Indian Economy: वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पर फिर विदेशी मुहर, वर्ल्ड बैंक के बाद डेलॉयट ने जताया भरोसा
दुनिया की बड़ी-बड़ी एजेंसियां एक बार फिर भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का लोहा मान रही हैं. तमाम वैश्विक चुनौतियों के बीच भी भारत की विकास दर को लेकर भरोसा और मजबूत होता दिख रहा है.

नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था एक बार फिर दुनिया की बड़ी एजेंसियों के लिए चर्चा का विषय बन गई है. वैश्विक आर्थिक अस्थिरता, ट्रेड टेंशन और डॉलर की मजबूती के बावजूद भारत अपनी विकास दर को मजबूती से बनाए हुए है. यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं लगातार भारत की आर्थिक क्षमता पर भरोसा जता रही हैं.
एक ही दिन में भारत को दो बड़ी वैश्विक एजेंसियों से बड़ी राहत मिली है. पहले वर्ल्ड बैंक ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को बढ़ाया और इसके कुछ ही देर बाद डेलॉयट ने भी साफ कहा कि तमाम चुनौतियों के बावजूद Indian Economy की रफ्तार थमने वाली नहीं है.
FY26 में 7.8% तक पहुंच सकती है भारत की ग्रोथ
डेलॉयट की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में भारत की आर्थिक विकास दर 7.5% से 7.8% के बीच रह सकती है. एजेंसी ने कहा कि मजबूत घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर में तेजी के चलते भारत की आर्थिक गति बनी रहेगी.
डेलॉयट इंडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्लोबल ट्रेड टेंशन, ट्रंप टैरिफ के चलते व्यापार में रुकावट, विकसित देशों की नीतियों में बदलाव और अस्थिर कैश फ्लो जैसी समस्याओं के बावजूद भारत FY26 की पहली छमाही में करीब 8% की नॉमिनल जीडीपी ग्रोथ के साथ बेहतर प्रदर्शन कर रहा है.
विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद भारत मजबूत
डेलॉयट ने यह भी माना कि भारत को हाल के समय में रिकॉर्ड विदेशी निवेशकों की बिकवाली और रुपये में कमजोरी जैसी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ा है. इसके बावजूद घरेलू सुधारों और त्योहारी सीजन की मजबूत मांग ने आर्थिक माहौल को सकारात्मक बनाए रखा है.
रिपोर्ट के मुताबिक घरेलू बाजार की ताकत और उपभोक्ता खर्च में तेजी भारत की अर्थव्यवस्था को बाहरी झटकों से बचा रही है.
फ्री ट्रेड डील से भारत को मिला निर्यात का सहारा
डेलॉयट ने कहा कि भारत ने अपनी निर्यात रणनीति को मजबूत करने के लिए कई नए Free Trade Deals किए हैं. भारत ने ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ व्यापार समझौते किए हैं, जबकि इजराइल के साथ ट्रेड और इन्वेस्टमेंट को लेकर बातचीत चल रही है.
एजेंसी ने चेताया कि वैश्विक जोखिम अभी भी बने हुए हैं. हालांकि FY26 में इसका पूरा असर नहीं दिखेगा, लेकिन FY2026-27 में वैश्विक अनिश्चितताओं के कारण ग्रोथ रेट घटकर 6.6% से 6.9% के बीच रह सकती है.
वर्ल्ड बैंक ने भी बढ़ाया भारत का ग्रोथ अनुमान
डेलॉयट से पहले वर्ल्ड बैंक ने भी भारत को लेकर बड़ी खुशखबरी दी थी. वर्ल्ड बैंक ने भारत के GDP Growth Forecast को बढ़ाकर 7.2% कर दिया है. इससे पहले जून 2025 में यह अनुमान 6.3% था, यानी इसमें 0.9% की बढ़ोतरी हुई है.
वर्ल्ड बैंक ने कहा है कि अमेरिकी टैरिफ में बढ़ोतरी के बावजूद भारत की तेज आर्थिक रफ्तार पर इसका असर बेहद सीमित रहेगा.
अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भारत सुरक्षित
विश्व बैंक की रिपोर्ट में कहा गया कि मजबूत घरेलू मांग और उपभोग के बेहतर रुझानों के चलते भारत अमेरिकी टैरिफ बढ़ोतरी से काफी हद तक सुरक्षित रहेगा. सरकार की ओर से की गई टैक्स कटौती और ग्रामीण आय में बढ़ोतरी ने घरेलू खपत को मजबूती दी है.
इसी वजह से भारत का आर्थिक आउटलुक फिलहाल अन्य बड़ी अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में कहीं ज्यादा बेहतर नजर आ रहा है.


