‘People’s Advocate’ बनकर कोर्ट पहुंचेंगी ममता? SIR विवाद पर आज सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई
पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन प्रक्रिया को लेकर ममता बनर्जी की याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी. टीएमसी का दावा है कि इससे 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम हटने का खतरा है. ममता खुद बहस कर सकती हैं.

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया के खिलाफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा दायर याचिका पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होने जा रही है. वहीं, इस सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी खुद कोर्ट में मौजूद रह सकती है और संभावना है कि वो खुद अपनी दलीले पेश कर सकती है. ममता बनर्जी खुद एलएलबी डिग्री धारक हैं.
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 28 जनवरी को निर्वाचन आयोग और पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट में तीन सदस्यीय पीठ इस मामले की सुनवाई करेगी, जिसकी अध्यक्षता मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत करेंगे.
टीएमसी ने जारी किया पोस्टर
टीएमसी ने सीएम ममता को लेकर एक पोस्ट भी जारी किया, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी फाइलों के साथ सुप्रीम कोर्ट की ओर बढ़ती दिखाई दे रही हैं. पोस्ट में लिखा है कि, "People's Advocate Vs Devil's Advocate."
People's Advocate Vs Devil's Advocate. pic.twitter.com/D9PUyjkeDY
— All India Trinamool Congress (@AITCofficial) February 3, 2026
क्या है पूरा मामला?
ममता बनर्जी और तृणमूल कांग्रेस (TMC) का आरोप है कि चुनाव आयोग द्वारा तैयार की गई 'लॉजिकल डिस्क्रिपेंसी' (तार्किक विसंगतियां) सूची में बड़ी गड़बड़ी है. पार्टी का आरोप है कि इस सूची के कारण पश्चिम बंगाल में लगभग 1.25 करोड़ मतदाताओं के नाम को वोटर लिस्ट से हटाया गयाहै.
ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग की इस प्रक्रिया को "अलोकतांत्रिक और दोषपूर्ण" बताते हुए दावा किया है कि इस तरह की सूची के कारण बड़े पैमाने पर लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे. पार्टी का दावा है कि चुनाव आयोग का ये कदम देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय है.
अदालत ने दिए थे ये निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 19 जनवरी को चुनाव आयोग को निर्देश दिया था कि मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी होनी चाहिए. इसके साथ ही अदालत ने कहा था कि आम लोगों को किसी भी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए. अदालत ने विसंगतियों वाली सूची को ग्राम पंचायत और ब्लॉक कार्यालयों में सार्वजनिक किया जाए, ताकी लोग अपनी जानकारी जांच सकें.
टीएमसी सांसद डेरेक ओ’ब्रायन ने भी चुनाव आयोग पर आरोप लगाया है कि वह औपचारिक लिखित निर्देश जारी करने के बजाय व्हाट्सएप जैसे अनौपचारिक माध्यमों से अधिकारियों को आदेश दे रहा है.


