वैलेंटाइन स्पेशल: बॉलीवुड की वो 7 फिल्में जिन्होंने प्यार से ज्यादा उसके दर्द को सराहा

वैलेंटाइन वीक आते ही हम अक्सर बॉलीवुड की लीजेंडरी प्रेम कहानियों, मधुर रोमांटिक गीतों और सुखद अंत वाली फिल्मों की ओर आकर्षित होते हैं. लेकिन अगर गौर से देखा जाए तो हिंदी सिनेमा की कई सुपरहिट और यादगार फिल्में वे हैं, जिन्होंने प्यार के जश्न से ज्यादा उसके बिखरने की कसक को परदे पर उकेरा है. आइए नजर डालते हैं ऐसी 7 फिल्मों पर.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

वैलेंटाइन स्पेशल: वैलेंटाइन वीक आते ही हम अक्सर बॉलीवुड की लीजेंडरी प्रेम कहानियों, मधुर रोमांटिक गीतों और सुखद अंत वाली फिल्मों की ओर आकर्षित होते हैं. लेकिन अगर गौर से देखा जाए तो हिंदी सिनेमा की कई सुपरहिट और यादगार फिल्में वे हैं, जिन्होंने प्यार के जश्न से ज्यादा उसके बिखरने की कसक को परदे पर उकेरा है. इन फिल्मों में अधूरा प्रेम, बिछड़ने की पीड़ा और अंततः उसी मोहब्बत में टूटकर बिखर जाने की कहानी दिखाई जाती है. यहां प्रेम को नहीं, बल्कि उससे मिले दर्द और दुख को कथा का केंद्र बनाया जाता है. इन कहानियों में प्यार कोई फैरीटेल नहीं, बल्कि एक ऐसी अनुभूति है जो टूटकर इंसान को भीतर तक बदल देती है.

इन फिल्मों में प्रेम का अगला पड़ाव साथ निभाना नहीं, बल्कि दिल का टूटना, रिश्तों का धीरे-धीरे फीका पड़ जाना और कभी-कभी उसी प्यार का विनाशकारी रूप ले लेना होता है. खामोशी, अकेलापन और भीतर चल रहे भावनात्मक संघर्ष के बीच ये कहानियां ऐसे किरदार रचती हैं, जिनकी पहचान उनकी सफलताओं से नहीं, बल्कि उनके दुख, लड़ाइयों और संघर्षों से बनती है. ये फिल्में प्रेम के बाद आने वाले खालीपन और सच्चाइयों को अधिक यथार्थवादी, सूक्ष्म और संवेदनशील ढंग से सामने लाती हैं.

आइए नजर डालते हैं ऐसी 7 फिल्मों पर, जिन्होंने दिल टूटने की सच्चाई को बेहद संवेदनशील अंदाज में पेश किया.

1. ओमकारा (2006)

शेक्सपीयर के 'ओथेलो' पर आधारित यह फिल्म प्रेम में विश्वासघात और अविश्वास की त्रासदी को सामने लाती है. छल और शक कैसे रिश्तों को तोड़ देते हैं, यह कहानी उसी का चित्रण है.विशाल भारद्वाज के निर्देशन में बनी इस फिल्म में सैफ अली खान, करीना कपूर और अजय देवगन ने दमदार भूमिकाएं निभाईं.

2. गजनी (2008)

याददाश्त खो देने के दर्द और बदले की आग में जलते एक प्रेमी की कहानी. संजय का अधूरा प्यार और उसकी पीड़ा हर दृश्य में महसूस होती है. आमिर खान और असिन की यह फिल्म प्रेम के अधूरे रह जाने की मार्मिक कहानी बनकर सामने आती है.

3. रॉकस्टार (2011)

इस फिल्म में प्यार पलभर का है, लेकिन उसका दर्द जीवनभर का. जॉर्डन का टूटा हुआ दिल उसकी पहचान और संगीत दोनों को आकार देता है. रणबीर कपूर और नरगिस फाखरी की कहानी यह दिखाती है कि प्रेम की वापसी भी हमेशा सुखद अंत नहीं लाती.

4. लुटेरा (2013)

संयमित और शांत अंदाज में कही गई यह कहानी जुदाई और बलिदान के दर्द को उभारती है. विक्रमादित्य मोटवानी के निर्देशन में बनी इस फिल्म में रणवीर सिंह और सोनाक्षी सिन्हा ने भावनात्मक गहराई को सजीव किया.

5. आशिकी 2 (2013)

रोमांस से शुरू होकर यह कहानी त्रासदी में बदल जाती है. प्यार कैसे लत और आत्म-विनाश में बदल सकता है, यह फिल्म उसी भावनात्मक संघर्ष को दर्शाती है. आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर की यह फिल्म दिल टूटने की गूंज को लंबे समय तक छोड़ जाती है.

6. सनम तेरी कसम (2016)

एक मासूम प्रेम कहानी से शुरू होकर यह फिल्म गहरी त्रासदी में बदलती है. यहां दिल टूटना सिर्फ एक दौर नहीं, बल्कि जीवन की स्थायी स्थिति बन जाता है. हर्षवर्धन राणे और मावरा होकेन ने इस दर्द को संवेदनशीलता से निभाया.

7. लैला मजनू (2018)

क्लासिक प्रेम कथा का आधुनिक रूपांतरण, जहां दीवानगी और तड़प प्रेम का दूसरा नाम बन जाते हैं. यहां दिल टूटना एक जीवनशैली जैसा प्रतीत होता है. त्रिप्ति डिमरी और अविनाश तिवारी की यह फिल्म प्रेम की पीड़ा को नए अंदाज में सामने लाती है.

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