बचपन से बुजुर्ग तक तबाही: मोबाइल की लत बन रही मानसिक और शारीरिक बीमारी की जड़

प्रसिद्ध भविष्यवक्ता बाबा वेंगा ने सालों पहले छोटे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के मानसिक और सामाजिक खतरों की चेतावनी दी थी. आज उनकी भविष्यवाणी सच साबित हो रही है. मोबाइल की लत से बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी प्रभावित हैं, जिससे नींद, ध्यान, रिश्ते और मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ रहा है.

Dimple Yadav
Edited By: Dimple Yadav

दुनिया की जानी-मानी भविष्यवक्ता बाबा वेंगा ने सालों पहले चेतावनी दी थी कि भविष्य में इंसान छोटे-छोटे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस पर बहुत ज्यादा निर्भर हो जाएगा. उन्होंने कहा था कि ये डिवाइस इंसानों की मानसिक सेहत, रिश्तों और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को नुकसान पहुंचाएंगे.

आज के समय में यह बात बिल्कुल सच साबित हो रही है. मोबाइल फोन जैसे उपकरण भले ही जिंदगी को आसान बना रहे हों, लेकिन ये धीरे-धीरे हमारे जीवन के लिए 'साइलेंट किलर' बनते जा रहे हैं.

बाबा वेंगा ने क्या कहा था?

अब यह सब हकीकत में हो रहा है. मोबाइल के ज्यादा इस्तेमाल से लोगों की मानसिक और शारीरिक सेहत पर बुरा असर पड़ रहा है.

मोबाइल की लत के बुरे असर

1. बच्चों से लेकर बड़ों तक सब प्रभावित

  • NCPCR की रिपोर्ट के अनुसार 24% बच्चे रात को सोने से पहले मोबाइल चलाते हैं.
  • इससे नींद की कमी, पढ़ाई में ध्यान न लगना, और मानसिक तनाव जैसे लक्षण दिखने लगे हैं.
  • बड़ों में भी मोबाइल की लत ने तनाव, अकेलापन और रिश्तों की दूरी बढ़ा दी है.

2. मानसिक बीमारियों का खतरा

  • नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन के अनुसार मोबाइल का ज्यादा उपयोग चिंता, डिप्रेशन और अकेलेपन का कारण बनता है.
  • सोशल मीडिया पर समय बिताना, बार-बार नोटिफिकेशन चेक करना और दूसरों से तुलना करना इसकी वजहें हैं.

3. शारीरिक समस्याएं

  • डिजिटल आई स्ट्रेन: आंखों में सूखापन, जलन, धुंधलापन.
  • पोस्चर की परेशानी: गर्दन और पीठ में दर्द (‘टेक्स्ट नेक’)
  • नींद में रुकावट: मोबाइल की नीली रोशनी मेलाटोनिन हॉर्मोन को प्रभावित करती है जिससे नींद नहीं आती.

मोबाइल की लत से कैसे बचें?

  • डिजिटल डिटॉक्स करें यानी हर दिन कुछ घंटों के लिए मोबाइल से दूरी बनाएं.
  • स्क्रीन टाइम ट्रैकिंग ऐप्स का इस्तेमाल करें.
  • सोते वक्त और खाने के समय मोबाइल का उपयोग बिल्कुल न करें.
  • परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताएं.
  • बच्चों को बाहर खेलने के लिए प्रेरित करें.
  • नोटिफिकेशन बंद करें और मोबाइल बार-बार चेक करने की आदत को कम करें.

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