Budget 2026: सरकार ने पर्यटन को क्यों माना विकास का पहिया, टूरिस्ट गाइड से लेकर होटल और खान पान तक...कैसे चलती है इकॉनोमी?

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पर्यटन क्षेत्र के लिए कई बड़ी घोषणाएं कीं. उन्होंने कहा कि पर्यटन विकास का प्रमुख इंजन है. पर्यटन में अच्छे गाइडों की कमी को दूर करने के लिए एक पायलट योजना शुरू होगी. नई डिजिटल पहल के तहत राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड बनेगा.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने रविवार को संसद में केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया. इस बजट में पर्यटन को रोजगार पैदा करने और क्षेत्रीय विकास का प्रमुख इंजन बताया गया है. वित्त मंत्री ने कहा कि पर्यटन क्षेत्र में रोजगार सृजन, विदेशी मुद्रा कमाने और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की जबरदस्त क्षमता है.

पर्यटन को नई ऊंचाई देने की योजना

सीतारमण ने पर्यटन को विकास का बड़ा चालक माना. उन्होंने जोर दिया कि भारत में विश्व स्तरीय ट्रेकिंग और हाइकिंग का अनुभव देने की अपार संभावनाएं हैं. इसलिए सरकार पर्यावरण-अनुकूल पर्वतीय मार्ग विकसित करेगी. हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के साथ-साथ पूर्वी घाट की अरकु घाटी और पश्चिमी घाट की पोधिगई मलाई में ये ट्रेल्स बनाए जाएंगे. ये मार्ग टिकाऊ होंगे, जिससे प्रकृति संरक्षण के साथ पर्यटकों को रोमांचक अनुभव मिलेगा.

वन्यजीव पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा. ओडिशा, कर्नाटक और केरल के तटीय इलाकों में कछुओं के घोंसले स्थलों पर कछुआ मार्ग विकसित किए जाएंगे. वहीं आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु में पुलिकट झील के आसपास पक्षी देखने के विशेष रूट बनाए जाएंगे. इनसे पर्यावरण संरक्षण और पर्यटन दोनों को फायदा होगा.

गाइडों की स्किलिंग और मानव संसाधन विकास

पर्यटन में अच्छे गाइडों की कमी को दूर करने के लिए एक पायलट योजना शुरू होगी. 20 प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों पर 10,000 गाइडों को प्रशिक्षित किया जाएगा. यह 12 सप्ताह का हाइब्रिड कोर्स होगा, जिसे भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) के साथ मिलकर चलाया जाएगा. कोर्स में स्थानीय संस्कृति, इतिहास, सुरक्षा और पर्यावरण-अनुकूल तरीके सिखाए जाएंगे. इससे पर्यटकों को बेहतर सेवा मिलेगी और स्थानीय युवाओं को रोजगार मिलेगा.

राष्ट्रीय होटल प्रबंधन एवं खानपान प्रौद्योगिकी परिषद को अपग्रेड कर राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान बनाया जाएगा. यह संस्थान शिक्षा, उद्योग और सरकार के बीच मजबूत सेतु बनेगा, जिससे होटल और हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में कुशल लोग तैयार होंगे.

विरासत पर्यटन पर फोकस

एक नई डिजिटल पहल के तहत राष्ट्रीय गंतव्य डिजिटल ज्ञान ग्रिड बनेगा. यह प्लेटफॉर्म सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक महत्व के स्थानों को डिजिटल रूप से रिकॉर्ड करेगा. इससे शोधकर्ता, इतिहासकार और कंटेंट क्रिएटर्स को अवसर मिलेंगे.विरासत पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए लोथल, धोलावीरा, राखीगढ़ी, आदिचनल्लूर, सारनाथ, हस्तिनापुर और लेह पैलेस समेत 15 पुरातात्विक स्थलों को विकसित किया जाएगा. इनमें पैदल मार्ग, व्याख्या केंद्र और संरक्षण लैब बनेंगी, ताकि पर्यटक इन स्थानों का पूरा अनुभव ले सकें.

कनेक्टिविटी में बढ़ोतरी

चिकित्सा पर्यटन को मजबूत करने के लिए निजी क्षेत्र के साथ मिलकर पांच क्षेत्रीय चिकित्सा केंद्र स्थापित होंगे. ये केंद्र स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा, अनुसंधान, आयुष, डायग्नोस्टिक्स, पोस्ट-केयर और रिहैबिलिटेशन को एक साथ लाएंगे. इससे भारत वैश्विक मेडिकल टूरिज्म हब बनेगा.परिवहन को बेहतर बनाने के लिए सात हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं, जैसे मुंबई-पुणे, पुणे-हैदराबाद, दिल्ली-वाराणसी आदि. ये शहरों, उद्योगों और पर्यटन स्थलों को जोड़ेंगे. साथ ही स्वदेशी सीप्लेन निर्माण को प्रोत्साहन और वीजीएफ स्कीम से पर्यटन पहुंच आसान होगी.

उद्योग विशेषज्ञों ने इन घोषणाओं का स्वागत किया है. टूर ऑपरेटर्स और हॉस्पिटैलिटी एसोसिएशंस ने कहा कि ये कदम रोजगार, विदेशी मुद्रा और समावेशी विकास को बढ़ावा देंगे. कुल मिलाकर, बजट में पर्यटन को सतत, समावेशी और आर्थिक विकास का मजबूत स्तंभ बनाने की कोशिश साफ दिखती है.

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