द स्मगलर वेब सीरीज में इमरान हाशमी की कमाल की एक्टिंग, ग्लैमर ने लेकिन बनाया बोरिंग!
आज मकर सक्रांति के मौके पर 'टास्करी: द स्मगलर'स वेब' नेटफ्लिक्स पर रिलीज हो गई है. इस सीरीज में इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में हैं, जो एक रोचक अपराध कहानी पेश करते हैं.

Taskaree: The Smuggler's Web Review:- 14 जनवरी 2026 को नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई वेब सीरीज 'टास्करी: द स्मगलर'स वेब' एक रोचक अपराध कहानी पेश करती है. नीरज पांडे और राघव जैरथ के निर्देशन में बनी इस सीरीज में इमरान हाशमी मुख्य भूमिका में हैं. शरद केलकर, अनुराग सिन्हा, नंदीश संधू, अमृता खानविलकर और जमील खान जैसे कलाकार भी इसमें नजर आ रहे हैं.
हवाई अड्डों की तस्करी की दुनिया
सीरीज हवाई अड्डों पर होने वाली सोने और नशीले पदार्थों की तस्करी पर केंद्रित है. कहानी में दिखाया गया है कि कैसे सीमा शुल्क अधिकारी इन गैरकानूनी गतिविधियों पर नजर रखते हैं. कहानी गैर-रेखीय तरीके से चलती है और दर्शकों को बांधे रखने में सफल रहती है.
लेकिन तेज एडिटिंग, चमकदार ग्राफिक्स और जोरदार बैकग्राउंड म्यूजिक के कारण कहानी में असली तनाव और यथार्थवाद कम हो जाता है. विदेशी लोकेशन्स जैसे इटली और बैंकॉक दिखाने पर ज्यादा जोर देने से सीरीज थोड़ी बनावटी लग रही है.
मजबूत कहानी और किरदार
कहानी की शुरुआत निलंबित सीमा शुल्क अधिकारी अर्जुन मीना (इमरान हाशमी) से होती है. वित्त मंत्री के दबाव में एक नई टीम बनाई जाती है, जिसे प्रमुख हवाई अड्डों पर तैनात किया जाता है. इस टीम में प्रकाश कुमार (अनुराग सिन्हा), रविंदर गुर्जर (नंदीश संधू) और मिताली कामथ (अमृता खानविलकर) जैसे ईमानदार अधिकारी शामिल हैं.
ये लोग मिलकर बड़े तस्कर बड़ा चौधरी (शरद केलकर) के नेटवर्क को उजागर करने की कोशिश करते हैं. चौथे एपिसोड के बाद कहानी में असली मोड़ आती है और घटनाएं जुड़ने लगती हैं.
इमरान हाशमी का अभिनय
इमरान हाशमी ने अर्जुन मीना का किरदार बहुत संयम से निभाया है. वे ज्यादा ड्रामेबाजी से बचते हैं और किरदार को विश्वसनीय बनाते हैं. अनुराग सिन्हा ने सहायक आयुक्त के रूप में सबसे ज्यादा प्रभाव छोड़ा है. नंदीश संधू और अमृता खानविलकर ने भी अपने किरदारों में गहराई दी है. शरद केलकर का खलनायक थोड़ा स्टाइलिश लगता है, लेकिन उसका डरावना पक्ष कमजोर रह जाता है.
सीरीज में कहां रह गई कमी?
नीरज पांडे की शैली में ज्यादा पॉलिश और दिखावा है, जो कहानी की गंभीरता को कम कर देता है. अगर सीरीज में कम चमक-दमक और ज्यादा वास्तविकता होती, तो इसका असर कहीं ज्यादा गहरा होता. फिर भी मजबूत अभिनय और रोचक कथानक के कारण 'टास्करी' देखने लायक है. यह एक अच्छी अपराध थ्रिलर है, जो तस्करी की दुनिया की झलक दिखाती है, लेकिन ज्यादा यथार्थवाद की कमी खलती है.


