10 साल की मन्नतों का बेटा... दूध में मिलाया नल का पानी और हो गई 5 महीने के मासूम की मौत! जानें पूरा मामला

सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में गंदे पानी के कारण 5 महीने के बच्चे की जान चली गई. दूध गाढ़ा होने पर मां ने उसे पचाने के लिए नगर निगम के नल का पानी मिलाया, जिसके कारण बच्चे की हालत खराब हुई.

इंदौर: देश के सबसे स्वच्छ शहर कहे जाने वाले इंदौर में दूषित पानी की वजह से बड़ा संकट पैदा हो गया है. भागीरथपुरा इलाके में नल के पानी में गंदगी मिलने से उल्टी-दस्त की बीमारी फैली, जिसने कई जानें ले लीं. सबसे दर्दनाक कहानी 5 महीने के मासूम अव्यान की है, जिसकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया. 

मासूम अव्यान की दुखद मौत

भागीरथपुरा के रहवासी सुनील साहू के घर 10 साल लंबी प्रार्थना के बाद बेटा अव्यान पैदा हुआ था. सिर्फ 5 महीने का यह बच्चा बाजार का दूध पीता था. दूध गाढ़ा होने पर मां ने उसे पचाने के लिए नगर निगम के नल का पानी मिलाया. लेकिन किसी को नहीं पता था कि यह पानी जहर बन चुका है. 

कुछ दिन पहले अव्यान को उल्टी और दस्त शुरू हुए. डॉक्टर की सलाह पर घर पर दवा दी गई, लेकिन हालत बिगड़ती गई. 29 दिसंबर को बच्चे ने दम तोड़ दिया. पिता सुनील का कहना है कि दूषित पानी ही मौत का कारण बना. यह घटना पूरे इलाके की त्रासदी को दर्शाती है. 

दूषित पानी से फैला संकट

जांच में पता चला कि पेयजल पाइपलाइन में लीकेज था. इसके ऊपर बने सार्वजनिक शौचालय का गंदा पानी लाइन में मिल गया. इससे भागीरथपुरा में पानी जहरीला हो गया. पिछले एक हफ्ते में 1100 से ज्यादा लोग बीमार पड़े. इनमें से 150 के करीब को अस्पताल में भर्ती करना पड़ा. 

मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने 7 मौतों की पुष्टि की है, जबकि स्थानीय लोग 9 से 13 तक का दावा कर रहे हैं. मृतकों में ज्यादातर महिलाएं और बच्चे शामिल है. मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अस्पतालों का दौरा किया और मृतकों के परिवारों को 2 लाख रुपये की मदद का ऐलान किया. 

प्रशासन की कार्रवाई 

सरकार ने लापरवाही के लिए कुछ अधिकारियों को निलंबित किया और एक की सेवा समाप्त की. हाईकोर्ट ने भी मामले की गंभीरता देखते हुए 2 जनवरी तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है. सभी मरीजों का मुफ्त इलाज कराने के आदेश दिए गए हैं. इलाके में टैंकर से साफ पानी सप्लाई शुरू हो गई है और मेडिकल टीमें घर-घर सर्वे कर रही हैं.

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