बजट से पहले एक्शन में कृषि मंत्रालय, राज्यों को जारी किए यह निर्देश
बजट से पहले केंद्र सरकार ने कृषि योजनाओं की सख्त समीक्षा की है. शिवराज सिंह चौहान ने राज्यों को समय पर फंड उपयोग की चेतावनी दी, जबकि ‘विकसित भारत–जी राम जी’ योजना के बजट में बड़ी बढ़ोतरी का संकेत दिया गया है.

नई दिल्लीः केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 1 फरवरी को लोकसभा में आम बजट पेश करने वाली हैं. बजट की तैयारियों को अंतिम रूप देने के बीच केंद्र सरकार का फोकस कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं पर साफ नजर आ रहा है. इसी क्रम में शुक्रवार को केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गुजरात और पंजाब के कृषि मंत्रियों के साथ एक अहम समीक्षा बैठक की. इस बैठक का उद्देश्य केंद्र सरकार की प्रमुख कृषि योजनाओं की प्रगति का आकलन करना और बजट से पहले राज्यों की भूमिका को स्पष्ट करना था.
केंद्र की प्रमुख कृषि योजनाओं पर मंथन
कृषि मंत्रालय के अनुसार, बैठक में प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY), कृषोन्नति योजना (KY) सहित कई अहम केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा की गई. इन योजनाओं के तहत किसानों की आय बढ़ाने, आधुनिक खेती को बढ़ावा देने और कृषि अवसंरचना को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है. बैठक में यह भी देखा गया कि अलग-अलग राज्यों में इन योजनाओं का लाभ जमीन पर किस हद तक पहुंच पाया है.
राज्यों की प्रगति और बजट उपयोग पर सख्ती
बैठक के दौरान राज्यवार भौतिक और वित्तीय प्रगति, लंबित प्रस्तावों और बजट उपयोग की स्थिति पर गहन चर्चा की गई. कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि केंद्र से जारी की गई धनराशि का समयबद्ध, पारदर्शी और नियमों के अनुरूप उपयोग बेहद जरूरी है. उन्होंने कहा कि जिन राज्यों द्वारा फंड का प्रभावी और समय पर इस्तेमाल किया जाएगा, उन्हें आगामी बजट में अधिक और निर्बाध वित्तीय सहायता दी जाएगी.
देरी पर चेतावनी, नियमों का पालन जरूरी
शिवराज सिंह चौहान ने यह भी साफ किया कि केंद्रांश से जुड़े ब्याज की तय राशि समय पर जमा करना अनिवार्य है. इसमें देरी से न सिर्फ योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आती है, बल्कि अगली किस्त की मंजूरी पर भी नकारात्मक असर पड़ सकता है. बैठक में पंजाब के कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, गुजरात के कृषि राज्य मंत्री रमेशभाई कटारा और कृषि सचिव देवेश चतुर्वेदी भी मौजूद रहे.
‘विकसित भारत – जी राम जी’ योजना पर बड़ा फोकस
इस साल के बजट में कृषि और ग्रामीण विकास से जुड़ी योजनाओं के लिए आवंटन बढ़ाने का प्रस्ताव है. खास तौर पर मनरेगा की जगह लाई गई नई योजना ‘विकसित भारत – जी राम जी’ को लेकर सरकार गंभीर है. बताया जा रहा है कि इस योजना का बजट करीब 72 प्रतिशत तक बढ़ाया जा सकता है.
रोजगार और सुरक्षा का नया मॉडल
हाल ही में उत्तराखंड के चमोली जिले में आयोजित किसान सम्मेलन में शिवराज सिंह चौहान ने कहा था कि मनरेगा की कमियों को दूर करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘विकसित भारत – जी राम जी योजना’ की शुरुआत की है. इस योजना में 100 से 125 दिन तक रोजगार की गारंटी, बेरोजगार भत्ता और लंबित मजदूरी पर ब्याज का प्रावधान शामिल है. पिछले बजट में जहां इसके लिए 88 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, वहीं इस बार इसे बढ़ाकर लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है.
बजट से पहले साफ संदेश
बजट से पहले हुई यह बैठक केंद्र सरकार का स्पष्ट संदेश देती है कि कृषि योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी. जो राज्य समय पर और सही तरीके से योजनाओं को लागू करेंगे, उन्हें केंद्र से भरपूर सहयोग मिलेगा. इससे किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.


