'मैं तेरा खून पी जाऊंगा...' धर्मेंद्र के 5 सबसे बेहतरीन डायलॉग कौन से हैं?
बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का आज निधन हो गया है. उनके निधन से इंडस्ट्री में शोक की लहर है. धर्मेंद्र भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन फिल्मों में किया गया उनका शानदार अभिनय और उनकी यादें हमारे बीच हमेशा जिंदा रहेगी. उन्हें केवल उनके दमदार अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि उनके दिल जीत लेने वाले संवादों के लिए भी हमेशा याद रखा जाएगा.
मुंबई: बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता धर्मेंद्र का आज निधन हो गया है. उनके निधन से इंडस्ट्री में शोक की लहर है. धर्मेंद्र भले ही हमारे बीच नहीं है, लेकिन फिल्मों में किया गया उनका शानदार अभिनय और उनकी यादें हमारे बीच हमेशा जिंदा रहेगी. उन्हें केवल उनके दमदार अभिनय के लिए ही नहीं, बल्कि उनके दिल जीत लेने वाले संवादों के लिए भी हमेशा याद रखा जाएगा.
धर्मेंद्र के संवाद उनके किरदारों को जीवंत बनाते थे और दर्शकों के दिलों में लंबे समय तक बस जाते थे. उनके जाने के बाद फैंस सोशल मीडिया और अन्य प्लेटफॉर्म पर उनके सबसे प्रसिद्ध संवादों को याद कर रहे हैं. आइए जानते हैं उनके कुछ सबसे चर्चित और लोकप्रिय डायलॉग्स के बारे में...
1. कुत्तो के सामने मत नचना, बसंती (शोले, 1975)
धर्मेंद्र ने यह डायलॉग 1975 में आई फिल्म शोले में बोला था. फिल्म शोले भारतीय सिनेमा की ऐतिहासिक फिल्मों में से एक है. रमेश सिप्पी द्वारा निर्देशित इस फिल्म के संवाद जावेद अख्तर और सलीम खान ने लिखे थे. फिल्म में अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, अमजद खान और असरानी जैसे कलाकार भी प्रमुख भूमिका में थे.
2. क्या कहानी में इमोशन है, ड्रामा है, ट्रेजेडी है (शोले, 1975)
ऐतिहासिक फिल्म शोले का एक और यादगार संवाद उस सीन से है, जब वीरू नशे में पानी की टंकी पर चढ़ता है और वह कहता है, 'गांव वालों, तुमको मेरा आखिरी सलाम, अलविदा...' और आगे जोड़ता है, 'इस कहानी में इमोशन है, ड्रामा है, ट्रेजेडी है...' यह लाइन दर्शाती है कि धर्मेंद्र की फिल्मों में हास्य और गंभीरता का बेहतरीन मिश्रण होता था.
3. दिल के मामले में हमेशा दिल की सुन्नी चाहिए (लाइफ इन ए मेट्रो, 2007)
2007 में रिलीज हुई लाइफ इन ए मेट्रो में धर्मेंद्र ने अमोल नाम का एक किरदार निभाया था. लाइफ इन ए मेट्रो में बोला गया धर्मेंद्र का 'डायलॉग दिल के मामले में हमेशा दिल की सुन्नी चाहिए' लोगों को काफी पसंद आया था. यह लाइन भावनाओं और दिल की सुनने की अहमियत को दर्शाती है. अनुराग बसु निर्देशित इस फिल्म में इरफानन खान, कोंकणा सेन शर्मा और गौतम कपूर भी प्रमुख भूमिकाओं में थे.
4. तुम्हारी ये गोली लोहे के शरीर के पार नहीं जा सकती (लोहा, 1997)
अभिनेता धर्मेंद्र ने अपने फिल्मी करियर में कई तरह के रोल किए हैं. उनके हर किरदार ने लोगों पर अपनी छाप छोड़ी है. फिल्म लोहा में धर्मेंद्र ने पुलिस इंस्पेक्टर का रोल निभाया था. इस फिल्म में उनका डायलॉग 'तुम्हारी ये गोली लोहे के शरीर के पार नहीं जा सकती' काफी चर्चित हुआ था. यह लाइन उनकी दमदार और सशक्त छवि को दर्शाती है. इस फिल्म में शत्रुघ्न सिन्हा, करण कपूर और अन्य कलाकार भी शामिल थे.
5. कुत्ते, कमीने, मैं तेरा खून पी जाऊंगा (यादों की बारात, 1973)
साल 1973 में धर्मेंद्र ने यादों की बारात नाम की सुपरहिट फिल्म में काम किया था. इस फिल्म के डायलॉग भी काफी हिट हुए थे. धर्मेंद्र द्वारा बोला गया 'कुत्ते कमीने, तू मुझसे बचकर नहीं जा सकता, मैं तेरा खून पी जाऊंगा' भी लोगों को बहुत पंसद आया था. नासिर हुसैन की इस फिल्म में धर्मेंद्र के अलावा विजय अरोड़ा, तारिक, जीनत अमान और अन्य भी मुख्य भूमिका में हैं.
धर्मेंद्र के ये संवाद सिर्फ फिल्मों तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उनके व्यक्तित्व और ऑन-स्क्रीन स्टाइल को दर्शाते हैं. उनकी बहादुरी, हास्य और भावनात्मक क्षमता इन डायलॉग्स में झलकती है. धर्मेंद्र ने बॉलीवुड में अपने दमदार अभिनय और यादगार संवादों से एक ऐसी पहचान बनाई, जो हमेशा जीवित रहेगी. उनके संवाद आज भी नए कलाकारों और दर्शकों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं.


