जम्मू-कश्मीर: BJP की इस विधायक ने विधानसभा में की बजट की आलोचना, फिर भी विपक्ष ने की प्रशंसा

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में भाजपा विधायक देवयानी राणा ने अपने पहले भाषण में राज्य बजट की कड़ी आलोचना की. उन्होंने आपदा प्रबंधन और शिक्षा में बजट कटौती पर सवाल उठाए. आलोचना के बावजूद उनके भाषण को दोनों पक्षों से सराहना मिली.

Shraddha Mishra

श्रीनगर: जम्मू-कश्मीर विधानसभा में उस समय एक अलग ही माहौल देखने को मिला, जब भाजपा विधायक देवयानी राणा ने अपना पहला भाषण दिया. यह उनका बतौर विधायक पहला संबोधन था, लेकिन आत्मविश्वास और तथ्यों के साथ रखी गई बातों ने पूरे सदन का ध्यान खींच लिया. खास बात यह रही कि उन्होंने मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला द्वारा पेश किए गए बजट की आलोचना की, फिर भी सत्ता पक्ष के सदस्य उनके भाषण के अंत में मेजें थपथपाते नजर आए.

देवयानी राणा ने हाल ही में हुए उपचुनाव में नागरोटा सीट से जीत दर्ज की थी. यह सीट उनके पिता दविंदर सिंह राणा के निधन के बाद खाली हुई थी. दविंदर सिंह राणा लंबे समय तक कांग्रेस से जुड़े रहे और उमर अब्दुल्ला के करीबी माने जाते थे. बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए थे. अक्टूबर 2024 में उनके निधन के बाद यह सीट खाली हुई और देवयानी ने चुनाव जीतकर विधानसभा में प्रवेश किया. 

बजट पर उठाए सख्त सवाल

शुक्रवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने विधानसभा में 1.13 लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया था. इसके अगले दिन देवयानी राणा ने करीब 12 मिनट तक अपना भाषण दिया. उन्होंने आंकड़ों के साथ सरकार से कई सवाल पूछे. देवयानी ने प्रमुख क्षेत्रों में कम किए गए आवंटन की कड़ी आलोचना की.

उन्होंने खास तौर पर आपदा प्रबंधन और राहत के बजट में कटौती पर चिंता जताई. उनके अनुसार, इस मद में आवंटन को 719 करोड़ रुपये से घटाकर लगभग 350 करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो पिछले साल के मुकाबले काफी कम है. उन्होंने कहा कि जम्मू क्षेत्र में हाल के वर्षों में बाढ़, भूस्खलन और बादल फटने जैसी घटनाओं से भारी नुकसान हुआ है, ऐसे समय में बजट घटाना समझ से परे है.

शिक्षा और कल्याण योजनाओं पर भी सवाल

देवयानी राणा ने शिक्षा क्षेत्र में कम किए गए बजट पर भी सरकार को घेरा. उन्होंने कहा कि यदि शिक्षा पर खर्च घटाया जाएगा तो स्कूलों के संचालन पर असर पड़ेगा और गरीब बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी. इसके अलावा, उन्होंने कल्याणकारी योजनाओं की कमियों का भी जिक्र किया. उदाहरण के तौर पर, विकलांग व्यक्तियों के लिए मुफ्त बस सेवा की योजना में ऐसी बसों की कमी बताई, जो उनके लिए सुविधाजनक हों.

आलोचना के बावजूद मिली सराहना

भले ही देवयानी राणा ने सरकार की नीतियों की खुलकर आलोचना की, लेकिन उनके संतुलित और तथ्यों पर आधारित भाषण को सदन के दोनों पक्षों से सराहना मिली. सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी उनके भाषण के अंत में मेज थपथपाकर उनका स्वागत किया. उनका यह पहला भाषण एक युवा विधायक की मजबूत शुरुआत माना जा रहा है.

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