'यूनिवर्सिटी की फीस नहीं भरी', HC में करिश्मा की बेटी का दावा, कोर्ट ने कहा- मेलोड्रामाटिक सुनवाई नहीं चाहता

हाईकोर्ट में शुक्रवार को अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा अपनी सौतेली मां प्रिया सचदेव कपूर के खिलाफ दायर मामले की सुनवाई हुई. यह मामला उनके दिवंगत पिता संजय कपूर की संपत्ति में हिस्सेदारी और बच्चों के खर्चों को लेकर है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस मामले में मेलोड्रामाटिक सुनवाई नहीं चाहता.

Anuj Kumar
Edited By: Anuj Kumar

नई दिल्ली: हाईकोर्ट में शुक्रवार को अभिनेत्री करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा अपनी सौतेली मां प्रिया सचदेव कपूर के खिलाफ दायर मामले की सुनवाई हुई. यह मामला उनके दिवंगत पिता संजय कपूर की संपत्ति में हिस्सेदारी और बच्चों के खर्चों को लेकर है. सुनवाई के दौरान कोर्ट ने साफ कहा कि वह इस मामले में मेलोड्रामाटिक सुनवाई नहीं चाहता.

वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी का दावा

सुनवाई के दौरान करिश्मा कपूर के बच्चों की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील महेश जेठमलानी ने दावा किया कि करिश्मा की बेटी, जो वर्तमान में अमेरिका की एक यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रही है, उसकी दो महीने की फीस अब तक जमा नहीं की गई। उनका कहना था कि करिश्मा और संजय कपूर के बीच हुए वैवाहिक समझौते के अनुसार, बच्चों की पढ़ाई, रहन-सहन और अन्य खर्चों की जिम्मेदारी संजय कपूर की थी. अब उनकी मृत्यु के बाद यह जिम्मेदारी प्रिया सचदेव कपूर पर आती है.

'बच्चों के सभी खर्च समय पर भरे गए' 

हालांकि, इस दावे को प्रिया कपूर के वकीलों ने पूरी तरह खारिज कर दिया. प्रिया के वरिष्ठ वकील ने आरोप लगाया कि बच्चों के सभी खर्च समय पर भरे गए हैं. उन्होंने कहा कि कॉलेज फीस सहित जितने भी दायित्व थे, वे सभी पूरे किए जा चुके हैं. उनका कहना था कि इस तरह के मामलों को कोर्ट में उठाने का मकसद केवल मीडिया में चर्चा में रहना है.

'30 सेकंड से ज्यादा समय बर्बाद नहीं करना चाहतीं'

जस्टिस ज्योति सिंह ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद स्पष्ट रूप से कहा कि इस तरह की छोटी-छोटी शिकायतें कोर्ट के सामने लाना उचित नहीं है. उन्होंने प्रिया कपूर के वकील से कहा कि इस प्रकार के मुद्दों का समाधान समय पर किया जाए, ताकि इन्हें बार-बार कोर्ट तक न लाया जाए. न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि वह इन विवादों पर 30 सेकंड से ज्यादा समय बर्बाद नहीं करना चाहतीं और यह मामला फिर से इसी तरह की शिकायतों के साथ उनके सामने नहीं आए.

'नाटकीय रूप देने की कोशिश ना करें'

उन्होंने यह भी कहा कि परिवार से जुड़े ऐसे मामलों को अदालत में नाटकीय रूप देने की कोशिश बिल्कुल भी नहीं होनी चाहिए. कोर्ट ने यह निर्देश दिया कि बच्चे किसी आर्थिक परेशानी में न रहें और फीस या अन्य जरूरतों से संबंधित कोई भी समस्या दोबारा अदालत में उठाने लायक स्थिति में न आए.
 

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