रणवीर की 'धुरंधर' 1000 करोड़ क्लब की ओर बढ़ी, बॉलीवुड में आई नई क्रांति का संकेत
'धुरंधर' ने भारत में 500 करोड़ के करीब पहुंचकर वैश्विक 1000 करोड़ क्लब की ओर मजबूत दावेदारी पेश कर दी है. इस फिल्म की ऐतिहासिक सफलता हिंदी सिनेमा, रणवीर सिंह और बॉलीवुड के बदलते बॉक्स ऑफिस नियमों के लिए क्या मायने रखती है? चलिए जानते है.

मुंबई: हिंदी सिनेमा के बॉक्स ऑफिस पर ‘धुरंधर’ जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, वह अब एक मिसाल बनती जा रही है. प्री-रिलीज हाइप, त्योहारों की टाइमिंग और स्पॉइलर से भरे प्रमोशन पर निर्भर रहने वाली इंडस्ट्री में आदित्य धर की यह पॉलिटिकल-एक्शन फिल्म लगभग हर पारंपरिक नियम को तोड़ते हुए सामने आई है और हाल के वर्षों की सबसे प्रभावशाली थिएट्रिकल सफलताओं में शामिल हो चुकी है.
तीन घंटे 33 मिनट की लंबी अवधि, रिलीज से पहले कहानी को पूरी तरह गोपनीय रखना और किसी भी फेस्टिव या छुट्टी वाले स्लॉट का सहारा न लेना, इन सबके बावजूद भारत में करीब 500 करोड़ रुपये नेट कलेक्शन की ओर बढ़ती ‘धुरंधर’ को सिर्फ एक हिट कहना कम होगा. इससे भी बड़ी बात यह है कि फिल्म ने सांस्कृतिक बहस छेड़ी है, राजनीतिक असहजता पैदा की है और यह साबित किया है कि सिनेमा बिना किसी माफी के सवाल उठा सकता है.
1000 करोड़ क्लब की ओर तेज कदम
मौजूदा रफ्तार को देखते हुए ‘धुरंधर’ अब वैश्विक स्तर पर 1000 करोड़ रुपये क्लब में एंट्री की ओर मजबूती से बढ़ रही है. यह उपलब्धि अब तक भारतीय सिनेमा की चुनिंदा ब्लॉकबस्टर फिल्मों को ही नसीब हुई है.
दो हफ्तों में कमाई
आंकड़ों के मुताबिक, ‘धुरंधर’ ने अपने दो हफ्तों के थिएट्रिकल रन में दुनिया भर में करीब 700 करोड़ रुपये ग्रॉस का कारोबार कर लिया है. दूसरे हफ्ते की मजबूत कमाई, वीकेंड पर हाउसफुल शो और शुरुआती उछाल के बाद भी बनी दर्शकों की रुचि को देखते हुए ट्रेड का मानना है कि तीसरे वीकेंड तक यह फिल्म 1000 करोड़ का आंकड़ा पार कर सकती है. जो किसी नॉन-फ्रेंचाइज हिंदी फिल्म के लिए बेहद दुर्लभ है.
दिग्गज फिल्मों की खास सूची
अगर ‘धुरंधर’ इस क्लब में शामिल होती है, तो यह उन फिल्मों की कतार में खड़ी होगी, जिनमें शामिल हैं.
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दंगल – ₹2070.3 करोड़
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बाहुबली 2 – ₹1788.06 करोड़
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पुष्पा 2 – ₹1742.1 करोड़
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आरआरआर – ₹1230 करोड़
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जवान – ₹1160 करोड़
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पठान – ₹1055 करोड़
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कल्कि 2898 ईस्वी – ₹1042.25 करोड़
इस सूची में ‘धुरंधर’ का अलग नाम होगा, क्योंकि इसने न तो मिथक, न फैंटेसी और न ही किसी स्थापित फ्रेंचाइज़ के सहारे यह मुकाम हासिल किया, बल्कि एक कठोर और राजनीतिक रूप से मुखर कहानी के दम पर दर्शकों का भरोसा जीता.
निर्देशक की सोच को मिला श्रेय
ट्रेड एक्सपर्ट और निर्माता गिरीश जौहर इस सफलता का श्रेय पूरी तरह निर्देशक को देते हैं. वह कहते हैं कि सच कहूं तो, इसका श्रेय निर्देशक को जाता है. आदित्य धर ने फिल्म को जिस तरह से परिकल्पित किया है, उनका नजरिया, उनकी कहानी कहने का तरीका, ये सब कमाल है. दर्शकों को समझदार माना गया है. उन्हें कहानी या किरदारों को जबरदस्ती नहीं समझाया गया, और इसी से सारा फर्क पड़ा. जौहर के मुताबिक, फिल्म का जॉनर-ब्लेंड पॉलिटिकल थ्रिलर, स्पाई ड्रामा और एक्शन इसके प्रभाव को और व्यापक बनाता है. यह देशभक्ति से भरपूर है, इसमें रोमांच है, ड्रामा है, एक्शन है - सब कुछ एक साथ मिलता है. और जब सब कुछ सही होता है, तो दर्शक ज़बरदस्त प्रतिक्रिया देते हैं.
रणवीर सिंह के करियर का टर्निंग पॉइंट
‘धुरंधर’ रणवीर सिंह के करियर में भी एक निर्णायक मोड़ साबित हो रही है. हाल के वर्षों में बॉक्स ऑफिस चर्चाओं से धीरे-धीरे बाहर होते जा रहे रणवीर ने इस फिल्म के जरिए न सिर्फ अपनी कमर्शियल ताकत फिर साबित की है, बल्कि एक परिपक्व कलाकार के रूप में नई पहचान भी बनाई है.
जौहर कहते हैं, वह भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली अभिनेताओं में से एक हैं. हर अभिनेता के जीवन में उतार-चढ़ाव आते हैं. इस फिल्म ने उन्हें एक बहुत ऊंचा मुकाम दिलाया है और भविष्य के लिए एक मजबूत आधार प्रदान किया है. इगो फ्रि परफॉर्मेंस बनी ताकत.
रणवीर सिंह की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि उन्होंने निर्देशक की सोच को पूरी तरह अपनाया. रणवीर ने निर्देशक के दृष्टिकोण को पूरी तरह से अपनाया. उन्होंने अक्षय खन्ना, संजय दत्त, अर्जुन रामपाल और राकेश बेदी जैसे दमदार अभिनेताओं को मुख्य भूमिका निभाने का मौका दिया.
सबसे बड़ा संभावित रिकॉर्ड
फिलहाल शाहरुख खान ही ऐसे बॉलीवुड अभिनेता हैं, जिनकी दो फिल्में 1000 करोड़ क्लब में शामिल हैं पठान और जवान. अगर ‘धुरंधर’ यह आंकड़ा पार करती है और मार्च 2026 में रिलीज होने वाली ‘धुरंधर 2’ भी सफल रहती है, तो रणवीर सिंह सबसे तेज़ दो 1000 करोड़ ग्लोबल ग्रॉसर देने वाले हिंदी अभिनेता बन सकते हैं.
सिर्फ आंकड़ों से आगे की कहानी
‘धुरंधर’ की सफलता केवल कमाई तक सीमित नहीं है. यह इस बात का संकेत है कि दर्शक अब बेबाक, आक्रामक और राजनीतिक रूप से स्पष्ट हिंदी सिनेमा को अपनाने के लिए तैयार हैं.
जब ‘धुरंधर’ 1000 करोड़ क्लब में कदम रखेगी, तो यह सिर्फ एक कारोबारी उपलब्धि नहीं होगी, बल्कि इस बात का सबूत होगी कि हिंदी सिनेमा का अगला बड़ा उछाल सुरक्षित खेलने से नहीं, बल्कि दर्शकों पर भरोसा करने से आएगा.


