Indian Army ने चीन के साथ बातचीत के लिए एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिसका नाम है... 

भारतीय सेना ने चीन के साथ बातचीत के लिए एक खास तकनीक का इस्तेमाल किया है, जिसका नाम " Hotline Communication System"है. यह फोन सीमावर्ती क्षेत्रों में त्वरित और प्रभावी संवाद के लिए तैयार किया गया है. इस सिस्टम की खासियत यह है कि इसकी सीधी और सुरक्षित कनेक्टिविटी, जो दोनों देशों के बीच विश्वास बढ़ाने और विवाद सुलझाने में मददगार साबिद हो सकती है. 

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

नई दिल्ली: भारतीय सेना ने अक्टूबर में चीन के साथ बातचीत के दौरान सुरक्षित संचार के लिए “संभव” स्मार्टफोन का इस्तेमाल किया था. सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने भी अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी पुष्टि की. अधिकारियों को करीब 30,000 'संभव' फोन दिए गए हैं. इन फोन में पहले से ही महत्वपूर्ण अधिकारियों के नंबर हैंडसेट के अंदर स्टोर हैं. ये अलग-अलग और खास ऐप से लैस हैं. इन स्मार्टफोन में फोटो, वीडियो या दस्तावेज भेजने के लिए एक खास ऐप है जो पूरी तरह से सुरक्षित है और डेटा लीक होने की बिल्कुल भी संभावना नहीं है. 'संभव' स्मार्टफोन परियोजना पिछले साल ही शुरू की गई थी.

संभव क्या है?

इन स्मार्टफोन को लीक-प्रूफ और सुरक्षित संचार उपकरण के रूप में विकसित किया गया है. संभव का मतलब है सिक्योर आर्मी मोबाइल भारत वर्जन। इस फोन में M-Sigma ऐप है, जो WhatsApp की तरह काम करता है.

संवेदनशील डेटा के लीक होने पर रोक लगेगी

इससे महत्वपूर्ण दस्तावेज, फोटो और वीडियो साझा किए जा सकेंगे। इस परियोजना की शुरुआत पिछले साल हुई थी. ये फोन एयरटेल और जियो नेटवर्क पर काम करते हैं. सेना को उम्मीद है कि इससे महत्वपूर्ण दस्तावेजों और अन्य संवेदनशील डेटा के लीक होने पर रोक लगेगी.

30,000 'संभव' फोन उपलब्ध कराए गए

सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने अपनी वार्षिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुष्टि की कि इन फोन का इस्तेमाल अक्टूबर में चीन के साथ सीमा वार्ता में किया गया था. उन्होंने बताया कि 'संभव' फोन का इस्तेमाल सुरक्षित संचार के लिए किया गया था. समाचार एजेंसी एएनआई ने रक्षा सूत्रों के हवाले से बताया कि सुरक्षित संचार के लिए अधिकारियों को लगभग 30,000 'संभव' फोन उपलब्ध कराए गए हैं.

सूचना लीक होने का कोई खतरा नहीं

पहले, कई सैन्य अधिकारी सूचना और दस्तावेज़ साझा करने के लिए व्हाट्सएप और इसी तरह के ऐप का इस्तेमाल करते थे. हालांकि, इससे अक्सर सूचना लीक हो जाती थी. 'संभव' फोन में पहले से ही सभी महत्वपूर्ण अधिकारियों के नंबर संग्रहीत हैं. इसलिए, अधिकारियों को नंबर सहेजने की ज़रूरत नहीं है.

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