बजट में कपड़ा इंडस्ट्री को बूस्ट देने के लिए घोषणाएं, चैलेंज मोड पर बनेंगे मेगा टेक्सटाइल पार्क...वित्त मंत्री के ऐलानों से टूट जाएगी बांग्लादेश की रीढ़

भारत के बजट 2026-27 में टेक्सटाइल इंडस्ट्री को मजबूत बनाने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की गई हैं. इसमें रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने, मशीनरी सहायता प्रदान करने, हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रमों को मजबूत करने और कौशल विकास पर विशेष जोर दिया गया है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने टेक्सटाइल क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिए एक व्यापक नीति की घोषणा की है, जो श्रम-गहन उद्योग को आत्मनिर्भरता, रोजगार सृजन, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर केंद्रित है. इस बजट का मुख्य उद्देश्य समावेशी विकास को बढ़ावा देना है, जिसमें ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और निर्यात को प्रोत्साहित करना शामिल है.

टेक्सटाइल सेक्टर को प्रमुख चालक बनाने का ऐलान 
आपको बता दें कि टेक्सटाइल सेक्टर को भारत की आर्थिक और सामाजिक प्रगति का प्रमुख चालक बनाने के लिए विभिन्न एकीकृत कार्यक्रमों का ऐलान किया गया है, जो फाइबर उत्पादन से लेकर फैशन तक की पूरी मूल्य श्रृंखला को मजबूत करेंगे. सरकार ने रेशम उत्पादन को बढ़ावा देने, मशीनरी सहायता प्रदान करने, हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रमों को मजबूत करने तथा कौशल विकास पर विशेष जोर दिया है, जिससे लाखों लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. इसके अलावा, टेक्सटाइल निर्यात की समय सीमा को छह महीने से बढ़ाकर एक वर्ष करने का प्रावधान किया गया है, जो गारमेंट्स, चमड़े और जूतों जैसे उत्पादों के लिए फायदेमंद होगा. 

बांग्लादेश की टेक्सटाइल मार्केट को करारा जवाब

भारत सरकार ने बजट 2026-27 के माध्यम से बांग्लादेश की कपड़ा उद्योग की चुनौतियों का सामरिक तरीके से सामना करने की रणनीति अपनाई है. पड़ोसी देश बांग्लादेश लंबे समय से भारत के घरेलू टेक्सटाइल बाजार के लिए प्रतिस्पर्धी रहा है, लेकिन हाल के राजनीतिक परिवर्तनों के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव आया है.

भारत के कपड़ा बाजार को आकर्षक बनाने पर केंद्रित
बांग्लादेश में लोकतांत्रिक सरकार के हटने के बाद नई व्यवस्था ने भारत के साथ संबंधों को प्रभावित किया है, जिसके जवाब में भारत ने द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्परिभाषित किया है. इस बजट की घोषणाएं भारत के कपड़ा बाजार को अधिक आकर्षक बनाने पर केंद्रित हैं, जिसमें आत्मनिर्भर फाइबर उत्पादन, तकनीकी उन्नयन और सतत विकास शामिल हैं. इससे न केवल घरेलू उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति मजबूत होगी, जो बांग्लादेश के निर्यात-उन्मुख मॉडल को चुनौती देगा.

भारत से आगे है बांग्लादेश का कपड़ा बाजार
बांग्लादेश का कपड़ा उद्योग मुख्य रूप से निर्यात-केंद्रित है, जबकि भारत का बाजार घरेलू मांग पर अधिक निर्भर है. 2024 में बांग्लादेश ने 52.9 अरब डॉलर के कपड़ा निर्यात किए, जो उसे रेडीमेड गारमेंट्स का दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा निर्यातक बनाता है. वहीं, भारत ने टेक्सटाइल, अपैरल और हस्तशिल्प से कुल 37.7 अरब डॉलर का निर्यात किया, जो वैश्विक सूची में छठे स्थान पर है.

बांग्लादेश का छोटा आकार होने के बावजूद गारमेंट सेक्टर में भारत से आगे होना, मुख्य रूप से कम विकसित देश (एलडीसी) का दर्जा होने के कारण है, जिससे उसे यूरोपीय संघ जैसे बाजारों में शुल्क-मुक्त पहुंच मिलती है. हालांकि, भारत का बड़ा घरेलू बाजार और विविध उत्पादन क्षमता उसे दीर्घकालिक लाभ प्रदान करती है. 

कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल ने बताई थी वजह- 
गारमेंट सेक्टर में क्यों पिछड़ा है भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने हाल ही में स्पष्ट किया कि बांग्लादेश यूरोपीय संघ के 250 अरब डॉलर के बाजार में 30 अरब डॉलर के निर्यात कैसे कर पाता है, जबकि भारत का हिस्सा सीमित है. इसका मुख्य कारण बांग्लादेश का एलडीसी दर्जा है, जिससे उसे शुल्क-मुक्त लाभ मिलता है. लेकिन भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के साथ यह असमानता दूर हो गई है.

गोयल ने कहा कि अब भारत अपने 7 अरब डॉलर के निर्यात को जल्दी ही 30-40 अरब डॉलर तक बढ़ा सकता है, क्योंकि टेक्सटाइल उसकी मजबूत क्षेत्र है. इससे 6-7 मिलियन नौकरियां सृजित होंगी, जो श्रम-गहन उद्योग को मजबूत बनाएगी. 

बजट में चैलेंज मोड पर मेगा टेक्सटाइल पार्क की घोषणा
बजट में मेगा टेक्सटाइल पार्कों की स्थापना को चैलेंज मोड में आगे बढ़ाने का ऐलान किया गया है, जो तकनीकी टेक्सटाइल में मूल्य वर्धन पर ध्यान केंद्रित करेंगे. ये पार्क पारंपरिक क्लस्टर्स को आधुनिक बनाने में मदद करेंगे, जिसमें पूंजीगत सहायता, प्रौद्योगिकी उन्नयन और सामान्य परीक्षण व प्रमाणन केंद्र शामिल हैं. इससे उत्पादन क्षमता बढ़ेगी और वैश्विक मानकों के अनुरूप उत्पाद तैयार होंगे. 

महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल
खादी, हथकरघा और हस्तशिल्प को मजबूत करने के लिए महात्मा गांधी ग्राम स्वराज पहल की शुरुआत की गई है, जो वैश्विक बाजार से जुड़ाव और ब्रांडिंग को बढ़ावा देगी. यह पहल प्रशिक्षण, कौशल विकास, प्रक्रिया सुधार और उत्पाद गुणवत्ता पर जोर देगी, जिससे बुनकरों, ग्रामीण उद्योगों, एक जिला एक उत्पाद योजना और युवाओं को लाभ मिलेगा. 

हाई क्वालिटी वाले किफायती स्पोर्ट्स सामान
गारमेंट सेक्टर को विस्तार देते हुए, भारत को उच्च गुणवत्ता वाले किफायती स्पोर्ट्स सामान का वैश्विक केंद्र बनाने की पहल शुरू की गई है. इसमें उपकरण डिजाइन, सामग्री विज्ञान, विनिर्माण, अनुसंधान और नवाचार को प्रोत्साहन मिलेगा, जो टेक्सटाइल से जुड़े उत्पादों को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा.

टेक्स्टाइल इंडस्ट्री के लिए 5 महत्वपूर्ण घोषणाएं
बजट में श्रम-आधारित टेक्सटाइल उद्योग के लिए पांच प्रमुख योजनाओं का ऐलान किया गया है. पहली, राष्ट्रीय फाइबर योजना, जो रेशम, ऊन, जूट जैसे प्राकृतिक फाइबरों, मानव-निर्मित फाइबरों और आधुनिक फाइबरों में आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करेगी. दूसरी, टेक्सटाइल विस्तार और रोजगार योजना, जो मशीनरी के लिए पूंजी सहायता, प्रौद्योगिकी उन्नयन और सामान्य परीक्षण केंद्रों के माध्यम से पारंपरिक क्लस्टर्स को आधुनिक बनाएगी.

तीसरी, राष्ट्रीय हथकरघा और हस्तशिल्प कार्यक्रम, जो मौजूदा योजनाओं को एकीकृत कर बुनकरों और कारीगरों को लक्षित समर्थन प्रदान करेगा. चौथी, टेक्स-इको पहल, जो वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और सतत टेक्सटाइल एवं कपड़ों को बढ़ावा देगी. पांचवीं, समर्थ 2.0, जो उद्योग और शैक्षणिक संस्थानों के सहयोग से टेक्सटाइल कौशल पारिस्थितिकी को आधुनिक बनाएगी, विशेष रूप से तकनीकी टेक्सटाइल और सतत प्रथाओं के लिए कार्यबल को तैयार करेगी. 

2030 तक 100 बिलियन एक्सपोर्ट का लक्ष्य
भारत 2030 तक गारमेंट सेक्टर से 100 अरब डॉलर के निर्यात का लक्ष्य रखता है, जिसके लिए पारंपरिक बाजारों पर कब्जा और मौजूदा प्रतिद्वंदियों को चुनौती देना आवश्यक है. एफटीए जैसे समझौते इस लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेंगे, जिससे रोजगार और आर्थिक वृद्धि बढ़ेगी.

बांग्लादेश इंडस्ट्री के लिए 'सर्जिकल स्ट्राइक'
ये बजट घोषणाएं ऐसे समय में आई हैं जब बांग्लादेश का टेक्सटाइल सेक्टर संकट में है. वहां के स्पिनिंग मिल मालिकों ने 1 फरवरी 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी दी है, क्योंकि भारत से सस्ते शुल्क-मुक्त यार्न आयात से स्थानीय उत्पादन पर दबाव बढ़ा है. इससे मिलें बंद हो सकती हैं और लाखों नौकरियां प्रभावित होंगी. भारत की फाइबर आत्मनिर्भरता और विस्तार पर फोकस वाली नीतियां वैश्विक बाजार में उसकी स्थिति को मजबूत बनाती हैं, जो बांग्लादेश के लिए एक रणनीतिक झटका साबित हो सकती है. 

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