दिल्ली शराब घोटाले में केजरीवाल और सिसोदिया को राहत नहीं, हाईकोर्ट ने सुनवाई टाली
दिल्ली शराब नीति घोटाले में केजरीवाल और सिसोदिया को राहत नहीं मिली है. हाई कोर्ट ने ED आरोप पत्र पर सुनवाई करते हुए 30 जुलाई तक टाल दी है.

दिल्ली शराब नीति घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को दिल्ली हाई कोर्ट से फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है. दोनों नेताओं ने प्रवर्तन निदेशालय (ED) की तरफ से दाखिल आरोपपत्र पर निचली अदालत द्वारा संज्ञान लेने के आदेश को चुनौती दी थी. लेकिन अदालत ने इस मामले में सुनवाई को 3 महीने के लिए स्थगित करते हुए अगली तारीख 30 जुलाई तय की है.
जस्टिस रविंद्र डुडेजा की पीठ ने मामले की संक्षिप्त सुनवाई के बाद कहा कि अगली सुनवाई अब जुलाई के अंत में होगी. इस दौरान दोनों पक्षों की ओर से बहस हुई, जिसमें ईडी की ओर से सत्र अदालत के आदेश को गलत करार दिया गया, जबकि बचाव पक्ष ने कोर्ट के आदेश को सही ठहराया.
ASG ने क्या कहा?
प्रवर्तन निदेशालय की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) एसवी राजू ने कोर्ट से कहा कि हम ये नहीं कह रहे कि जमानत रद्द कर दी जाए, लेकिन हम सत्र अदालत के निष्कर्षों को चुनौती दे रहे हैं. इसे एक मिसाल नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने आगे कहा कि उनका उद्देश्य ये बताना है कि निचली अदालत का आदेश कानून के हिसाब से त्रुटिपूर्ण है और इसे रद्द किया जाना चाहिए.
बचाव पक्ष ने किया विरोध
बचाव पक्ष के वकील विक्रम चौधरी ने इस याचिका का विरोध करते हुए कहा कि ये एक असामान्य प्रार्थना है, जिससे न्यायालय का समय बर्बाद हो रहा है. उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को दी गई जमानत पूरी तरह वैध है और सत्र अदालत का फैसला न्यायोचित था.
SC में लंबित है बड़ा फैसला
ईडी के विशेष वकील जोहेब हुसैन ने कोर्ट को बताया कि ये मामला सर्वोच्च न्यायालय की बड़ी पीठ के पास लंबित है. एएसजी ने भी कहा कि चूंकि ये अंतरिम जमानत है, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच अगर आदेश वापस लेती है, तो इस पर मेरिट के आधार पर सुनवाई होगी. इस पर कोर्ट ने पूछा कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई कब होगी, जिस पर अधिवक्ता चौधरी ने बताया कि अभी बेंच का गठन नहीं हुआ है.
केजरीवाल ने अनुमति ना लेने की दी दलील
अरविंद केजरीवाल की ओर से दलील दी गई कि जब विशेष अदालत ने आरोप पत्र पर संज्ञान लिया, उस समय वो लोक सेवक थे और उनके खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अनिवार्य अनुमति नहीं ली गई थी. केजरीवाल ने अपनी याचिका में कहा कि ये प्रक्रिया दोषपूर्ण है और सभी कार्यवाहियों को रद्द किया जाना चाहिए. मनीष सिसोदिया ने भी इसी आधार पर अपनी याचिका दायर की थी.


