चश्मदीद पर दबाव, लापरवाही और रेस्क्यू में चूक... नोएडा इंजीनियर मौत मामला में चौंकाने वाले खुलासे
नोएडा में 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की नाले में डूबकर मौत ने बचाव व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. पुलिस पर दबाव के आरोप लगे हैं, बिल्डरों पर केस दर्ज हुआ और SIT जांच शुरू की गई है.

नोएडा: 27 वर्षीय सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने प्रशासन, पुलिस और बचाव व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. शुक्रवार देर रात जब युवराज काम से नोएडा अपने घर लौट रहे थे, तब उनकी सामान्य दिनचर्या अचानक एक भयावह हादसे में बदल गई. उनकी कार पानी से भरे एक गहरे गड्ढे में गिर गई और कई घंटों तक चले असफल बचाव प्रयासों के बाद उनकी जान चली गई.
युवराज मेहता 16 जनवरी की रात गुरुग्राम स्थित अपने कार्यालय से नोएडा के सेक्टर-150 स्थित टाटा यूरेका पार्क में अपने घर लौट रहे थे, जहां वे अपने पिता के साथ रहते थे. रात में घना कोहरा था और दृश्यता बेहद कम थी. जैसे ही वे सेक्टर-150 के चौराहे पर पहुंचे, उनकी कार का संतुलन बिगड़ गया और वह नाले की टूटी हुई चारदीवारी को पार कर सीधे पानी से भरे गड्ढे में जा गिरी.
मदद की गुहार और लंबा इंतजार
जानकारी के अनुसार, दुर्घटना के बाद युवराज किसी तरह अपनी कार की छत पर चढ़ने में सफल रहे. आधी रात के आसपास उन्होंने अपने पिता को फोन कर मदद मांगी. उनके पिता ने बताया कि युवराज घबराए हुए थे और बार-बार कह रहे थे कि कार पानी में फंसी हुई है.
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, युवराज डेढ़ घंटे से अधिक समय तक मदद के लिए आवाज लगाते रहे. पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन सही संसाधनों और तेज कार्रवाई के अभाव में उन्हें बचाया नहीं जा सका. धीरे-धीरे पानी का स्तर बढ़ता गया और आखिरकार कार पूरी तरह डूब गई.
बचाव में चूक के आरोप
बचाव कार्य में शामिल पुलिसकर्मियों ने बताया कि फेंकी गई रस्सियां छोटी पड़ गईं, सीढ़ियां और क्रेन गड्ढे तक नहीं पहुंच पाईं और कोहरे के कारण राहत टीमों को देर हो गई. युवराज करीब 90 मिनट तक कार की छत पर फंसे रहे. एक डिलीवरी एजेंट मोहिंदर, जो रात करीब 1:45 बजे मौके पर पहुंचा, ने हालात देखकर खुद पानी में उतरने का फैसला किया. उसने बताया कि अगर दस मिनट पहले मदद पहुंच जाती, तो युवराज की जान बच सकती थी.
चश्मदीद पर दबाव का आरोप
इस मामले में एक और चौंकाने वाला खुलासा तब हुआ जब डिलीवरी एजेंट मोहिंदर ने आरोप लगाया कि पुलिस ने उसे एक तय बयान देने के लिए मजबूर किया. उसके अनुसार, पुलिस ने उसे मीडिया से बात न करने को कहा और एक “स्क्रिप्ट” दी, जिसमें पुलिस की भूमिका को सकारात्मक दिखाने के निर्देश थे. मोहिंदर ने साफ कहा कि वह दबाव में था, लेकिन अंततः उसने सच्चाई सामने लाने का फैसला किया.
प्रशासन और कंपनियों पर कार्रवाई
युवराज के पिता की शिकायत के आधार पर दो निर्माण कंपनियों- लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड और एमजेड विज़टाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है. इन पर लापरवाही और गैर-इरादतन हत्या से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए हैं. आरोप है कि नाले के पास न तो बैरिकेडिंग थी और न ही चेतावनी संकेत, जबकि स्थानीय लोग पहले ही इसकी शिकायत कर चुके थे.
दोनों कंपनियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या), 106 (लापरवाही के कारण मृत्यु) और 125 (जीवन को खतरे में डालना) के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया गया है.
पोस्टमार्टम और जांच
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में पुष्टि हुई है कि युवराज की मौत डूबने से दम घुटने के कारण हुई, जिसके बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा. पुलिस ने आगे की जांच के लिए नमूने सुरक्षित रखे हैं. मामले की जांच के लिए एक तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया है.


