सहारा की 88 प्रॉपर्टीज पर अडानी की नजर, कैसे होगी डील, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला... जानें पूरा मामला

Adani Sahara Property Acquisition: सहारा ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर देश की 88 आलीशान संपत्तियां, जैसे मुंबई का अंबी वैली और लखनऊ का 'सहारा शहर', अडानी ग्रुप को 1 लाख करोड़ से ज्यादा में बेचने की इजाजत मांगी है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

Adani Sahara Property Acquisition: सहारा ग्रुप ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर देश की 88 प्रमुख संपत्तियों को अडानी ग्रुप को बेचने की अनुमति मांगी है. इन संपत्तियों में मुंबई के अंबी वैली और लखनऊ के 'सहारा शहर' जैसे बड़े प्रोजेक्ट शामिल हैं. इस प्रॉपर्टी डील की अनुमानित कीमत 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक बताई जा रही है, जो भारत के सबसे बड़े रियल एस्टेट सौदों में से एक होगा. मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और मार्केट रेगुलेटर सेबी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में शीघ्र फैसला लेने की संभावना जताई है. यदि कोर्ट से मंजूरी मिलती है तो सहारा ग्रुप को भारी राशि प्राप्त होगी, जिससे समूह के बकाये का भुगतान किया जा सकेगा. अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी, जिसमें अदालत अडानी ग्रुप को संपत्तियों की बिक्री की मंजूरी देने या न देने का फैसला करेगी.

टर्म शीट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी गई

सहारा ग्रुप की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय पीठ को बताया कि सहारा और अडानी समूह ने एक टर्म शीट पर हस्ताक्षर कर उसे सीलबंद लिफाफे में सुप्रीम कोर्ट को सौंप दिया है. उन्होंने कहा कि अदालत से मंजूरी मिलते ही सौदा आगे बढ़ेगा.  सहारा की इस पहल का समर्थन करते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि अडानी ग्रुप सहारा की इन संपत्तियों को एक बार में खरीद लेगा. उन्होंने यह भी बताया कि टर्म शीट सुप्रीम कोर्ट में सीलबंद लिफाफे के रूप में जमा की गई है और वर्तमान में अडानी की ओर से अभी ऑफर राशि स्पष्ट नहीं हो पाई है.

निवेशकों को पैसे लौटाने की प्रक्रिया

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता शेखर नफड़े को न्यायमित्र (Amicus curiae) नियुक्त किया है. उन्हें सहारा ग्रुप की 88 संपत्तियों की विवाद मुक्त और विवादित संपत्तियों की अलग-अलग लिस्ट तैयार करनी होगी ताकि कोई कानूनी दावेदार या तीसरे पक्ष का दावा सामने आ सके.

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने न्यायालय को सूचित किया कि सरकार ने सेबी-सहारा खाते से निवेशकों को राशि वापस लौटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. शेखर नफड़े ने बताया कि सहारा की दो कंपनियों सहारा हाउसिंग और सहारा रियल एस्टेट को 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया था कि वे सेबी-सहारा खाते में करीब 25,000 करोड़ रुपये जमा करें, लेकिन अब तक इन कंपनियों ने 9,481 करोड़ रुपये जमा नहीं किए हैं.

अगली सुनवाई 

इस प्रकरण की अगली सुनवाई 17 नवंबर को होगी, जहां सुप्रीम कोर्ट इस प्रस्तावित सौदे पर फैसला लेगी कि क्या अडानी ग्रुप को सहारा ग्रुप की 88 संपत्तियों की खरीद की अनुमति दी जाए या नहीं. 

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