अकबर के फाइनेंस मिनिस्टर का राज: दुश्मन के कैंप से निकलकर मुगल खजाने को मालामाल करने वाला वो शख्स कौन था?
मुगल सम्राट अकबर के नवरत्नों में शुमार यह प्रतिभाशाली वित्त मंत्री पहले शेरशाह सूरी के दरबार में थे, फिर मुगलों के खजाने भरने वाले जादूगर बन गए. उनकी क्रांतिकारी राजस्व व्यवस्था ने साम्राज्य को काफी मजबूत बनाया. आइए जानते हैं, कौन थे यह महान टोडरमल?

नई दिल्ली: आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण संसद में केंद्रीय बजट पेश करने वाली हैं. सदियों पहले मुगल साम्राज्य में भी वित्तीय प्रबंधन की एक मजबूत व्यवस्था मौजूद थी. बाबर और हुमायूं के समय कोई सुव्यवस्थित सिस्टम नहीं था, क्योंकि उनका शासन अस्थिर रहा, लेकिन अकबर ने अपने नवरत्नों में शामिल राजा टोडर मल को वित्तीय जिम्मेदारी सौंपी, जिन्होंने दहसाला प्रणाली जैसी क्रांतिकारी व्यवस्था लागू कर साम्राज्य को आर्थिक रूप से मजबूत बनाया.
एक फरवरी को जब आधुनिक भारत का बजट पेश होने वाला है, तब राजा टोडर मल की दूरदर्शिता और उनकी दहसाला प्रणाली को याद करना बेहद प्रासंगिक हो जाता है. टोडर मल न केवल वित्त मंत्री थे, बल्कि एक कुशल अर्थशास्त्री और प्रशासक भी थे, जिनकी व्यवस्था ने मुगल अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया.
मुगल साम्राज्य के वित्तीय वास्तुकार कौन थे?
भारतीय इतिहास में कुशल प्रशासन और सटीक वित्तीय प्रबंधन की बात हो तो राजा टोडर मल का नाम सबसे पहले आता है. अकबर के नवरत्नों में शामिल टोडर मल केवल मंत्री नहीं थे, बल्कि एक दूरदर्शी अर्थशास्त्री थे जिन्होंने मध्यकालीन भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी. उनकी कार्यशैली की खासियत यह थी कि वे एक-एक पाई का हिसाब रखते थे, जिससे साम्राज्य की आय में अभूतपूर्व वृद्धि हुई.
कहा से आए थे वित्त मंत्री?
राजा टोडर मल का जन्म उत्तर प्रदेश के लहरपुर में हुआ था. अकबर के दरबार में आने से पहले उन्होंने शेरशाह सूरी के अधीन काम किया, जो हुमायूं से मुगल सल्तनत छीन चुके थे. शेरशाह के समय टोडर मल ने भूमि पैमाइश और राजस्व संग्रह की बारीकियां सीखीं. जब वे अकबर की सेवा में आए, तो इन अनुभवों को मुगल साम्राज्य की विशालता के अनुरूप ढालकर नई व्यवस्था लागू की.
वित्तीय प्रबंधन का मास्टरस्ट्रोक
टोडर मल की सबसे बड़ी उपलब्धि दहसाला या जब्ती प्रणाली थी, जिसे 1580 ईस्वी में लागू किया गया. इस प्रणाली ने राजस्व संग्रह की अनिश्चितता को खत्म कर दिया. पिछले दस वर्षों (1570-1580) की फसलों की पैदावार और कीमतों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर औसत के आधार पर लगान तय किया गया.
टोडर मल ने भूमि पैमाइश के लिए बांस के डंडों को लोहे के छल्लों से जोड़कर बनी माप इकाई का इस्तेमाल शुरू किया. पहले रस्सी से माप होती थी, जो मौसम में बदलती रहती थी. सटीक माप से भ्रष्टाचार की गुंजाइश खत्म हो गई. उन्होंने भूमि को उत्पादकता के आधार पर चार श्रेणियों में बांटा.
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परौती: एक-दो साल खाली छोड़ी जाने वाली.
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चाचर: तीन-चार साल खाली छोड़ी जाने वाली.
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बंजर: पांच साल या अधिक समय से खेती योग्य नहीं.
एक-एक पाई का हिसाब और पारदर्शिताटोडर मल के प्रबंधन में पारदर्शिता सबसे ऊपर थी. राजस्व अधिकारियों के लिए सख्त नियम बनाए गए. सभी जिले का रिकार्ड भी रखा जाता था. फारसी को आधिकारिक भाषा बनाकर रिकॉर्ड मानकीकृत किए गए, जिससे स्थानीय स्तर पर हेराफेरी कम हुई. अकाल या फसल खराब होने पर किसानों को तकावी और कर माफी का प्रावधान था, जो आज के फसल बीमा जैसा था.
आधुनिक बजट में टोडर मल की प्रासंगिकताआज का बजट भी राजस्व अनुमान, व्यय आवंटन और डेटा आधारित निर्णयों पर टिका है, जो टोडर मल ने सदियों पहले अपनाए थे. उन्होंने सिखाया कि मजबूत अर्थव्यवस्था के लिए सिर्फ कर वसूलना काफी नहीं, बल्कि करदाताओं की क्षमता और संसाधनों का वैज्ञानिक मूल्यांकन जरूरी है.
वित्त मंत्री से ज्यादा: कुशल सेनापति भीटोडर मल केवल कागजी काम तक सीमित नहीं थे. वे गुजरात और बंगाल अभियानों में वीर सेनापति के रूप में भी उभरे. उनकी प्रशासनिक क्षमता से प्रभावित अकबर ने उन्हें मुशरिफ-ए-दीवान जैसे उच्च पद दिए.राजा टोडर मल की व्यवस्था सिर्फ कर संग्रह नहीं, बल्कि सुशासन का मॉडल थी. इसने मुगल साम्राज्य को आर्थिक रूप से इतना समृद्ध बनाया कि वह दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शुमार हुआ. आज डिजिटल रिकॉर्ड और वित्तीय समावेशन की बात हो तो टोडर मल की ईमानदारी और वैज्ञानिक सोच अभी भी प्रेरणा देती है.


