बेरोजगार युवा, संकट में किसान...बजट 2026 पर राहुल गांधी ने जताई चिंता, कहा- डूबती अर्थव्यवस्था पर बात नहीं हुई
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आज यानी रविवार को बजट 2026 पेश किया. जिसके बाद सत्ता पक्ष ने इस बजट का जमकर तारीफ किया, वहीं विपक्षी पार्टियां इस बजट को पूरी तरह से खोखला और जमीनी हकीकत से नदारद बता रहे हैं. इसके साथ ही बजट में पारदर्शिता की कमी पर भी सवाल उठा रहे हैं.

नई दिल्ली : वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 1 फरवरी 2026 को देश का नौवां बजट पेश किया, जिसने राजनीतिक और आर्थिक गलियारों में एक नई बहस को जन्म दे दिया है. बजट के संसद पटल पर रखे जाते ही वित्तीय बाजारों में भारी हलचल देखी गई और शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई. जहां एक ओर सत्ता पक्ष यानी एनडीए (NDA) के नेता इस बजट को देश के भविष्य के लिए एक मील का पत्थर बता रहे हैं और इसकी जमकर सराहना कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दलों ने इसे पूरी तरह से दिशाहीन करार दिया है.
आपको बता दें कि बजट 2026 पर विपक्ष का मानना है कि यह बजट आम जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने में विफल रहा है और इसमें जमीनी हकीकत को पूरी तरह से नजरअंदाज किया गया है. बजट के पेश होने के बाद से ही देश के आर्थिक भविष्य को लेकर पक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है.
Youth without jobs.
— Rahul Gandhi (@RahulGandhi) February 1, 2026
Falling manufacturing.
Investors pulling out capital.
Household savings plummeting.
Farmers in distress.
Looming global shocks - all ignored.
A Budget that refuses course correction, blind to India’s real crises.
'रिफॉर्म एक्सप्रेस' पर सवार भारत...PM मोदी
बजट भाषण के समापन के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को उनके नौवें बजट के लिए बधाई दी और इसे एक ऐतिहासिक दस्तावेज बताया. प्रधानमंत्री के अनुसार, यह बजट केवल वित्तीय आवंटन का विवरण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान पीढ़ी के सपनों को हकीकत में बदलने का एक सशक्त माध्यम है. उन्होंने जोर देकर कहा कि आज का भारत 'रिफॉर्म एक्सप्रेस' पर सवार है और यह बजट उस गति को और अधिक बल प्रदान करेगा.
युवाओं और किसानों की अनदेखी का आरोप...राहुल गांधी
सरकार के दावों के विपरीत, कांग्रेस सांसद और विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस बजट की कड़ी आलोचना करते हुए इसे देश की वास्तविक समस्याओं से अनभिज्ञ बताया है. उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से देशवासियों का ध्यान उन मुद्दों की ओर आकर्षित करने का प्रयास किया जिन्हें बजट में कथित तौर पर छोड़ दिया गया है.
बजट देश के असली संकटों से अंजान
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट शेयर करते हुए कहा, आज देश का युवा बेरोजगारी की मार झेल रहा है, विनिर्माण क्षेत्र (Manufacturing) में लगातार गिरावट आ रही है और निवेशक भारतीय बाजार से अपनी पूंजी वापस निकाल रहे हैं. घरेलू बचत में कमी और किसानों का गहराता संकट देश के लिए चिंता का विषय है, जिसे सरकार ने इस बजट में पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया है. विपक्ष का तर्क है कि यह बजट वास्तविक आर्थिक सुधार करने के बजाय समस्याओं से मुंह मोड़ने वाला है.
बजट आवंटन की स्पष्ट जानकारी देने में विफल
कांग्रेस पार्टी ने बजट को केवल आर्थिक रूप से ही नहीं, बल्कि प्रक्रियात्मक रूप से भी त्रुटिपूर्ण बताया है. कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बजट की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि वित्त मंत्री का 90 मिनट का भाषण प्रमुख कार्यक्रमों और योजनाओं के लिए बजटीय आवंटन की स्पष्ट जानकारी देने में विफल रहा.
रमेश ने इस बजट को 'फीका' करार देते हुए कहा कि यह उन बड़ी उम्मीदों को पूरा करने में सक्षम नहीं है जो बजट से पहले बनाई गई थीं. कांग्रेस का आरोप है कि यह बजट केवल चुनिंदा चहेते पूंजीपतियों के हितों को ध्यान में रखकर बनाया गया है, जबकि आम जनता, मध्यम वर्ग और संकटग्रस्त किसानों की जरूरतों को दरकिनार कर दिया गया है.


