'बाहर हमको डार्लिंग कहकर पुकारता है, इधर...'संसद से कल्याण बनर्जी का मजाकियां अंदाज हुआ वायरल
लोकसभा में चल रहे गंभीर बहस के बीच कल्याण बनर्जी का एक बयान ने सदन का पूरा माहौल बदल दिया. बनर्जी ने मजाकियां अंदाज में स्पीकर से अपील की, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर काफी पसंद किया जा रहा है.

नई दिल्ली: लोकसभा में इन दिनों गंभीर बहस और हंगामे के बीच एक हल्का-फुल्का और मजेदार पल देखने को मिला. तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने स्पीकर से बोलने के लिए अतिरिक्त समय मांगते हुए ऐसा कुछ कहा कि पूरा सदन हंस पड़ा. उन्होंने अपनी बात को बहुत ही मजाकिया अंदाज में रखा, जिससे माहौल थोड़ा हल्का हो गया.
कल्याण बनर्जी की मजेदार अपील
कल्याण बनर्जी सदन में अपनी बात पूरी करने के लिए स्पीकर से और समय मांग रहे थे. उन्होंने स्पीकर को संबोधित करते हुए कहा, "बाहर लोग मुझे 'डार्लिंग' कहकर पुकारते हैं, लेकिन यहां संसद में मुझे बोलने का पूरा समय नहीं मिलता."
उनका यह मजाकिया अंदाज सुनकर स्पीकर से लेकर अन्य सांसदों तक सब मुस्कुरा उठे. सदन में हंसी की लहर दौड़ गई और कुछ पल के लिए गंभीर माहौल हल्का हो गया.
"बाहर हमको डार्लिंग कहकर पुकारता है, इधर हमको टाइम नहीं देता है"
TMC MP Kalyan Banerjee told the Speaker.pic.twitter.com/rfnRSUL11z— Sachin Gupta (@SachinGuptaUP) February 11, 2026
बनर्जी ने स्पीकर से किया विनम्र अनुरोध
कल्याण बनर्जी ने स्पीकर से बहुत विनम्रता से अनुरोध किया कि उन्हें अपनी बात पूरी करने के लिए थोड़ा और समय दिया जाए. उन्होंने कहा कि बाहर तो लोग उन्हें बहुत प्यार से 'डार्लिंग' कहते हैं, लेकिन सदन में उनकी बात को पूरा सुनने का मौका कम मिलता है. उनका यह तरीका इतना स्वाभाविक और मजेदार था कि स्पीकर भी मुस्कुराते हुए उनकी बात सुनने लगे.
सदन में हंसी का माहौल
यह पल लोकसभा के उन दुर्लभ क्षणों में से एक था, जब राजनीतिक तनाव के बीच हल्की-फुल्की बातचीत ने सभी को थोड़ा राहत दी. कल्याण बनर्जी का यह अंदाज न सिर्फ सदन में मौजूद सांसदों को हंसाने में कामयाब रहा, बल्कि सोशल मीडिया पर भी यह वाकया तेजी से वायरल हो गया. कई लोग इसे 'संसद का सबसे क्यूट मोमेंट' कह रहे हैं.
कल्याण बनर्जी पहले भी अपने बेबाक और मजाकिया अंदाज के लिए जाने जाते हैं. इस बार भी उन्होंने गंभीर मुद्दों पर बोलते हुए हल्का-फुल्का अंदाज अपनाकर सदन का माहौल बदल दिया. ऐसे पल संसद को और भी जीवंत बनाते हैं, जहां गंभीर बहस के साथ-साथ इंसानी रिश्तों की झलक भी दिखती है.


