बिना पासवर्ड-फिंगरप्रिंट के लॉग इन? दिल की धड़कन और सांस से पहचान लेगा हेडसेट, जानें क्या है VitalID तकनीक?
अगर आप भी ऐप्स और वेबसाइट्स में बार-बार लॉग इन करने के लिए पासवर्ड और फिंगरप्रिंट का इस्तेमाल करते हैं, तो ये नई तकनीक आपके लिए बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है.

नई दिल्ली: आजकल ऐप्स और वेबसाइट्स में लॉग इन करना रोजमर्रा की जरूरत बन गया है, लेकिन अलग-अलग पासवर्ड याद रखना या बार-बार फिंगरप्रिंट-फेस आईडी इस्तेमाल करना थकान भरा हो सकता है. अब वैज्ञानिकों ने एक अनोखा समाधान निकाला है. और वो है VitalID. यह तकनीक आपके शरीर की प्राकृतिक हलचलों यानी दिल की धड़कन और सांस लेने से उत्पन्न कंपनों का इस्तेमाल करके लॉग इन कराती है.
पूरी तरह बदलेगा लॉग इन का तरीका
पासवर्ड टाइप करने, चेहरा स्कैन करने या फिंगरप्रिंट देने की बजाय VitalID आपको बिना किसी अतिरिक्त कोशिश के पहचान लेगा. यह खासतौर पर एक्सटेंडेड रियलिटी (XR) यानी वर्चुअल और ऑगमेंटेड रियलिटी हेडसेट्स के लिए बनाई गई है. रटगर्स यूनिवर्सिटी, न्यू जर्सी इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, टेम्पल यूनिवर्सिटी और टेक्सास A&M यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने मिलकर इस पर काम किया है.
सांस और दिल की धड़कन से कैसे काम करती है VitalID?
जब हम सांस लेते हैं या दिल धड़कता है, तो इससे गर्दन और खोपड़ी तक बहुत छोटी-छोटी कंपनें पैदा होती है. हर इंसान की हड्डियों की बनावट, चेहरे के ऊतक और खोपड़ी का आकार थोड़ा अलग होता है, इसलिए ये कंपनें भी पूरी तरह अनोखी होती है. हेडसेट में पहले से लगे मोशन सेंसर्स इन कंपनों को पकड़ लेते हैं और यूजर की पहचान कर लेते हैं.
इसके लिए कोई नया हार्डवेयर लगाने की जरूरत नहीं. सिर्फ सॉफ्टवेयर अपडेट काफी है. रटगर्स यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर यिंगयिंग चेन कहती हैं कि अगर XR डिवाइस हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन रहे हैं, तो लॉग इन भी आसान, लगातार और सुरक्षित होना चाहिए.
टेस्टिंग में कितना सफल रहा सिस्टम?
शोधकर्ताओं ने 10 महीनों तक 52 लोगों पर दो लोकप्रिय XR हेडसेट्स का इस्तेमाल करके टेस्टिंग की. नतीजे काफी encouraging रहे, सही यूजर को 95 प्रतिशत से ज्यादा मौकों पर सही पहचाना गया. वहीं, अनधिकृत व्यक्ति को 98 प्रतिशत से ज्यादा मामलों में ब्लॉक कर दिया गया.
टीम ने एक खास फिल्टरिंग सिस्टम भी बनाया है, जो सिर हिलाने या चलने-फिरने जैसी बड़ी हलचलों को अलग कर देता है. सिर्फ सांस और दिल की छोटी कंपनों पर ही ध्यान केंद्रित रहता है. किसी की सांस की नकल करना संभव हो सकता है, लेकिन खोपड़ी से गुजरने वाली कंपनों की ठीक-ठीक नकल करना बेहद मुश्किल है. इससे धोखाधड़ी का खतरा बहुत कम हो जाता है.
भविष्य में कितना उपयोगी होगा VitalID?
XR हेडसेट्स में अब बैंकिंग, निजी जानकारी या संवेदनशील डेटा तक पहुंच आसान हो रही है. ऐसे में हाथ से टाइप करना या 2-फैक्टर ऑथेंटिकेशन मुश्किल पड़ सकता है. VitalID बैकग्राउंड में चुपचाप काम करता है, बिना यूजर को कोई इनपुट देने की जरूरत के.
यह तकनीक अभी बाजार में उपलब्ध नहीं है, लेकिन लाइसेंसिंग के लिए तैयार है और इसका प्रोविजनल पेटेंट भी फाइल हो चुका है. 2025 में ACM कॉन्फ्रेंस ऑन कंप्यूटर एंड कम्युनिकेशंस सिक्योरिटी में इसे पेश किया गया था.


