे ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाया कि वे कोर्ट को गुमराह कर रहे हैं और इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ेगा. उन्होंने कहा कि उन्हें पूरा विश्वास है कि अदालत गरीब मराठों को न्याय दिलाएगी. इस बीच, उन्होंने प्रदर्शनकारियों के लिए घर उपलब्ध कराने की भी मांग सरकार से की.

कुल मिलाकर, मराठा आरक्षण आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच चुका है. सरकार और आंदोलनकारियों के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है, जबकि अदालत ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि मुंबई की सामान्य स्थिति प्रभावित नहीं होनी चाहिए.

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