मनोरंजन जगत में शोक की लहर, इस कन्नड़ अभिनेता का 80 साल की उम्र में हुआ निधन

कन्नड़ अभिनेता उमेश का रविवार को निधन हो गया. उनकी उम्र 80 वर्ष हो चुकी थी और कथित तौर पर स्टेज-4 के लिवर कैंसर से परेशान थे. उन्होंने अपनी जिंदगी में 350 से अधिक फिल्मों में काम किया है. उमेश ने फिल्मी जगत में महज 4 साल की आयु में ही कदम रख दिया था.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

कर्नाटक : कन्नड़ सिनेमा के अनुभवी और चर्चित अभिनेता उमेश का 30 नवंबर 2025 को निधन हो गया. वह 80 वर्ष के थे और कथित तौर पर स्टेज-4 के लिवर कैंसर से जूझ रहे थे. उमेश ने अपने जीवन में 350 से अधिक फिल्मों में अभिनय करके दर्शकों के दिलों में अपनी अलग पहचान बनाई. उनके निधन से कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई.

शुरुआत बचपन में ही हुई थी

उमेश का जन्म 24 अप्रैल 1945 को मैसूर में हुआ. उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत मात्र चार साल की उम्र में की थी. इस उम्र में उन्होंने ‘लंचवतार’ फेम मास्टर के. हिरण्यय्या के थिएटर ग्रुप में अभिनय किया. बाद में, वह गुब्बी वीरन्ना के थिएटर ग्रुप से जुड़े, जिसने उनके अभिनय के सफर को और मजबूती दी. उनके बचपन के अनुभवों ने ही उन्हें अभिनय की दुनिया में लगातार आगे बढ़ने की प्रेरणा दी.

फिल्म इंडस्ट्री में संघर्ष और सफलता
उमेश को फिल्म इंडस्ट्री में पहला बड़ा ब्रेक 1960 में फिल्म ‘मक्कल राज्य’ के माध्यम से मिला. हालांकि, शुरुआती दौर में उनका करियर संघर्षपूर्ण रहा और उन्हें थिएटर की ओर लौटना पड़ा. साल 1977 में फिल्म ‘कथा संगम’ ने उनके करियर में नया मोड़ लाया. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

यादगार फिल्मों और अभिनय की छाप
उमेश ने ‘नागरा होले’ (1978), ‘गुरु शिष्यरु’ (1981), ‘अनुपमा’ (1981), ‘कामना बिल्लू’ (1983), और ‘वेंकट इन संकटा’ (2007) जैसी कई फिल्मों में अपनी अदाकारी का जादू बिखेरा. उनके अभिनय में भावनात्मक गहराई और कॉमेडी का संतुलन दर्शकों को हमेशा आकर्षित करता रहा.

कई बड़े कलाकारों के साथ किए काम
उमेश ने अपने करियर में कन्नड़ सिनेमा के सभी प्रमुख कलाकारों के साथ काम किया. इनमें राजकुमार, विष्णु वर्धन, अंबरीश, श्रीनाथ, शंकर नाग, अनंत नाग, अरविंद रमेश, बी सरोजा देवी और भारती शामिल थे. इसके अलावा उन्होंने तमिल अभिनेता शिवाजी गणेशन और रजनीकांत के साथ भी अभिनय किया. ‘गुरु शिष्यारू’ और प्रतिष्ठित कॉमेडी फिल्म ‘गोलमाल राधाकृष्ण’ में उनके अभिनय की प्रशंसा आलोचकों और दर्शकों दोनों ने की.

अदाकारी और विरासत
उमेश का अभिनय सिर्फ मनोरंजन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसमें भावनाओं और कॉमेडी का अद्भुत मिश्रण था. उनका योगदान कन्नड़ सिनेमा के इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा. उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री ने एक चमकते सितारे को खो दिया है. उमेश की यादें और उनकी फिल्मों में अभिनय की छाप हमेशा दर्शकों के दिलों में जीवित रहेगी.

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