पेंशन में 100% विदेशी निवेश का रास्ता साफ! रिटायरमेंट फंड पर सरकार का सबसे बड़ा दांव, जल्द आएगा नया कानून

रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े क्षेत्र में सरकार एक अहम बदलाव करने जा रही है. एक नया बिल बनने जा रहा है, जो कि मानसून सत्र या शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: केंद्र सरकार रिटायरमेंट और पेंशन से जुड़े क्षेत्र में बड़ा बदलाव करने जा रही है. पेंशन फंड में विदेशी निवेश (FDI) की सीमा को मौजूदा 49 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक करने का प्रस्ताव है. इस संबंध में एक नया बिल मानसून सत्र या शीतकालीन सत्र में संसद में पेश किया जा सकता है.

बीमा क्षेत्र की तरह खुलेगा पेंशन का रास्ता

यह कदम बीमा क्षेत्र के हालिया सुधार से मिलता-जुलता है. पिछले साल संसद ने बीमा क्षेत्र में FDI की सीमा 74 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने का बिल पास किया था. इससे पहले 2015 में भी बीमा अधिनियम में बदलाव कर FDI को 49 से 74 प्रतिशत किया गया था. अब सरकार पेंशन क्षेत्र को भी विदेशी पूंजी के लिए और आकर्षक बनाना चाहती है. इससे पेंशन फंड में ज्यादा निवेश आएगा और रिटायरमेंट प्लान मजबूत होंगे.

NPS ट्रस्ट को PFRDA से अलग करने का प्रावधान

सूत्रों के मुताबिक, पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) अधिनियम, 2013 में संशोधन का बिल लाया जाएगा. इसमें सिर्फ FDI सीमा बढ़ाने का प्रावधान ही नहीं, बल्कि नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) ट्रस्ट को PFRDA से अलग करने का भी प्रस्ताव है. वर्तमान में NPS ट्रस्ट के अधिकार, कार्य और जिम्मेदारियां PFRDA के नियमों के तहत हैं. 

नए बदलाव के बाद इसे किसी चैरिटेबल ट्रस्ट या कंपनी अधिनियम के दायरे में लाया जा सकता है. NPS ट्रस्ट का प्रबंधन 15 सदस्यों वाले एक स्वतंत्र बोर्ड करेगा, जिसमें ज्यादातर सदस्य सरकार या राज्यों से जुड़े हो सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार और राज्य ही इस फंड में सबसे बड़ा योगदान देते हैं.

NPS की शुरुआत और उद्देश्य

राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) की शुरुआत पुरानी परिभाषित लाभ पेंशन योजना की जगह की गई थी. 1 जनवरी 2004 से केंद्र सरकार के नए कर्मचारियों के लिए NPS अनिवार्य कर दिया गया था. 1 मई 2009 से इसे सभी नागरिकों के लिए स्वैच्छिक रूप से खोल दिया गया. 

सरकार ने बढ़ते पेंशन खर्च को नियंत्रित करने और संसाधनों को विकास कार्यों में लगाने के लिए यह बदलाव किया था. NPS एक परिभाषित योगदान योजना है, जिसमें कर्मचारी और नियोक्ता दोनों योगदान देते हैं. PFRDA इसका नियमन करता है और सदस्यों के हितों की रक्षा सुनिश्चित करता है.

क्या-क्या होगा फायदा?

FDI सीमा बढ़ने से पेंशन सेक्टर में विदेशी कंपनियां ज्यादा निवेश कर सकेंगी. इससे फंड का आकार बढ़ेगा, बेहतर मैनेजमेंट आएगा और आम लोगों को मजबूत रिटायरमेंट प्लान मिल सकेंगे. हालांकि, निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिए सख्त नियम भी बनाए जाएंगे. 

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