बंगाल में ‘फूड पॉलिटिक्स’! चुनाव से पहले ममता ने चला ‘बांग्ला कार्ड’, अंडा-मछली को लेकर गरमाई राजनीति
पश्चिम बंगाल में चुनाव से पहले ममता बनर्जी ने ‘बांग्ला पहचान’ और खानपान को मुद्दा बनाते हुए भाजपा पर निशाना साधा है. मछली और मांसाहार को लेकर दिए बयान से राज्य की राजनीति गरमा गई है.

पश्चिम बंगाल की राजनीति एक बार फिर दिलचस्प मोड़ पर पहुंच गई है. चुनावी माहौल बनते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी पुरानी रणनीति को फिर से धार देना शुरू कर दिया है. इस बार भी वह ‘बांग्ला पहचान’ और स्थानीय संस्कृति के मुद्दों को जोर-शोर से उठा रही हैं, जिससे आम लोगों के साथ उनका जुड़ाव और मजबूत हो सके.
ममता बनर्जी लंबे समय से राज्य की राजनीति में एक मजबूत चेहरा रही हैं. 2021 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने ‘बांग्ला प्राइड’ को केंद्र में रखकर प्रचार किया था और बड़ी जीत हासिल की थी. अब एक बार फिर वह उसी रणनीति को दोहराती नजर आ रही हैं. उनकी सभाओं में स्थानीय भाषा, संस्कृति और लोगों की रोजमर्रा की समस्याओं को प्रमुखता दी जा रही है. यही वजह है कि उनका संदेश सीधे जनता तक पहुंचता है.
खानपान को लेकर दिया बयान
हाल ही में एक रैली के दौरान ममता बनर्जी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि अगर पार्टी सत्ता में आती है, तो लोगों के खानपान पर भी असर पड़ सकता है. उन्होंने यह तक कहा कि मछली, मांस और अंडा खाने पर पाबंदी लग सकती है. बंगाल में मछली खाना केवल एक आदत नहीं, बल्कि संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है.
ऐसे में इस मुद्दे को उठाकर ममता सीधे लोगों की भावनाओं से जुड़ने की कोशिश कर रही हैं. ममता ने भाजपा पर यह आरोप भी लगाया कि वह एकतरफा सोच रखती है और समाज में विभाजन पैदा करती है. उनके बयान पर भाजपा ने भी प्रतिक्रिया दी है, लेकिन यह साफ है कि ममता इस मुद्दे को चुनावी बहस का केंद्र बनाना चाहती हैं.
बांग्ला पहचान और राजनीति
ममता बनर्जी अक्सर बांग्ला भाषा और संस्कृति को सम्मान से जोड़ती रही हैं. वह यह दिखाने की कोशिश करती हैं कि बाहरी ताकतें राज्य की पहचान को प्रभावित कर सकती हैं. बांग्लादेशी घुसपैठ जैसे मुद्दों को भी वह इसी नजरिए से पेश करती हैं और इसे बंगालियों के सम्मान से जोड़ती हैं. इससे वह एक भावनात्मक जुड़ाव बनाने में सफल रहती हैं.
भाजपा की चुनौती
भाजपा ने भी इस बार बंगाल में अपनी रणनीति मजबूत करने की कोशिश की है. पार्टी ने कई स्थानीय नेताओं को आगे किया है, ताकि वह क्षेत्रीय मुद्दों पर बेहतर तरीके से बात कर सके. हालांकि, भाजपा की शीर्ष नेतृत्व में ज्यादातर नेता बंगाल से बाहर के हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर जुड़ाव बनाना चुनौती बन जाता है.
क्यों अहम है फूड कल्चर?
भारत में खानपान की परंपराएं अलग-अलग क्षेत्रों में भिन्न होती हैं. जहां उत्तर भारत के कई हिस्सों में कुछ समय मांसाहार से परहेज किया जाता है, वहीं बंगाल में ऐसा कोई सख्त नियम नहीं है. यहां मछली को शुभ अवसरों पर भी परोसा जाता है और यह दैनिक जीवन का हिस्सा है. ऐसे में खानपान को लेकर कोई भी बयान सीधे लोगों की भावनाओं को प्रभावित कर सकता है.


