क्या है STT टैक्स? जिसके बढ़ते ही शेयर बाजार में आई भारी गिरावट, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताई वजह

आज वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026-27 पेश किया. इस दौरान उन्होंने STT को बढ़ाने का प्रस्ताव रखा, जिसके बाद शेयर बाजार में तेजी से गिरावट आ गई.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: केंद्रीय बजट 2026-27 पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बाजार के फ्यूचर्स एंड ऑप्शंस (F&O) सेगमेंट पर सिक्योरिटीज ट्रांजेक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा. इस घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाजार में तेज गिरावट आई.

इंट्राडे में निफ्टी काफी नीचे चला गया और अंत में करीब 2% की गिरावट के साथ बंद हुआ. कई ब्रोकरेज और कैपिटल मार्केट से जुड़े शेयरों में 10-15% तक की कमजोरी देखी गई. बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला F&O ट्रेडिंग को महंगा बनाने वाला है.

सरकार ने STT क्यों बढ़ाया?

बजट के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्पष्ट किया कि STT में यह बढ़ोतरी बहुत मामूली है और इसका मुख्य उद्देश्य F&O सेगमेंट में अत्यधिक सट्टेबाजी (स्पेकुलेशन) पर लगाम लगाना है. उन्होंने कहा कि वायदा और विकल्प में ज्यादा जोखिम और सट्टेबाजी होती है, जिससे छोटे निवेशकों को नुकसान हो सकता है.

रेवेन्यू सेक्रेटरी ने भी बताया कि यह कदम सिस्टेमेटिक जोखिमों को कम करने और डेरिवेटिव्स मार्केट में संतुलन लाने के लिए उठाया गया है. सरकार का फोकस सट्टेबाजों को हतोत्साहित करना है, ताकि बाजार में स्थिरता बनी रहे और रिटेल निवेशकों की सुरक्षा हो.

क्या है STT टैक्स? 

STT एक ऐसा टैक्स है जो स्टॉक एक्सचेंज पर शेयर, डेरिवेटिव्स या इक्विटी म्यूचुअल फंड्स की खरीद-बिक्री पर लगता है. इसे 2004 में शुरू किया गया था ताकि सट्टेबाजी कम हो और सरकार को अतिरिक्त राजस्व मिले. कुल मिलाकर ये बदलाव F&O ट्रेडिंग की कुल लागत बढ़ा देंगे, खासकर उन ट्रेडर्स के लिए जो बार-बार छोटे सौदे करते हैं. 

इस बजट में बदलाव

  • फ्यूचर्स पर STT: पहले 0.02% था, अब 0.05% हो गया (150% की बढ़ोतरी).
  • ऑप्शंस पर STT: प्रीमियम और एक्सरसाइज दोनों पर अब 0.15% (पहले प्रीमियम पर 0.1% और एक्सरसाइज पर 0.125% था).

यह फैसला F&O सेगमेंट में ट्रेडिंग वॉल्यूम को प्रभावित कर सकता है. छोटे निवेशक जो ज्यादा सट्टेबाजी करते हैं, उन्हें अब ज्यादा खर्च करना पड़ेगा. सरकार का मानना है कि इससे बाजार में अनावश्यक जोखिम कम होगा और लंबे समय में निवेशकों का फायदा होगा.
 

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