पाकिस्तान की खैर नहीं... अरब दुनिया ने भारत का हाथ थामा, दिल्ली घोषणापत्र ने मिडिल ईस्ट का खेल पलटा
भारत और अरब देशों के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा पार आतंकवाद की कड़ी निंदा की. सभी ने मिलकर आतंकवाद, उसके ढांचे और फंडिंग को जड़ से खत्म करने तथा हमलों के दोषियों को जल्द सजा दिलाने का आह्वान किया.

नई दिल्ली: भारत और अरब लीग के विदेश मंत्रियों की दूसरी बैठक के बाद जारी 'दिल्ली घोषणापत्र' ने पाकिस्तान के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं. इस घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है, खासकर सीमा पार आतंकवाद पर जोरदार प्रहार किया गया है, जो इस्लामाबाद के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. अरब देशों ने भारत के साथ एकजुट होकर पहलगाम में भारतीय पर्यटकों पर हुए जघन्य आतंकी हमले की तीखी निंदा की और आतंकवाद के सभी रूपों के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को दोहराया.
यह घोषणापत्र न केवल भारत-अरब संबंधों में मजबूती का प्रतीक है, बल्कि वैश्विक स्तर पर आतंकवाद के समर्थकों को अलग-थलग करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम भी साबित हो रहा है. बैठक में आतंकवाद विरोधी सहयोग, फिलिस्तीन मुद्दे और क्षेत्रीय शांति जैसे कई अहम मुद्दों पर गहन चर्चा हुई, जिससे दोनों पक्षों के बीच रणनीतिक साझेदारी और गहरी हुई.
पहलगाम हमले की कड़ी निंदा और सीमा पार आतंकवाद पर प्रहार
घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की स्पष्ट और कड़ी निंदा की गई है, जिसमें निर्दोष भारतीय पर्यटकों को निशाना बनाया गया था. अरब देशों के विदेश मंत्रियों ने इस हमले की निंदा करते हुए भारत के प्रति पूर्ण और अटल समर्थन दोहराया.
सीधा संदेश: घोषणापत्र में पहलगाम आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई. यह पाकिस्तान समर्थित आतंकी गुटों के लिए स्पष्ट चेतावनी है.
जीरो टॉलरेंस: सभी देशों ने एक स्वर में कहा कि आतंकवाद को किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा,
इंफ्रास्ट्रक्चर हो खत्म: देशों से अपील की गई कि वे अपनी जमीन पर मौजूद आतंकी ढांचे और फंडिंग नेटवर्क को तुरंत खत्म करें.
नई तकनीक पर चिंता: आतंकियों द्वारा ड्रोन और आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर भी गंभीर चिंता जताई गई.
सीरिया-इराक के प्रयासों की सराहना और फंडिंग पर सख्ती
घोषणापत्र में भारत के अलावा पश्चिम एशिया में आतंकवाद के खिलाफ चल रही लड़ाई का भी जिक्र है. इराक में दाएश के खिलाफ इराक की भूमिका और सीरिया सरकार के ड्रग तस्करी तथा आतंकवाद विरोधी प्रयासों को विशेष रूप से सराहा गया है.
फिलिस्तीन मुद्दे पर दो-राष्ट्र समाधान का मजबूत समर्थनदिल्ली घोषणापत्र में फिलिस्तीन मुद्दे पर विस्तृत चर्चा हुई. भारत और अरब देशों ने 1967 की सीमाओं के आधार पर एक स्वतंत्र, संप्रभु और व्यवहार्य फिलिस्तीन राज्य की स्थापना का समर्थन किया, जो इजरायल के साथ शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व में रह सके.
शांति प्रयास: 2025 के शर्म-अल-शेख शांति शिखर सम्मेलन और गाजा संघर्षविराम समझौते का स्वागत किया गया.मध्यस्थता: मिस्र, कतर, अमेरिका और अल्जीरिया की मध्यस्थता भूमिका की सराहना की गई.
गाजा पुनर्निर्माण: गाजा में राहत और पुनर्निर्माण के लिए अरब-इस्लामिक योजना और ‘फिलिस्तीनी टेक्नोक्रेटिक समिति’ के गठन को महत्वपूर्ण बताया गया.


