'उम्मीद है ऐसा नहीं होगा...'भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर रूस का धमाकेदार बयान, क्या इस डील से भारत-रूस की दोस्ती पर है खतरा?

भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर रूस के उप-विदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने अपनी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने उम्मीद जताया है कि इस समझौते से भारत और रूस के बीच मजबूत संबंधों पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में एक अंतरिम व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क तय हो गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एग्जिक्यूटिव ऑर्डर पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत भारत से आयात पर लगे अतिरिक्त 25% टैरिफ हटा दिए गए हैं.

इस डील में भारत ने अमेरिकी उत्पादों की अधिक खरीदारी और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की बात कही है. ट्रंप प्रशासन ने इस दौरान भारत से रूसी तेल की खरीद कम करने या रोकने पर जोर दिया है.

भारत को लेकर रूसी मंत्री का बयान 

रूस के उप-विदेश मंत्री सर्गेई रियाबकोव ने इस डील पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि वे उम्मीद करते हैं कि भारत-अमेरिका का यह समझौता भारत और रूस के बीच के मजबूत संबंधों पर कोई बुरा असर नहीं डालेगा. रियाबकोव ने जोर देकर कहा कि भारत में हर किसी के लिए जगह और क्षमता मौजूद है.

अमेरिका पर एकतरफा सोच का आरोप 

रूसी मंत्री ने अमेरिका की नीति पर कड़ी आलोचना की. उन्होंने कहा कि अमेरिका सब कुछ अपने लिए चाहता है और दूसरों के लिए कुछ नहीं छोड़ता. यह एकतरफा सोच का सबसे खराब उदाहरण है.

टैरिफ और दबाव वाले तरीके सिर्फ एक देश की ताकत दिखाने और वर्चस्व कायम करने के लिए इस्तेमाल होते हैं, जो पूरी तरह अस्वीकार्य हैं. रियाबकोव का मानना है कि सहयोग और पारस्परिक लाभ ही समृद्धि का सही रास्ता है. देशों को अपनी स्वतंत्रता बनाए रखनी चाहिए.

भारत-रूस व्यापार की अपार संभावनाएं

रियाबकोव ने भारत और रूस के बीच व्यापार की चर्चा की. उन्होंने बताया कि दोनों देशों के बीच व्यापार की मात्रा पहले से ही काफी अच्छी है, लेकिन इसकी और भी ज्यादा क्षमता है. इसलिए उन्हें पूरा भरोसा है कि भारत सभी देशों के साथ व्यापार जारी रख सकता है, बिना किसी के साथ संबंध खराब किए.

ट्रंप पर साधा निशाना

ट्रंप द्वारा ब्रिक्स को पश्चिम-विरोधी बताए जाने पर रियाबकोव ने तीखा जवाब दिया. उन्होंने कहा कि ब्रिक्स कभी पश्चिम-विरोधी संगठन नहीं रहा और न ही ऐसा बनने का कोई इरादा है. किसी को भी इस गठबंधन को तोड़ने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. ब्रिक्स का मकसद मौजूदा बाधाओं को हटाना है, ताकि आयात-निर्यात और निवेश बिना रुकावट के चल सके.

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