SECI टेंडर में बड़ा धमाका! ED की रेड में रिलायंस पावर की ‘फर्जी बैंक गारंटी’ का खेल बेनकाब, एक के बाद एक बड़े-बड़े खुलासे
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने रिलायंस पावर लिमिटेड और उसकी सहायक कंपनियों के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. एजेंसी ने सोलर एनर्जी कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (SECI) के एक बड़े टेंडर को हासिल करने के लिए कथित तौर पर जमा की गई फर्जी बैंक गारंटी के मामले में पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है. यह खुलासा कंपनी के अधिकारियों की साजिश को उजागर करता है, जिससे मामला और गहरा गया है. जांच में सामने आई अनियमितताओं ने पूरे एनर्जी सेक्टर में हलचल मचा दी है. ED के अनुसार, रिलायंस ग्रुप ने जानबूझकर शेल कंपनियों के जरिए नकली दस्तावेज तैयार कराए और विदेशी बैंकों के नाम पर फर्जीवाड़ा किया.

नई दिल्ली: ईडी (Enforcement Directorate) ने M/s Reliance Power Limited और उसकी सहायक कंपनी Reliance NU BESS Ltd के खिलाफ एक पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है. यह कार्रवाई SECI को जमा की गई कथित फर्जी बैंक गारंटी से संबंधित है. बैंक गारंटी SECI के 1000 MW / 2000 MWh स्टैंडअलोन BESS प्रोजेक्ट के टेंडर को हासिल करने के लिए जमा की गई थी. ED की जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिसमें शेल कंपनियों और फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से करोड़ों रुपये की हेराफेरी की पुष्टि हुई है.
जांच में सामने आया कि Reliance Power ने जानबूझकर शेल कंपनी M/s Biswal Tradelink Pvt Ltd की मदद से फर्जी बैंक गारंटी तैयार कराई. इस फर्जी गारंटी को असली दिखाने के लिए SBI के नाम का नकली ईमेल, फर्जी एंडोर्समेंट लेटर और नकली डोमेन का इस्तेमाल किया गया. ED ने मामले में Reliance Power के CFO अशोक कुमार पाल सहित कई अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है और न्यायिक हिरासत में भेजा गया है.
मामला क्या है?
SECI ने 1000 MW / 2000 MWh स्टैंडअलोन BESS प्रोजेक्ट के लिए टेंडर जारी किया था. टेंडर में बोली लगाने वालों को 68.2 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करनी थी. यदि गारंटी विदेशी बैंक की होती तो उसे भारतीय शाखा या SBI द्वारा एंडोर्स करवाना जरूरी था.
जांच में सामने आया कि Reliance Power ने फर्जी गारंटी FirstRand Bank, Manila और ACE Investment Bank Ltd, Malaysia के नाम पर बनाई. इन गारंटियों को असली दिखाने के लिए नकली ईमेल, फर्जी एंडोर्समेंट लेटर और SBI जैसा डोमेन s-bi.co.in का इस्तेमाल किया गया.
करोड़ों रुपये की हेराफेरी
ED की जांच में यह भी पता चला कि Reliance Power ने अपनी सहयोगी कंपनी Rosa Power Supply Company Ltd से 6.33 करोड़ रुपये Biswal Tradelink को भेजे. यह राशि ट्रांसपोर्टेशन सर्विसेज के नाम पर भेजी गई, लेकिन सभी वर्क ऑर्डर और इनवॉइस फर्जी पाए गए.
Reliance Power ने शेल कंपनी को 5.40 करोड़ रुपये की बड़ी फीस भी दी ताकि पूरा लेन-देन वैध लगे. हालांकि, SECI ने फर्जी गारंटी को अस्वीकार कर दिया और Reliance ने एक दिन में ही असली IDBI बैंक की गारंटी जमा की, लेकिन तय समय सीमा के बाद होने के कारण इसे मान्यता नहीं मिली.
फर्जी एंडोर्समेंट की कोशिश
टेंडर बचाने के लिए Reliance NU BESS Ltd ने SBI की कोलकाता शाखा से फर्जी विदेशी बैंक गारंटी का एंडोर्समेंट कराने का प्रयास किया. इसके लिए नकली एग्रीमेंट बनाए और कोलकाता नगर निगम को बोगस पता दिया. बावजूद इसके एंडोर्समेंट नहीं मिल सका और Reliance ने पूरा दोष Biswal Tradelink और उसके MD पर डालने के लिए शिकायत दर्ज कराई.
ED ने अपने बयान में कहा कि जांच में Reliance Group की गलत नीयत, मिलीभगत और जालसाजी की पूरी साजिश सामने आई है.
आरोपियों के नाम
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पार्थ सारथी बिस्वाल
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मेसर्स बिस्वाल ट्रेडलिंक प्राइवेट लिमिटेड
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मेसर्स बायोएथेन केमिकल्स प्राइवेट लिमिटेड
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अमर नाथ दत्त
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रविंदर पाल सिंह चड्ढा
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मेसर्स रिलायंस एनयू बेस लिमिटेड
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मेसर्स रोजा पावर सप्लाई कंपनी लिमिटेड
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मनोज भाईसाहब पोंगड़े
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मेसर्स रिलायंस पावर लिमिटेडअशोक कुमार पाल
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पुनीत नरेंद्र गर्ग
ED ने जुड़े धन की जानकारी भी दी
पूरक शिकायत के साथ ED ने 5.15 करोड़ रुपये की अवैध कमाई भी संलग्न की है. मामले की आगे की कार्रवाई के तहत जांच जारी है और सभी आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं.


